/सरकारी वकील ने लड़की से गाड़ी छुड़ाने के बदले मांगी अस्मत, पुलिस के हत्थे चढ़ा

सरकारी वकील ने लड़की से गाड़ी छुड़ाने के बदले मांगी अस्मत, पुलिस के हत्थे चढ़ा

राजस्थान के उदयपुर जिले के एक सरकारी वकील ने एक युवती से उसके नाम रजिस्टर्ड कार कोर्ट से छुडवाने के लिए अस्मत मांग ली. इस पर युवती शिकायत लेकर भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो पहुँच गई और ऐसा जाल रचाया कि अस्मत मांगने वाले सरकारी वकील अभिमन्यु सिंह को जेल की हवा खानी पड़ी.

जानकारी के अनुसार पीड़ित युवती का अपने पति से तलाक का मुक़दमा चल रहा था. युवती के आये दिन कोर्ट आने से एसीजेएम -2 में एपीपी (प्रथम) के पद पर नियुक्त अभिमन्यु सिंह युवती को पहचानता था और उससे संबंध बनाना चाहता था. तभी युवती के पति ने युवती के नाम से रजिस्टर्ड कार किसी को बेच दी.  इस पर युवती ने पुलिस थाना अम्बामाता में एफ आई आर दर्ज़ करवा दी और कार जब्त हो गयी.  इसी कार को छुड़वाने जब उपरोक्त युवती न्यायालय पहुंची.

उधर कार खरीदने वाला भी कार छुड़वाने कोर्ट  पहुँच गया तो अभिमन्यु सिंह ने मौके का फायदा उठाते हुए युवती के आगे प्रस्ताव रखा कि यदि एक रात वह उसके साथ गुजार ले तो वह कार उस युवती के पक्ष में छुडवा देगा.  इस पर युवती ने भ्रष्टाचार निरोधक  ब्यूरो पहुँच अपनी व्यथा सुनाई. ब्यूरो के अधिकारियों ने टेलीफोन पर युवती की बात अभिमन्यु सिंह से करवा कर शिकायत की पुष्टि कर ली. इसके बाद अभिमन्यु सिंह के खिलाफ जाल बिछाया और युवती को उसकी स्कूटी से सुखाडिया सर्किल भेज दिया जहाँ अभिमन्यु सिंह पहले से ही मौजूद था.

युवती उसे लेकर अपने घर चली गयी. ब्यूरो अधिकारीयों ने युवती को शयनकक्ष का दरवाजा अंदर से बंद करने से मना कर दिया था ताकि छापा मारते वक़्त दरवाजा न खटखटाना पड़े. थोड़ी देर बाद भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के अधिकारी धड़धड़ाते हुए युवती के शयन कक्ष में घुस गए जहाँ अभिमन्यु सिंह युवती के साथ आपत्तिजनक स्थिति में पाया गया.  मूलत: बलिया निवासी अभिमन्यु सिंह को ब्यूरो के अधिकारियों ने गिरफ्तार कर मामला दर्ज़ कर लिया और जेल भेज दिया. एसीबी ने एपीपी के घर से नकद राशि के साथ यौन उत्तेजक दवाइयां भी बरामद की है.

याद रहे कि इससे पहले  वल्लभ नगर में एक सरकारी चिकित्सक सुबीर मिश्रा भी एक एएनएम से रिश्वत में अस्मत मांगने को लेकर 2008 में पकड़ा गया था.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.