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मोदी की जगह अमित शाह को प्रधानमंत्री बनाएगा संघ..

By   /  January 7, 2020  /  No Comments

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-सत्य पारीक।।

बीते दिनों संघ के शीर्ष नेतृत्व की बैठक में तय किया गया कि प्रधानमंत्री पद पर नरेन्द्र मोदी के स्थान पर अमित शाह को बैठाने की प्रक्रिया शुरू कर देना चाहिए। क्योंकि मोदी ने प्रधानमंत्री पद पर लम्बा समय पूरा करने के उदेश्य से संघ के हिंदूवादी एजेंडे को लटकाए रखा है। अति उच्च पदस्थ संघ सूत्रों के अनुसार मोदी ने संघ के एजेंडे को प्रधानमंत्री पद पर बैठने के पांच साल बाद भी लटका कर रखा क्योंकि उन्हें प्रधानमंत्री पद से प्रेम अधिक था न कि संघ के हिंदूवादी एजेंडे को लागू करने की चाह से ।

इसके पीछे कहानी यही थी कि मोदी चाहते थे कि भाजपा के संसद में कथन कि उसकी पूर्ण बहुमत की सरकार होने के बाद राममंदिर किया जाएगा, के वायदे को पूरा नहीं कर लटकाए रखा जाए ताकि वे प्रधानमंत्री बने रहें। उनकी इस नीति को संघ समझ गया तभी तो अमित शाह को अपने एजेंडे को पूरा करने गृह मंत्री बनवाया , जिन्हें मोदी नहीं चाहते थे कि शाह उनकी सरकार में नम्बर दो बने। वे तो केवल शाह को भाजपा अध्यक्ष बनाए रखना चाहते थे ताकि शाह उन्हें केवल सरकार बनाए रखने में हनुमान की भूमिका अदा करने के साथ साथ राज्यों में पार्टी का विस्तार करते रहें। मोदी के इस एजेंडे को भी संघ ताड चुका था ।

संघ ने मोदी के प्रधानमंत्री पद से दिये गए सभी भाषणों का अध्ययन कराने के बाद जो रिपोर्ट बनाई उससे सपष्ट हो गया कि उन्होंने स्वंय को राजनीति का श्लाका पुरूष बनाने पर पूरा जोर लगा दिया। उन्होंने न तो हिंदुत्व औऱ न ही संघ की विचारधारा को प्रचारित किया। इससे संघ को सोचने पर मजबूर होना पड़ा है कि मोदी केवल संघ को मुगालते में रख कर स्वंय प्रधानमंत्री पद पर बने रहने का रिकॉर्ड बनाने के एजेंडे पर काम कर रहे हैं ।

 इसी के चलते संघ ने शाह को अपना एजेंडा पूरा करने का जिम्मा देकर गृह मंत्री पद पर बैठा दिया, जिन्होंने तेजगति से संघ के एजेंडे को पूरा करने का काम छह माह में कर दिया, जिसे मोदी पांच साल से लटकाए बैठे थे। अब संघ ने मोदी की विदेश यात्राओं का अध्ययन कराया है, जिनसे संघ की नीतियों को क्या लाभ पहुंचा है।  यही कारण था कि मोदी ने गत दिनों एक निजी खबरिया चैनल से अपने विदेश दौरों का एक रिपोर्ट कार्ड पेश कराया था कि मोदी के विदेश दौरों पर कम खर्चा होता है लेकिन इससे संघ सन्तुष्ट नहीं हुआ उसे तो अपने हिंदुत्व के एजेंडे का प्रचार प्रसार से मतलब है।

इस बात को अब नरेंद्र मोदी भी अच्छी तरह समझ चुके हैं कि संघ उन्हें कभी भी प्रधानमंत्री पद से हटा उनके ही हनुमान को उनका राम बना सकता है। यही कारण है कि पिछले दिनों हुई रैलियों में उनका निस्तेज चेहरा सामने आया।

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