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मुफ्त! तुम हकदार नहीं हो..

By   /  February 14, 2020  /  No Comments

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-नारायण बारेठ।।


वो एक मुट्ठी चावल चोरी करते हुए पकड़ा गया /फटा लिबास ,जिस्म में बदबू और चेहरे पर निर्धनता का बसेरा। भीड़ ने मधु को पीट पीट कर मार डाला।घटना केरल में पालक्काड़ की है। मधु आदिवासी समुदाय से था। जंगल में रहता था। भूख लगी तो कस्बे में परचूनी की दुकान से चावल चोरी करते हुए पकड़ा गया।भीड़ ने सेल्फी ली और तब तक पीटा जब तक वो बेदम नहीं हो गया।

पता लगने पर माँ माली दौड़ती हुई मौके पर पहुंची।कहने लगी ‘ एक मुट्ठी चावल के लिए मेरे बेटे को मार डाला गया। इससे तो अच्छा तो वो जंगल में ही रहता। बेशक भूखा रहता। मगर ऐसे जान तो नहीं जाती ‘ / भीड़ को यह गवारा नहीं हुआ। कोई मुफ्त में चावल क्यों ले ? दूसरी घटना दिल्ली की है। कुछ अर्सा पहले दक्षिण दिल्ली की गोविंदपुरी में 14 साल के सूरज का बालमन नारियल के लिए ललचा गया। एक ऑटोरिक्शा पर लदे नारियल के ढेर में से सूरज ने एक नारियल चुरा लिया।

Photo- Courtesy Youth ki Awaaz

ऑटोरिक्शा वाले ने सूरज को पीट पीट कर मार डाला।मुफ्त में नारियल उठा रहा था ,मारा गया।यह संस्कार है। जब भी कुछ नई शुरुवात करते है ,नारियल फोड़ा जाता है।इस मामले में नारियल ने एक जिंदगी शुरू होने से पहले ही खत्म कर दी। चावल और नारियल दोनों शुभ कार्यो में प्रयुक्त होते है।चावल में हम दूसरे और नारियल में तीसरे बड़े उत्पादक है। लेकिन किसी का सूरज एक नारियल के लिए अस्त हो गया।कोई मधु एक मुट्ठी चावल के लिए मौत का शिकार हो गया।
किसी को मुफ्त में कुछ हासिल करते देख भुजाये फड़कने लगती है ,सिराओ में खून तेजी से प्रवाहित होने लगता है। जस्टिस अम पी शाह ने उड़ीसा में खनन घोटाले की जाँच की। शाह कमीशन की रिपोर्ट के मुताबिक ,59 हजार करोड़ का घोटाला हुआ है।आयोग ने कहा ये लूट की दौलत माइनिंग करने वालो से वसूली जानी चाहिए। यह रकम बेहद पिछड़े क्योंझर और सुंदरगढ़ जिलों के विकास पर खर्च होनी चाहिए। रिपोर्ट संसद में पेश हुई।फिर क्या हुआ ,किसी को नहीं पता।कुछ बड़े घराने प्राकृतिक सम्पदा से मालामाल हो गए।मुफ्त में हुआ। पर कोई नहीं बोला।

                                    कर्नाटक में लोकायुक्त जस्टिस संतोष हेगड़े ने माइनिंग लूट पर बहुत काम किया। फिर कहा ' 16 हजार करोड़ की लूट हुई है। इसमें कुछ मंत्रियों और एक दो मुख्य मंत्रियो का नाम आया।25 हजार पृष्ठो की रिपोर्ट में 787 अफसरों का भी नाम था। सब माल मुफ्त में गया।किसी ने तेवर नहीं दिखाए।बड़े लोग थे ,बड़े नाम थे। चंदन  मुफ्त में घिस गए।गोवा में जस्टिस शाह की रिपोर्ट थी वहां 35 हजार करोड़ की लूट हुई है।तेल और प्राकृतिक गैस आयोग सरकारी उपक्रम है।किसी बड़े आदमी की कम्पनी थी। आयोग के कृष्णा गैस क्षेत्र से 30 हजार करोड़ की गैस निकाल ले गए। सब मुफ्त में हुआ।आयोग ने सरकार से गुहार की। सुनवाई नहीं हुई। आयोग अदालत में गया। लेकिन रफ्ता रफ्ता बड़े आदमी की  कम्पनी जीत गई।न किसी को गुस्सा आया न किसी ने इस मुफ्तखोरी पर तंज कसा।                       

किसानो की कर्ज माफ़ी की बात आई तो स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया की प्रमुख अरुंधति ने कहा ‘ये गलत परम्परा हो जाएगी। सरकार ने टैक्स में कॉर्पोरेट बड़ी छूट दी तो सबने स्वागत किया।वर्ष 2014 से 2017 दो लाख 41 हजार करोड़ के ऋण बट्टे खाते में डाल दिए गए।यह राष्ट्रीकृत बैंको की रकम थी।
सांसद जम्हूरियत की जान होते है।वो चुस्त दुरुस्त रहे ,आवाज उठाते रहे और जनता की तर्जुमानी करते रहे। इसलिए हर माह एक सांसद पर 2. 7 लाख प्रतिमाह खर्च किया जाता है।उस दिन संसद में बाद और सूखे पर चर्चा होनी थी। 25 जुलाई ,2018 का दिन था। लेकिन चर्चा के लिए सिर्फ 61 सदस्य सदन में थे। इसके पहले भूमि अधिग्रहण पर तीस सदस्यों की संयुक्त संसदीय पार्टी की बैठक होनी थी।तीस में से सिर्फ छह सदस्य ही वक्त निकाल पाए। वो बहुत गुस्से में था। कुछ दिन पहले कोई कह रहा था मनरेगा योजना मुफ्तखोर पैदा करती है।
दुनिया गोल है। अमेरिकन विचारक अच् अल मेंकन दशकों पहले कह गए है ‘ हर चुनाव एक तरह से चोरी के माल की अग्रिम नीलामी भर होता है -Every election is a sort of advance auction sale of stolen goods.

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

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