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टीवी-9 भारतवर्ष का वरिष्ठ अधिशासी संपादक करता था यौन शोषण, आरोपों के बाद दिया इस्तीफा..

By   /  January 24, 2020  /  No Comments

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-बसंत कुमार।।

पिछले साल काफी गहमागहमी के माहौल में शुरू हुआ न्यूज़ चैनल टीवी-9 भारतवर्ष में उठापटक मच गई है. चैनल की दो ट्रेनी महिला पत्रकारों ने वरिष्‍ठ आउटपुट एडिटर अजय आज़ाद के खिलाफ यौन शोषण की शिकायत दर्ज की है.

अजय चैनल में बतौर आउटपुट हेड पिछले कुछ समय से काम कर रहे थे. अपने खिलाफ शिकायत दर्ज होने के बाद उन्होंने अपना इस्तीफा दे दिया है जिसे टीवी-9 भारतवर्ष ने मंजूर कर लिया है.

घटनाक्रम

टीवी-9 भारतवर्षसे जुड़ी दो ट्रेनी महिला पत्रकारों ने चैनल प्रबंधन को लिखित शिकायत में बताया था कि अजय आज़ाद लम्बे समय से व्हाट्सएप के जरिए उनको अश्लील मैसेज भेज रहे थे. पहली शिकायत 18 जनवरी और दूसरी 20 जनवरी को की गई. शिकायत के मुताबिक अजय दोनों पत्रकारों को करियर में मदद करने का लालच देते हुए उनसे सेक्सुअल फेवर की मांग कर रहे थे. लड़कियों का दावा है कि उनके द्वारा अजय की हरकतों को नजरअंदाज करने और नाराजगी जताने के बावजूद उनके व्यवहार में कोई बदलाव नहीं आया. न्यूज़लॉन्ड्री के पास दोनों पत्रकारों की शिकायत की प्रति मौजूद है.

सोशल मीडिया में सामने आए कुछ व्हाट्सएप संदेशों से पता चला है कि आज़ाद ना सिर्फ लड़कियों को मैसेज करते थे बल्कि बाद में उन्हें डिलीट करने के लिए भी कहते थे. नेहा (पीड़िता का बदला नाम) को अजय ने बीते साल सितंबर से दिसंबर के बीच अनगिनत मैसेज भेजे. जब उसने सीधे नाराजगी जताई तो अजय ने एक दूसरी लड़की रानी (बदला नाम) को इसी तरह के संदेश भेजना शुरू कर दिया. अजय ने इनको रात में एक, दो या फिर तीन बजे तक संदेश भेजते थे.

रानी और नेहा दोनों टीवी-9 भारतवर्ष में ट्रेनी हैं और दोस्त हैं. एक पीड़िता ने बताया कि, “हम दोनों आपस में अजय के भेजे मैसेज साझा न कर सकें इससे बचने के लिए उन्होंने दोनों को डे और नाइट शिफ्ट में अलग-अलग रखा था.”नेहा से बातचीत की. वो बताती हैं, ‘‘18 जनवरी की रात मैंने शिकायत की. उस दिन रविवार था. बाद में 20 को मेरी सहकर्मी रानी ने भी शिकायत दर्ज कराई. उस दिन मुझे संस्थान की तरफ से कोई जवाब नहीं आया. इसके बाद मैंने प्रबंधक को मैसेज भी किया. अगले दिन जब मैं ऑफिस पहुंची तो जो चैट्स वगैरह थे, उन्होंने पढ़ा. उसके बाद जांच शुरू हुई.’’

नेहा आगे बताती हैं, ‘‘अजय ने पिछले साल सितंबर में मैसेज करना शुरू किया था. मैं उनको समझाती रही कि आप मेरे पिता के उम्र के हैं. मैं आपकी बेटी जैसी हूं. मैं उनके काम का सम्मान भी करती थी. वे आउटपुट हेड थे और मैं सबसे जूनियर थी. लेकिन वे कुछ और चाहते थे. उनके मैसेज के जवाब में जब मैं ‘सर’ कहती तो वो मुझे ‘सर’ कहने से मना करते थे और कहते थे कि ‘ओके’ लिखा करो, ‘सर’ मत बोला करो. शुरुआत में समान्य मैसेज आते रहे लेकिन थोड़े दिनों बाद वे हद पार कर गए.’’

नेहा बताती हैं, ‘‘कुछ लोग कह रहे हैं कि पहले क्यों नहीं शिकायत दर्ज कराई. हमलोग यहां बहुत जूनियर है. हम देख रहे थे कि सब कुछ उनके हाथ में है. जॉब से निकालना और जॉब पर रखना. इस डर से हम पहले शिकायत करने से झिझकते रहे. ग्रुप एडिटर बीवी राव सर आए तब हमने शिकायत करने का फैसला लिया. राव सर से बात करने के बाद लगा कि अभी अगर मैं शिकायत करती हूं तो उस पर कोई ना कोई एक्शन लिया जाएगा.’’

