Loading...
You are here:  Home  >  बहस  >  Current Article

थोथे नारे -जुमलों से देश चला..

By   /  January 2, 2020  /  No Comments

    Print       Email
इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..

-सत्य पारीक||

अंग्रेजों के शासन में नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने नारा दिया ” तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा ” उधर लोकमान्य तिलक ने नारा दिया “स्वराज्य लेना मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है” , अंग्रेजों भारत छोड़ो , जैसे नारे लगाने वाले नेताओं ने जेल यात्राएं , काला पानी की सजा से लेकर फ़ांसी तक की सजाएं भुगती तब जाकर आजादी का सूरज उगा देश में , आजादी के बाद नेहरू युग आया जिन्होंने ” आराम है हराम , पंचशील का सिद्धांत , नया भारत , सिंचाई के बांध , बिजली घर , आत्म रक्षा , सेना को मजबूत करो , शिक्षा , स्वास्थ्य आदि से सम्बंधित नारे दिये ।
उनके जाने के बाद बुद्धिजीवियों के साथ राजनेताओं में चिंता बढ़ी अब देश का क्या होगा ? लालबहादुर शास्त्री ने नेहरू का बेहतर विकल्प दिया , देश में उस समय अनाज व सुरक्षा की बड़ी समस्या थी , एक तरफ देश दाने दाने के लिये तरस रहा था वहीं पड़ोसी देश पाकिस्तान सीमा पर युद्ध करने में लगा था , तब शास्त्री ने नारा दिया ” जय जवान जय किसान ” इस नारे ने जनता का मन मोह लिया , पंजाब ने आनाज की इतनी पैदावार बढ़ाई कि देश को आत्मनिर्भर बना दिया. उधर हरियाणा कीमाताओं ने अपने जिगर के टुकडों से सेना की बैरक भर दी , इससे खुश हो कर शास्त्री ने उनकी पुरानी मांग पूरी कर उन्हें हरियाणा के रूप में नया राज्य दे दिया ।
शास्त्री जी के असामयिक निधन के बाद फिर भारत में प्रधानमंत्री की खोज शुरू हुई जो जाकर इंदिरा गांधी पर पूरी हुई. जिन्होंने ‘ गूंगी गुड़िया ‘ की छवि तोड़ कर ‘आयरन लेडी , शेरनी और दुर्गा’ जैसी उपाधि प्राप्त की. उन्होंने अपने से पहले प्रधानमंत्रियों को पीछे छोड़ते हुए अनेक कीर्तिमान स्थापित किये परमाणु बम बना कर दुनिया को चकित किया , गरीबी दूर हटाओ , अनुशासन , बैंको के राष्ट्रीयकरण के साथ साथ चांद पर भारतीयों को भेजा , सेना को आधुनिक आयुधों से सुसज्जित किया , पाकिस्तान के टुकड़े कर बंगला देश बनाया , पाक के 92 हजार सैनिकों को बंधी बनाया.
आंतकवाद से लड़ते लड़ते इंदिरा जी शहीद हो गई , उनके बाद राजीव युग में युवाओं को मताधिकार का अधिकार दिया और इक्कीसवीं सदी का स्वप्न दिखाया , दल बदल कानून बनाया , पंचायत कानून में संशोधन किया. ये भी शहीद हुए .उनके बाद वी पी सिंह ने मण्डल आयोग लागू कर ओबीसी को आरक्षण का हकदार बना दिया. वीपी सिंह के इस निर्णय से देश में हंगामा मच गया और इसके विरोध में कई युवकों ने आत्मदाह तक कर लिया. , फिर अटल जी , देवगोडा , चरणसिंह , चन्द्रशेखर , आई के गुजराल जैसे नेता भी प्रधानमंत्री बने , जिनमें चन्द्रशेखर ने ‘ चार माह बनाम चालीस साल ‘ का फ्लॉप नारा दिया, वहीं अटलजी ने शास्त्री जी के नारे का पोस्टमार्टम कर उसे जय जवान जय किसान जय विज्ञान कर दिया. उन्होंने लगातार पांच परमाणु विस्फोट कर देश को परमाणु शक्ति से लैस कर दिया.
इसके बाद में नरसिम्हा राव ने प्रधानमंत्री बनकर उदारीकरण जैसे कार्य किये. फिर मनमोहन सिंह ने कई कीर्तिमान बनाते हुए देश में वित्तीय सुधार किये जिसके चलते भारत एक बड़ी आर्थिक शक्ति के रूप में उभरा तथा जीडीपी को उच्च स्तर पर पहुँचा. 2014 में अनगिनत वादे , झांसे , जुमलों के साथ नरेन्द्र मोदी सत्ता में आए तो पांच साल कांग्रेस की आलोचना और कालाधन लाने आदि जुमलों में गुजार दिये. इनके राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने खुद एक लाइन में “सब चुनावी जुमले थे” कहकर संबोधित किया और विपक्ष की कमजोरी का फायदा उठा कर फिर से सत्तारूढ़ हो गये. तब संघ ने पासा फेंक कर शाह को गृह मंत्री बना दिया और अब अपना हिन्दू वादी एजेण्डे को पूरा कराने में जुटी है. इन्हें कोई लेना देना नहीं देश की जी डी पी से , महंगाई से, सुरसा के मुंह की तरह बढ़तीबेरोजगारी से या फिर देश के विकास से. केवल इरादा देश को हिंदू राष्ट्र बनाना मात्र है. चाहे धर्मों की जंग कितनी तेज हो जाए?
सोचिये कि इन निर्णयों से देश को क्या मिला ?
धारा 370 समाप्त करने से?
तीन तलाक कानून बनाने से?
जम्मू कश्मीर लद्दाख को केंद्र प्रशासित राज्य बनाने से ?
नागरिक कानून को संशोधित करने जी इस टी लागू करने से?
नोटबन्दी करने से?
राम मंदिर निर्माण की अनुमति से?
जी डी पी 4 प्रतिशत गिरने से?
महंगाई सीमा से पार जाने से?
नागरिकता संशोधन अधिनियम बनाने से?

Facebook Comments

इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..
    Print       Email
  • Published: 5 months ago on January 2, 2020
  • By:
  • Last Modified: January 2, 2020 @ 10:14 am
  • Filed Under: बहस

About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं. हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो. आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें - मॉडरेटर

Manisa escort Tekirdağ escort Isparta escort Afyon escort Çanakkale escort Trabzon escort Van escort Yalova escort Kastamonu escort Kırklareli escort Burdur escort Aksaray escort Kars escort Manavgat escort Adıyaman escort Şanlıurfa escort Adana escort Adapazarı escort Afşin escort Adana mutlu son

You might also like...

न्यू इंडिया में मंदी: स्किल इंडिया का पोस्टमॉर्टम..

Read More →
Eyyübiye escort Fatsa escort Kargı escort Karayazı escort Ereğli escort Şarkışla escort Gölyaka escort Pazar escort Kadirli escort Gediz escort Mazıdağı escort Erçiş escort Çınarcık escort Bornova escort Belek escort Ceyhan escort Kutahya mutlu son
Page Reader Press Enter to Read Page Content Out Loud Press Enter to Pause or Restart Reading Page Content Out Loud Press Enter to Stop Reading Page Content Out Loud Screen Reader Support
WhatsApp chat
%d bloggers like this: