Loading...
You are here:  Home  >  अपराध  >  Current Article

जान और नियम ताक पर रखकर हो रहा है यूपी एमपी में अवैध बालू परिवहन ..

By   /  February 23, 2020  /  No Comments

    Print       Email
इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..

बालू ढुलाई का नशा ऐसा कि ज़िन्दगी की परवाह नहीं करते ट्रैक्टर चालक.. बाँदा, हमीरपुर से अधिक एमपी में केन नदी बनी अवैध बालू निकासी का गढ़..

-आशीष सागर दीक्षित।।


बाँदा / महोबा / छतरपुर। लाल बालू के काले खेल मे जान और नियम दोनो को ताक पर रखकर बालू चोर अवैध परिवहन को अंजाम देने मे लगे हुए है। एमपी और यूपी के थानेदारो की नाक के नीचे से परिवहन कानूनो की धज्जिया उड़ाकर यह कारनामा अंजाम दिया जा रहा है। महोबा जिले मे वैध बालू की अनुपलब्धता का फायदा माफिया बेखौफ उठा रहे है। कृषि कार्य के प्रयोग मे लाये जाने वाले टैक्टरो व ट्रक डम्फरो के सहारे मध्यप्रदेश की केन नदी की रेत वैध पट्टा संचालित होने से पहले ही लूट ली जा रही है।

हाल के दिनो में छतरपुर जनपद के अंदर रेत उत्खनन के लिए मध्यप्रदेश की एक कम्पनी ने ठेका लिया हुआ है लेकिन ठेकेदार के खनन दस्तावेज औपचारिकता व अन्य जरूरी खानापूर्ति पूरी करने से पहले ही खदानो से बालू निकालने का काम गौरिहार, चंदला, रामपुर, बलरामपुर, महुआ कछार, कंधैला, मवई, परसीपुरवा, सिलपाही आदि मे धड़ल्ले से चल रहा है। सूत्र बताते है कि खदान क्षेत्रो मे आने वाले थानो के थानेदार इंट्री लेकर अवैध बालू खनन व परिवहन की खुली छूट दिये हुए है। पूर्व सूचना के बाद भी छापे के लिए आने वाले अधिकारियो की लोकेशन देने वालों ने अवैध खननकर्ता व परिवहन कर्ताओ को मुखबिरी का ज़िम्मा लेकर जाॅच टीमों के बैरंग वापस लौटने का सिस्टम बना दिया है।
अवैध खनन परिवहन मे जुटे ज्यादातर वाहन टैक्टर व डम्फर मध्यप्रदेश व उत्तर प्रदेश मे खनिज परिवहन के लिए न तो पंजीकृत है और न ही टैक्टरो द्वारा मध्यप्रदेश से उत्तर प्रदेश मे खनिज परिवहन के लिए नियमित परिवहन कर अदा करते है।

बगैर अंतरराज्यीय परिवहन प्रपत्र के बिना ही दोनों राज्यो में बेखौफ फर्राटा भर रहे है। सीमा कर की बात रहने दीजिए। यह नंबर दो का अवैध खनन यूपी खनिज परिहार नियमावली सैतालिसवें संशोधन 2019 की अनदेखी व सुरक्षा उपायों को दरकिनार कर किया जाता है। एनओसी मुताबिक सूर्यास्त के बाद लोडिंग व खदान संचालन पर रोक है लेकिन काले धंधे की सबसे अधिक चोरी सूरज ढलने के बाद ही गांव-गांव होती है। यह बालू एमपी के रास्तो से होकर यूपी की बाँदा ( मटौन्ध, भूरागढ़ ) पुलिस चौकियां पार करते हुए महोबा मे भी खूब खपाई जा रही है। आज ही सुबह दो ऑडियो सोशल मीडिया में वायरल हुये जिसमें लोकेशन देने वाले और एक अन्य के बीच हो रही बातचीत में बालू लाने वाला रुपयों के लेनदेन में किसको कितना जाता है की बात खोल रहा है। हाल ये है कि महीने में होने वाली वसूली अब रोज होती है। जहां बाँदा में वैध पट्टेधारक अवैध मैकेनिज्म अपनाकर हैवी पोकलैंड से खनन कर रहे है, वहीं मध्यप्रदेश के छतरपुर में तो और खराब सूरत है।

शिवराज सिंह की सरकार से दो कदम आगे कांग्रेस की कमलनाथ सरकार के विधायक, पार्टी-गैर पार्टी नेतादार केन की सरहदों में बसे गांवो से मनमानी अवैध बालू ढुलाई करा रहे है। छतरपुर से नम्बर दो की बालू वाया दुरेड़ी बाँदा और महोबा भेजी जाती है जिसमें लोकेशन देने वालों और इलाकाई चौकियों की सांठगांठ चरम पर है। केन पर यूपी-एमपी में चौतरफा बलात अवैध खनन तब और बढ़ा है जब राज्यों की सरकार और केंद्र सरकार ने जल संरक्षण, जल संचय योजनाओं के मुगालते अधिक शुरू कर दिए है। पिछले दो साल से बाँदा डीएम की अगुवाई में जो हुआ उसके परिणाम स्वरूप आज केन में एनआर ओवरलोडिंग बालू का खेल, बिना रायल्टी ई रिक्शा ( अमीर लोग किराए पर बालू में चलवा रहे हैं ) की महामारी मचाये है।

सारे ईमान को रुपयों की पेटी और लाल सोने की भूख ने केन के घाट में दफन कर दिया है। बड़ी बात है इस पेशे में क्या विधायक, क्या पूर्व विधायक, क्या पत्रकार, क्या अधिकारी,क्या छुटभैये ठेकेदार और क्या नए नवेले युवा नेता सब साझीदार है। बावजूद इसके केन सबकी जीवनदायिनी आस्थावादी नदी है और उसका अस्तित्व सबको प्यारा है मगर कितना ये सरकार और समाज दोनों जानते है। खबरदारों का क्या बात उठी है तो लिखी जाएगी। नम्बर दो की बालू ढोते मध्यप्रदेश के मवई घाट से इस ट्रैक्टर चालक को देखिए कि किस तरह जान जोखिम में डालकर ट्रैक्टर के इंजन को दो पहियों के सहारे खड़ा करके घाट से ऊपर ला रहा है…बालू को बुंदेलखंड में अफीम क्यों कहते है यह उसकी नजीर बस है। गंदा हैं पर धंधा है इसलिए लगे रहिये जब तक केन में दम है…खनन बेदम है।

Facebook Comments

इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..
    Print       Email
  • Published: 1 month ago on February 23, 2020
  • By:
  • Last Modified: February 23, 2020 @ 1:13 am
  • Filed Under: अपराध

पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं. हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो. आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें - मॉडरेटर

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

You might also like...

शहीद जवान का जूता और उसके हिस्से का निवाला..

Read More →
Page Reader Press Enter to Read Page Content Out Loud Press Enter to Pause or Restart Reading Page Content Out Loud Press Enter to Stop Reading Page Content Out Loud Screen Reader Support
WhatsApp chat
%d bloggers like this: