Loading...
You are here:  Home  >  बहस  >  Current Article

उपभोक्ता हितों से बेपरवाह, विमानसेवा कंपनियों की कमाई कराते नियम..

By   /  January 29, 2020  /  No Comments

    Print       Email
इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..

-संजय कुमार सिंह।।
वैसे तो इस नियम की जानकारी पहले से थी पर इतना अटल है इसकी जानकारी अभी हुई। हम चार लोगों ने दिल्ली से इलाहाबाद जाने आने के टिकट लिए। दो सीनियर सिटिजन के और दो इस सीमा से कुछ नीचे की उम्र के लोगों के थे। वहां पहुंच कर लगा कि हम मंगलवार की बजाय सोमवार की भी फ्लाइट ले सकते हैं। आम तौर पर ऐसे मामलों में यात्रियों का एक दिन तो खराब होता ही है (जो देश का नुकसान है) ठहरने का खर्च भी शामिल है। अगर आप अपनी जरूरत के अनुसार यात्रा नहीं कर सकते हैं तो अपने काम नहीं कर सकेंगे और काम से ज्यादा समय दूसरे शहर में लगाएं तो वह समय बेकार जाता है, अनुत्पादक होता है। इसलिए हर किसी को उसकी जरूरत के अनुसार आने जाने की सुविधा मिलनी चाहिए पर 24 घंटे में एक ट्रेन या सप्ताह में तीन दिन चलने वाली ट्रेन से संतुष्ट लोगों के लिए यह सब खास मतलब का नहीं है। इसलिए मैं सिर्फ उपभोक्ता हित की बात कर रहा हूं।
हमलोगों ने विमान सेवा कंपनी से अपने यात्रा टिकट को प्रीपोन करने के लिए कहा तो मना कर दिया गया। असल में मना नहीं किया गया बताया गया कि उस टिकट को रद्द करवाकर दूसरा टिकट लेना होगा। रद्द करने पर 3000 रुपए से ऊपर के टिकट के सिर्फ 300 रुपए मिल रहे थे गनीमत यही था कि दूसरा टिकट 3000 का ही मिल रहा था। जाहिर है, इसीलिए कि सीटें पर्याप्त संख्या में उपलब्ध थीं। पर प्रीपोन नहीं किया गया। गौरतलब है कि प्रीपोन करना रद्द करना नहीं है कि 2700 रुपए काट लिए जाएं। इसी तरह, पोस्टपोन करना भी रद्द करना नहीं है। नियम यह होना चाहिए कि सीटें उपलब्ध हों तो निशुल्क कर दिया जाएगा पर प्रीपोन के लिए लूटना पूरी तरह अंधेरगर्दी है और उपभोक्ता हितों को पूरी तरह नजरअंदाज करना है। कहने की जरूरत नहीं है कि विमान सेवा कंपनी ने प्रीपोन करने से तो मना कर ही दिया, पोस्टपोन भी नहीं किया। ना एक टिकट ना चारो टिकट। यह सरासर मनमानी है। कैंसल करने की फीस इतनी नहीं होनी चाहिए और पोस्टपोन या प्रीपोन का विकल्प नहीं होना भी मनमानी है। यह सुविधा यात्रियों का मिलनी ही चाहिए।
महीनों पहले बनाए गए यात्रा प्रोग्राम में ऐसे बदलाव सामान्य हैं पर यात्रा की तारीख नहीं बदलना सेवा मुहैया कराने वाले को इस मद में कमाने का मौका देना है। इस पर सरकार को ध्यान देना चाहिए और यह सब सरकार के संरक्षण और समर्थन में ही हो रहा है। ऐसा नहीं है कि यह निजी विमान सेवा कंपनियों के लिए ही है। भारतीय रेल में भी यही हाल है और रेलवे से तो इसकी मांग भी नहीं की गई। रेलवे अपनी नालायकी से भले आपको लेट पहुंचाए पर आप पैसे देकर भी अपनी यात्रा आगे-पीछे नहीं कर सकते हैं। विमान टिकटों में पांच-छह सौ अतिरिक्त देने पर पूरा पैसा वापस मिलने का “बीमा” होता है और यह भी कमाने का तरीका ही है। इस “बीमा शुल्क” का दूना देकर भी आप अपनी जरूरत के अनुसार खास सेवा नहीं प्राप्त कर सकते हैं। भले ही विमान में खास सीट अतिरिक्त पैसे देकर खरीदी जा सकती है। ऐसा नहीं है कि टिकट प्री पोन या पोस्ट पोन करने की सुविधा कोई मुफ्त में मांग रहा है। पर वाजिब शुल्क लेकर भी यह सुविधा न होना उपभोक्ता हितों से आंख मूंदना ही है।

Facebook Comments

इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..
    Print       Email
  • Published: 4 weeks ago on January 29, 2020
  • By:
  • Last Modified: January 29, 2020 @ 12:36 pm
  • Filed Under: बहस

About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं. हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो. आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें - मॉडरेटर

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

You might also like...

न्यू इंडिया में मंदी: स्किल इंडिया का पोस्टमॉर्टम..

Read More →
Page Reader Press Enter to Read Page Content Out Loud Press Enter to Pause or Restart Reading Page Content Out Loud Press Enter to Stop Reading Page Content Out Loud Screen Reader Support
WhatsApp chat
%d bloggers like this: