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हर हर मोदी, भर भर झूठ..

By   /  January 30, 2020  /  No Comments

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-संजय कुमार सिंह।

दिल्ली में स्कूल बिल्डिंग की खस्ता हालत बताने वाले भाजपा के सात सांसदों के वीडियो की पोल बहुत जल्दी खुल गई। वैसे तो दिल्ली सरकार ने कहा है और लोगों ने माना है कि स्कूलों में काफी सुधार हुए हैं तो मुकाबले में भाजपा को बताना चाहिए था कि उसने भी एमसीडी के स्कूलों की दशा सुधार दी है। काम करने का मतलब यह नहीं होता है कि पूरा हो गया, कोई कमी नहीं है और इससे बेहतर हो ही नहीं सकता है। इसलिए, अरविन्द केजरीवाल ने चुनौती दी थी कि एमसीडी के स्कूलों में क्या काम हुआ उसे बताएं। कोई एक स्कूल ही बता दें। पर भाजपा के सांसदों ने कमियां गिनाना ही तय किया। भाजपा ने दिल्ली के स्कूलों में कोई काम नहीं किया है तो देश भर के कई राज्यों में उसकी सरकारें है। वह वहां अपने काम दिखा सकती थी। स्कूल नहीं तो सफाई और स्वच्छता अभियान या शौंचालय भी दिखाए जा सकते थे। और तो और 200 स्मार्ट शहरों में से एक भी दिखाया जा सकता था। दूसरे राज्यों में प्रचार के समय जैसे डबल इंजन सरकार की ताकत को बेचा गया है वैसे ही दिल्ली में डबल इंजन सरकार के फायदे बताए जा सकते थे। पर भाजपा ने ऐसा कुछ नहीं किया। लोगों को उम्मीद है कि शाहीनबाग से काम चल जाएगा पर ऐसा भी होता तो फर्जी वीडियो की जरूरत नहीं थी। विज्ञापनों में भी कोई दावा कायदे का नहीं है। बहुत ही बुरा हाल लग रहा है। एक वीडियो के बारे में अल्ट न्यूज का कहना है कि स्कूल दूसरी जगह स्थानांतरित हो गया है। उसका वीडियो जारी कर लोगों को बेवकूफ बनाया जा रहा है।

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  • Published: 4 weeks ago on January 30, 2020
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  • Last Modified: January 30, 2020 @ 12:22 pm
  • Filed Under: राजनीति

About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

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