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भाजपा के प्रचारकों का जवाब नहीं..

By   /  January 25, 2020  /  No Comments

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-संजय कुमार सिंह।।

अभी भी पूछ रहे हैं – सीएए में गलत क्या है। आज के अखबारों में खबर है कि भाजपा के नए बने अध्यक्ष जेपी नड्डा ने गुरूवार को कहा, “…. इन दलों के लिए वोट पहले और देश बाद में आता है।” इसमें रिपोर्टर्स ने अपनी तरफ से जोड़ दिया है या संपादकों ने नहीं हटाया है, नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ प्रदर्शनों का समर्थन कर रहे राजनीतिक दलों पर निशाना साधते हुए भाजपा अध्यक्ष ने कहा ….। दुनिया जानती है कि सीएए की कोई जरूरत नहीं है, यह भारत के नागरिकों के लिए नहीं है, इसकी किसी ने मांग नहीं की फिर भी आरोप कि इस कानून का विरोध करने वाले दलों के लिए वोट पहले और देश बाद में आता है जबकि यह जीवन भर (या कम से कम 50 साल जैसा अमित शाह ने कहा है) राज करने का उपाय है। जय हो।

ऐसे चुनाव जीत कर और देश को ऐसे गड्ढे में पहुंचाकर आपको नीन्द कैसे आएगी। आप अपने बच्चों के लिए क्या छोड़ जाएंगे? खबर आगे कहती है, उन्होंने कहा कि सीएए का विरोध करने वालों को बताना चाहिए कि इस कानून में गलत क्या है। इस कानून की गलती हर नागरिक को अपने बच्चों को बताना चाहिए। भाजपा नेताओं को भी। मुझे नहीं लगता कि अभी तक नहीं बताया गया है। और परीक्षा पे चर्चा करने वाले बच्चों ने नहीं समझा होगा। वैसे भी राजनीति अपनी जगह, बच्चों को तो सही और ईमानदार जानकारी दी जानी चाहिए। अगर आपके बच्चे आपसे पूछें और आप यही कहें कि यह कानून मुसलमानों के लिए नहीं है क्योंकि आपके हिसाब से मुसलिम बहुल देशों में मुसलमानों को धार्मिक तौर पर सताया नहीं जाता है।

तो क्या आपको लगता है कि आपके बच्चे नहीं देखते होंगे और अखबारों में नहीं पढ़ते होंगे कि भारत में दलितों पिछड़ों को कैसे वर्षों से सताया जाता रहा है और इसीलिए आरक्षण लागू हुआ था। जब भारत में ऐसा हो सकता है तो दूसरे देशों में क्यों नहीं हो सकता है। और नहीं होता तो भी आपको कानून में एक धर्म विशेष का नाम छोड़ने की क्यों पड़ी है जब देश का संविधान इसकी इजाजात नहीं देता है। मुझे लगता है भाजपा नेताओं को अपने घर में अपने बच्चों से ही बहस करनी चाहिए और कम से कम उन्हें सही बताना चाहिए। अगर ऐसा हो जाए तो वे सार्वजनिक रूप से झूठ नहीं बोलेंगे। राजनीति कीजिए अपने बच्चों की नजर में मत गिरिये।

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं. हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो. आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें - मॉडरेटर

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