Loading...
You are here:  Home  >  मीडिया  >  Current Article

डॉ. सर्वप्रिया सांगवान को मिला देश का सबसे प्रतिष्ठित रामनाथ गोयनका पत्रकारिता अवार्ड..

By   /  January 21, 2020  /  No Comments

    Print       Email
इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..

जो अहमियत भारतीय फिल्म जगत में ‘दादा साहेब फाल्के पुरस्कार’ की है , वही अहमियत पत्रकारिता के क्षेत्र में ‘रामनाथ गोयनका पत्रकारिता पुरस्कार’ की है । स्वर्गीय रामनाथ गोयनका भारतीय पत्रकारिता के ‘पितृ पुरूष’ माने जाते हैं । भारत में खोजी पत्रकारिता की नींव रखने वाले ‘इंडियन एक्सप्रैस’ समूह के मालिक रामनाथ गोयनका एक निर्भिक एवं सच का साथ देने वाले इंसान के रूप में याद किये जाते हैं । हिंदी दैनिक ‘जनसत्ता’, मराठी दैनिक ‘लोकसत्ता’ ‘फाइनेंशियल एक्सप्रैस’ , फिल्म दुनिया के प्रमुख अखबार ‘स्क्रीन वर्लड’ आदि अनेकों प्रकाशनों की नींव रामनाथ गोयनका ने ही रखी थी । इन्हीं रामनाथ गोयनका जी की स्मृति में पत्रकारिता में जान जोखिम में डाल कर उत्कृष्ट रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों को हर वर्ष कई कैटेगरीज में रामनाथ गोयनका पत्रकारिता पुरस्कार दिया जाता है । पुरस्कार में एक लाख रूपये के नकद इनाम के अलावा शानदार स्मृति चिन्ह भी शामिल है ।

अपने जिले रोहतक , अपने प्रदेश हरियाणा और अपने देश भारत का नाम पत्रकारिता के क्षेत्र में जगमग करने वाली सर्वप्रिया सांगवान ( ब्राडकॉस्ट जर्नलिस्ट BBC) को देश के सबसे प्रतिष्ठित रामनाथ गोयनका पत्रकारिता पुरस्कार से सम्मानित किया गया है । दिल्ली के पांच सितारा होटल “ताज पैलेस” के खचाखच भरे सभागार में भारत के महमहिम राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद ने अपने हाथों से सर्वप्रिया सांगवान को यह पुरस्कार प्रदान किया ।

सर्वप्रिया को यह पुरस्कार उनकी एक खोजपरक समाचार स्टोरी पर दिया गया है , जो कि उन्होंनें आदिवासी बहुल एवं नक्सल प्रभावित राज्य झारखंड में बेहद विषम परिस्थितियों में कवर की थी । तकरीबन छह दिनों तक झारखंड के दुर्गम इलाकों की खाक छानने के बाद सर्वप्रिया ने बीबीसी को रिपोर्ट दी कि भारत के परमाणु कार्यक्रम की वजह से किस तरह से झारखंड के जादूगोड़ा इलाके के लोग भयानक मुश्किलें झेल रहे हैं । सर्वप्रिया की बीबीसी में प्रसारित इस स्टोरी का शीर्षक था “झारखंड का एक इलाका भारत के न्यूकलियर सपनों की भयानक कीमत चुका रहा है “। दरअसल पिछले पचास वर्ष से भारत के परमाणु रिएक्टरों को न्यूक्लियर की आपूर्ति के लिए यूरेनियम कारपोरेशन आफ इंडिया लिमिटेड (यूसीआईएल) 1967 से झारखंड में यूरेनियम की खुदाई कर रही है । यूरेनियम की सात खदानें झारखंड के पूर्वी सिंभूमि जिले के जादूगोड़ा , नरवापहाड़ , बांदुरंगा , तुरामडीह ,भाटिन , मोमूलडीह और बागजाता में हैं । इन खदानों के आसपास रहने वाले लोगों के हजारों बच्चे या तो जन्म से ही विक्लांगता लेकर पैदा होते हैं या फिर बाद में विक्लागता का शिकार हो जाते हैं । इन विक्लांगों की तस्वीरे बहुत ही भयावह नजारा पेश करती हैं ।

गौरतलब है कि पत्रकारिता के क्षेत्र में सर्वाधिक लोकप्रिय अवार्ड माना जाने वाला “रामनाथ गोयनका पत्रकारिता पुरस्कार” वर्ष 2006 में शुरू हुआ । यह पुरस्कार प्रिंट , इलेक्ट्रानिक व डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में एक्सीलैंट (उत्कृष्ट) कार्य करने वाले गिनती के पत्रकारों को ही मिलता है । अवार्ड के लिए पत्रकारों का चयन एक स्वतंत्र जूरी द्वारा किया जाता है । इस वर्ष अवार्ड के लिए हकदार उत्कृष्ट पत्रकारों का चयन करने लिए बनाई गई जूरी में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज न्यायमूर्ति बीएन कृष्णन के अलावा भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त रह चुके डा. एसवाई कुरैशी , जिंदल गलोबल यूनिवर्सटी के स्कूल ऑफ जर्नलिज्म के प्रौफेसर व डीन टॉम गोल्डस्टीन तथा इंडियन कांऊसिल ऑफ सोशल साइंस रिसर्च में वरिष्ठ फैलो व जानीमानी पत्रकार पामेला फिलीपोस शामिल थीं ।

इस मौके पर सर्वप्रिया को अपना आशीर्वाद देने के लिए सर्वप्रिया के गुरू NDTV के कार्यकारी संपादक रवीश कुमार भी कार्यक्रम में विशेष रूप से मौजूद थे । बीबीसी (हिंदी) के संपादक मुकेश शर्मा के अलावा पत्रकारिता जगत की तमाम बड़ी हस्तियां भी समारोह में मौजूद थीं ।

सर्वप्रिया की उस पूरी स्टोरी का लिंक जिस पर उसे यह पुरस्कार मिला है ।

Facebook Comments

इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..
    Print       Email
  • Published: 1 month ago on January 21, 2020
  • By:
  • Last Modified: January 21, 2020 @ 1:00 pm
  • Filed Under: मीडिया

About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं. हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो. आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें - मॉडरेटर

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

You might also like...

भारतीय पत्रकारिता को फफूंदी बनाने वाली पत्रकार यूनियनें..

Read More →
Page Reader Press Enter to Read Page Content Out Loud Press Enter to Pause or Restart Reading Page Content Out Loud Press Enter to Stop Reading Page Content Out Loud Screen Reader Support
WhatsApp chat
%d bloggers like this: