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यूट्यूबर गुंजा कपूर बुर्का पहन स्टिंग करने पहुँची शाहीन बाग़..

By   /  February 5, 2020  /  No Comments

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बुर्का (Burqa) पहन कर आईं गुंजा कपूर (Gunja Kapoor) शाहीन बाग में प्रदर्शन (Shaheen Bagh Protest) के दौरान वहां की कुछ महिलाओं से बातचीत कर रही थीं. इस दौरान महिलाओं को उन पर शक हुआ जिसके बाद पुलिस (Delhi Police) को बुलाकर उन्हें वहां से बाहर किया गया. पुलिस ने गुंजा को हिरासत में लेकर पूछताछ करने के बाद छोड़ दिया

नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ दिल्ली (Delhi) के शाहीन बाग (Shaheen Bagh Protest) में महिलाओं के जारी प्रोटेस्ट का आज यानी बुधवार को 53वां दिन है. बुधवार को ही यहां एक युवती बुर्का (Burqa) पहन कर घुस आई जिसका प्रदर्शनकारियों ने कड़ा विरोध किया. न्यूज़ एजेंसी एएनआई के अनुसार महिलाओं ने उसे पकड़ लिया और दिल्ली पुलिस (Delhi Police) को इसकी सूचना दी. पुलिस इसके बाद वहां आई और युवती को पकड़ कर थाने ले आई. पुलिस ने बताया कि बुर्का पहन कर शाहीन बाग प्रोटेस्ट में घुसने वाली युवती का नाम राजनीतिक विश्लेषक गुंजा कपूर (Gunja Kapoor) है.

पुलिस के अनुसार, गुंजा बुर्का पहन कर शाहीन बाग (Shaheen Bagh) पहुंची थी. गुंजा की वहां मौजूदगी पर प्रदर्शनकारियों ने आपत्ति जताई थी. इसके बाद राजनीतिक विश्लेषक गुंजा कपूर को पुलिस ने वहां से बाहर निकाला. प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि गुंजा बुर्का पहने हुई थीं और उनकी रिकॉर्डिंग कर रहीं थी.

दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लेकर की पूछताछ

मिली जानकारी के मुताबिक बुर्का पहन कर आईं गुंजा शाहीन बाग में प्रदर्शन के दौरान वहां की कुछ महिलाओं से बातचीत कर रही थीं. इस दौरान महिलाओं को उन पर शक हुआ जिसके बाद पुलिस को बुलवा लिया गया और उन्हें वहां से बाहर कर दिया गया. पुलिस ने गुंजा को हिरासत में लेकर पूछताछ करने के बाद छोड़ दिया.

गुंजा कपूर चलाती हैं यूट्यूब चैनल
पुलिस का कहना है कि वो एक यूट्यूब चैनल चलाती हैं और वो शाहीन बाग में महिलाओं से बातचीत करने आईं थी. इस पर गुंजा का कहना है कि उन्होंने बुर्का इसलिए पहना था क्योंकि वो कंफर्टेबल (सहज) होकर उनके बीच में जाकर बातचीत कर सकें.

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

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