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अमुल्या की बेवकूफी को क्या देशद्रोह कह दिया जाए..

By   /  February 22, 2020  /  No Comments

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-पंकज चतुर्वेदी।।

क्या हमारा देश इतना कमजोर है कि एक भाषण या नारे से उस पर खतरा मंडराने लगता है ? एक उन्नीस साल की लड़की से देश को खतरा हो गया और अब राज्य के मुख्यमंत्री ने घोषणा कर दी कि अमुल्या लोना नरोन्हा के ताल्लुक नक्सलियों से हैं . अमुल्या पर अभी तक तीन ऍफ़ आई आर हो चुकी हैं जिसमें देश द्रोह की धारा 124 ए, 295 ए,153ए, 448 आदि शामिल हैं . कल अदालत में पेश करते समय जब पत्रकारों ने उससे बात की तो कुछ बातें सामने आयीं —

1. अमुल्या सी ए ए , एन आर सी विरोध कि चर्चित आवाज़ है और उसे भाषण के लिए आमन्त्रण की बड़ी मांग रही है .


2. हिन्दू-मुस्लिम-सिख- ईसाई फेडरेशन की उस सभा में , जिसमें ओवेसी भाषण दे रहे थे , अमुल्या को भी पहले वक्ता के रूप में बुलाया गया था, लेकिन ऐनवक्त उसका नाम हटा दिया .( अर्थ वह सभा ओवेसी की नहीं थी और उसमें सभी धर्म के लोग शामिल थे )

3. अमुल्या को इस बात से नफरत थी कि कतिपय लोग सी ए ए , एन आर सी विरोध करने वालों को पाकिस्तान समर्थक कहते हैं और वह यह बताना चाह रही थी कि सामने खड़ी भीड़ पाकिस्तान ज़िन्दाबाद के नारे नहीं दोहराती, वह केवल हिन्दुस्तान जिंदाबाद के नारे पर ही साथ देती हैं , वीडियों सामने हैं (हालाँकि कुछ हिंदी के लम्पट टीवी वालों ने उसे दिखाया नहीं , जिसमें वह पाकिस्तान के बाद हिंदुस्तान जिंदाबाद का नारा दो बार भीड़ से लगवाती है ). उससे पहले ही पुरुष पुलिस वाले और अन्य पुरुषों ने गैर क़ानूनी तरीके से उसके हाथ पकडे, शारीर को छुआ और धक्के दिए — पूरी बात नहीं रखने दी.


अब अमुल्या के परिवार की बारे में जान लें . पश्चिमी घात के जंगलों को दक्षिण भारत का प्राण कहा जाता हैं , जब इस पर लकड़ी माफिया ने हमला किया तो अमुल्या के पिता ओसवाल्ड नर्होंहा , जो कि “बाजी” के नाम से मशहूर हैं, ने “चिपको” आन्दोलन की तर्ज़ पर “अप्पिको” आन्दोलन शुरू किया, हज़ारों ग्रामीण उससे जुड़े और सरकार ने भी सख्ती की, कहते हैं कि बाद में इस आन्दोलन से नक्सली भी जुड़ गए और बाजी उससे अलग हो गए, अमुल्या बचपन से ही गौरी लंकेश, दाभोलकर जैसे लोगों के विचारो से प्रभावित थी और निजी टूर पर उनसे मिलना -जुलना भी था.
अब वे चिकमंगलूर जिले के कोप्पा तालुके के गुब्बगाड़े में रहते हैं , याद हो कोप्पा काफी के उत्पादन के लिए मशहूर है और अभी भी प्रकृति कि छाँव में हैं . वाजी , कुमार स्वामी की पार्टी जनता दल एस के हरिहर्पुरा इलाके के अध्यक्ष है और पार्षद भी.


परसों रात बजरंग दल के लोगों ने उनके घर पर हमला किया, उनसे जबरदस्त भारत माता की जय के नारे लगाने को कहा . जान से मारने की धमकी दी, इसकी भी रिपोर्ट हुयी लेकिन अभी तक कोई गिरफ्तारी हुयी नहीं .


यह दुखद है कि जिन पर बम से धमाके के आरोप हैं वे संसद में और सेना मुख्यालय में बैठ सकते हैं, जिन पर बलात्कार के आरोप हैं उन्हें एन सी सी के कैडेट से सलामी दिलवाई जा सकती है लेकिन जो सभी देश की जय बोलता हो– उसे देश द्रोही मान कर उसके घर पर हमला किया जाता है , जान लें हम एक सधे हुए, पूर्वाग्रही समाज के रूप में बदलते जा रहे हैं – ताकत- रूतबा- पैसा, धर्म, जाती, विचारधारा देख कर हमारा प्रतिरोध का स्वर उभरता है — हकीकत यही है कि झुग्ग्गी में रहने वाले निर्भया के दरिंदों के विरोध में तो केजरीवाल भी सडक पर थे लेकिन चिन्मयानंद पर चुप रहते हैं .
मेरी इस बात से सहमति है कि अमुल्या ने बेवकूफ किस्म की हरकत की. उन्हें बिन बुलाये , बगैर भूमिका के इस तरह अपनी बात नहीं कहनी थी लेकिन आप खुद सोचें कि अमुल्या की बेवकूफी को क्या देशद्रोह कह दिया जाए ?

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

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