दूसरी शिकायतकर्ता रानी की भी यह पहली नौकरी है. टीवी 9 भारतवर्ष के शुरू होने के साथ इंटर्न के रूप में जुड़ी रानी अब वहां ट्रेनी पत्रकार है. न्यूज़लॉन्ड्री से बात करते हुए वह कहती है, ‘‘दिसंबर में जब मैं नाईट शिफ्ट में गई तो उन्होंने पहले तो काम के लिए मैसेज करना शुरू किया फिर अश्लील मैसेज करने लगे. मैं उनको उनकी बात को टालने की कोशिश करती थी. उसको लेकर वे कहते थे कि मेरी बातों को टालो मत, जवाब दो. मैं सोचती थी कि नजरअंदाज करूंगी तो धीरे-धीरे शायद वो मैसेज करना बंद कर दें लेकिन दिन-ब-दिन उनके मैसेज में अश्लीलता बढ़ती जा रही थी. मैं परेशान हो गई थी. फिर मैंने सोचा कि शिकायत कर देना चाहिए. फिर मैंने शिकायत किया.’’

रानी आगे कहती हैं, ‘‘पहले सबकुछ सही था. तीन-चार महीने तक यहां कोई इस तरह का व्यवहार नहीं करता था. चैनल शुरू होने के तीन-चार महीने बाद अजय आज़ाद वगैर आए उसके बाद भी एक महीने तक सब कुछ ठीक रहा लेकिन दिसंबर से उनके संदेश आने शुरू हो गए.’’

इस संदर्भ में हमने टीवी-9 भारतवर्ष के सीईओ बरुण दास से स्पष्टीकरण के लिए एक विस्तृत सवालों की सूची भेजी. इसका जवाब उनके प्रवक्ता संतोष नायर ने दिया है. उनके अनुसार टीवी-9 अपने यहां यौन शोषण को लेकर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाता है. शिकायत आने के बाद इस मामले को यौन अपराध (रोकथाम, प्रतिबंध और निवारण) अधिनियम, 2013 के अनुसार तुरंत आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) को भेज दिया गया था. शिकायतों और गवाहों को सुनने के बाद, मैनेजमेंट ने संपादक (अजय आज़ाद) को नोटिस भेजा. इसके बाद आईसीसी ने अपनी जांच शुरू कर दी. प्रबंधन ने जांच पूरी होने तक अजय को छुट्टी पर जाने के लिए कहा.

साथ ही नायर कहते हैं कि उनका संस्थान दोनों पीड़ित महिला पत्रकारों और सभी महिला कर्मचारियों को सुरक्षित, संवेदनशील और बराबरी का अवसर देने के लिए प्रतिबद्ध है.

बयान : टीवी9 भारतवर्ष की दो पत्रकारों ने एक वरिष्‍ठ संपादक के खिलाफ यौन शोषण की अलग-अलग शिकायत की है. कार्यस्‍थल पर महिलाओं के यौन अपराध (रोकथाम, प्रतिबंध और निवारण) अधिनियम, 2013 के अनुसार, मामले को तुरंत ICC को भेजा गया.

ताजा जानकारी है कि इस कार्रवाई के बाद अजय आज़ाद ने अपना इस्तीफ़ा सौंप दिया है. टीवी-9 प्रबन्धन ने इसे तुरन्त मंज़ूर कर लिया.

जब अजय आज़ाद से उन पर लगे आरोपों के बारे में उनका पक्ष जानना चाहा. उन्होंने कहा, ‘‘मैं पहले अपने संस्थान को जवाब दूंगा उसके बाद आपसे बात करूंगा. मैंने वहां से इस्तीफा दे दिया है.’’

कानूनी स्थिति

जांच शुरू होने के बाद संस्थान ने अजय आज़ाद को 23 जनवरी से छुट्टी पर भेज दिया. इसके बाद अजय ने संस्थान से इस्तीफा दे दिया जिसे संस्थान से तत्काल मंज़ूर भी कर लिया.

अगर जांच चल रही है तो क्या उस दौरान संस्थान को इस्तीफा मंज़ूर करना चाहिए था या फिर जांच पूरी होने का इंतजार करना चाहिए थे? अगर इस जांच में अजय दोषी पाए जाते हैं तो उनके ऊपर संस्थान क्या कार्रवाई कर पाएगा? सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ट वकील वृंदा ग्रोवर कहती हैं, ‘‘संस्थान को इस्तीफा मंज़ूर नहीं करना चाहिए था. फिलहाल संस्थान को ये करना चाहिए कि उनका सारा बकाया रोक देना चाहिए. क्योंकि इस्तीफे के बाद आरोपी आपके हाथ से निकल जाएगा और अगर वो दोषी पाया जाता है तो भी आप उसे सजा नहीं दे पाएंगे. हालांकि उस पर जांच चलेगी और जांच के नतीजे के बाद लड़की के ऊपर निर्भर करता है कि वो सज़ा के लिए अदालत में जाए.’’

सुप्रीम कोर्ट की वकील कमलेश जैन बताती हैं, ‘‘अगर जांच के बीच कोई शख्स इस्तीफा दे देता है और जांच में वह दोषी पाया जाता है तो संस्थान मामले को पुलिस को सौंप सकता है. शिकायत करने वाली लड़की चाहे तो मामले को कोर्ट में ले जा सकती है.’’

(न्यूज़ लॉन्ड्री से साभार)

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

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