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ऐसे व्हाट्सऐप्प फॉर्वार्ड से बचिए-बचाइए..

By   /  March 1, 2020  /  No Comments

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-संजय कुमार सिंह।।

मेरे पास एक व्हाट्सऐप्प फॉर्वार्ड आया है जिसे भेजने वाली एक महिला हैं, दिल्ली के दो अच्छे स्कूलों में बड़े बच्चों को पढ़ा चुकी हैं। एमए, पीएचडी पर अब रिटायर हैं। बच्चों की शादी हो चुकी है। बेटा विदेश में है। यह सब इसलिए कि उन्होंने जो संदेश मुझे फॉर्वार्ड किया उसे पढ़ा नहीं होगा और पढ़कर किया होगा तो आप अनुमान लगाइए कि देश में आम मध्यमवर्गीय, खाते-पीते, सफल सक्षम, परिवार के लोगों और जीवन से निश्चिंत लोगों की क्या हालत है, क्या मानसिकता है। उन्हें अपने लिए नौकरी नहीं चाहिए, अपने बच्चे दंगाई नहीं हो सकते तो बाकी दुनिया की परवाह ही नहीं है या नजरिया ही अलग है।
संदेश की खास बातें उसी भाषा शैली में, अशुद्धियों के साथ और फिर उससे सींबंधित यथार्थ आपके लिए
1. दुबईमें 70 मुसलमानों ने सीएए के विरोध में रैली निकाली। दुबई सरकार ने सब पर तीन लाख जुर्माना ठोक कर भारत डिपोर्ट कर दिया आजीवन दुबई में बैन के सर्टिफिकेट के साथ।
इस मामले में सच यह है कि (अखबारों की खबरों के अनुसार), संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के भारतीय प्रवासियों ने विवादित नागरिकता संशोधन कानून पर चिंता जताते हुए भारतीय दूतावास को एक ज्ञापन सौंपा है। इस ज्ञापन में कहा गया है कि यह ‘विभाजनकारी समाज को बढ़ावा देता है।’ भारतीय समुदाय के 30 लोगों ने रविवार को दूतावास में अधिकारियों से मिलकर सीएए के खिलाफ अपना विरोध जताया। ‘लेटर ऑफ ऑपजिशन टू सीएए’ को सौंपने के बाद अबूधाबी के निवासी अब्दुल्ला खान ने गल्फ न्यूज से बात करते हुए कहा, ‘मैं भारत में अपने परिवार के बारे में चिंतित हूं। मैंने उन्हें उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ में कॉल करने की कोशिश की, लेकिन नहीं कर सका, क्योंकि सीएए को लेकर विरोध प्रदर्शन के बाद संचार लाइनें और इंटरनेट बंद था।’ (यह दिसंबर की खबर है) खान ने कहा, ‘यहां के भारतीय समुदाय ने समाज को बांटने वाले कानून को खत्म करने के लिए विनम्र अनुरोध करने का फैसला किया है, जिससे सभी धर्मो के लोग शांतिपूर्ण तरीके से रह सकें।’ इस पत्र में भारतीय अधिकारियों से ‘भेदभावपूर्ण, विभाजनकारी और असंवैधानिक अधिनियम’ को खत्म करने का भी आग्रह किया गया है।इसमें कुछ भी गलत या असामान्य नहीं है। इसपर दुबई सरकार कोई कार्रवाई करे इसका आधार भी नहीं है लेकिन संदेश में कहा गया है –
2. गृहमंत्रालय और विदेश मंत्रालय ने सभी देशों को नोट भेज दिया है क़ी क) भारतीय पासपोर्ट केवल यात्रा का प्रमाणपत्र है ख) जो कि हवाई यात्रा, समुद्री जहाज यात्रा, इत्यादि के उपयोग का ही है और ग) यह नागरिकता कार्ड नहीं है।
आप जानते हैं कि ऐसी कोई घोषणा नहीं हुई है। अगर हो भी जाए तो आप जानते हैं कि पासपोर्ट अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उपयोग किया जाने वाला दस्तावेज है और सुलभ शौंचालय का उपयोग करने के काम नहीं आ सकता है। अगर कोई दस्तावेज पासपोर्ट जैसा है और उसपर पासपोर्ट लिखा है तो वह पासपोर्ट ही रहेगा और उसके वही मायने होंगे जो होते हैं। कोई देश अपने देश में पासपोर्ट का कोई मायने बताये या उपयोग बताये अंतरराष्ट्रीय स्तर पर या दूसरे देश में उसका वही उपयोग होगा जो होता है। नहीं होने देना भी उस देश की तौहीन है जिसका पासपोर्ट है।
3. यह एक बहुत पुराना नियम है जिसको अब उपयोग में लाया जाएगा। भारत सरकार ने घोषणा कि है कि एक वर्ष में सभी नागरिकों को नागरिकता कार्ड दे दिया जाएगा।
पुराने नियम के बारे में अब मैं क्या कहूं पर भारत सरकार की घोषणा आपने कहीं सुनी। नोटबंदी की घोषणा दुनिया भर में सुनी गई थी पासपोर्ट से संबंधित घोषणाएं देश में नहीं सुनाई दें यह संभव है? और क्या यह संभव है कि देश के 130 करोड़ लोगों को एक साल में नागरिकता कार्ड दे दिया जाए। वह भी तब जब पांच साल में सिर्फ मतदाता पहचान पत्र नहीं बन पाते हैं और जो बनते हैं उनका जो हाल है वह भी आपको पता है।
4. अब खेल शुरू होता है – अधिकांश खाड़ी देशों ने सभी वर्कर्स को तत्काल प्रभाव से नागरिकता कार्ड रखना अनिवार्य कर दिया है।
नागरिकता कार्ड एक साल में बनेगा और खाड़ी देशों ने तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया है। दोनों कैसे संभव है – लिखने वाले और फॉर्वार्ड करने वाले जानें। यह इस पोस्ट की सबसे मूर्खतापूर्ण सच्चाई है।
5. बांग्लादेशी, पाकिस्तानी, और अन्य मुस्लिम या गैर मुस्लिम जो कि खाड़ी देशों में अधिकतर कार्यरत हैं, वो 2 पासपोर्ट रखते हैं, एक भारतीय और दुसरा उनके देश का? क्यों ?
दो पासपोर्ट रखना लगभग गैरकानूनी है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पासपोर्ट नागरिकता का ही दस्तावेज है पर दूसरे देश का नागरिक भारतीय पासपोर्ट कैसे रख सकेगा? भारतीय पासपोर्ट बनवाना इतना आसान है तो उस पर ध्यान देने की जरूरत है या नागरिकता कार्ड जारी करने से समस्या का समाधान हो जाएगा।
6. क्योंकि भारतीय मजदूर को अधिक मजदूरी और मान-सम्मान खाड़ी में मिलता है। पदोन्नति में भी भारतीय को पाकिस्तानी और बांग्ला देशी के मुकाबले प्राथमिकता मिलती है। (इसमें यह नहीं लिखा है कि यह सिर्फ भारतीयों के लिए है या मुसलमानों के लिए या सभी धर्म के भारतीयों के लिए)।
खाड़ी में भारतीय मजदूर को अधिक मान सम्मान मिले यह संभव भी हो तो दूसरे देश के नागरिक कैसे भारतीय हो सकेंगे और जो भारतीय हैं उन्हें यह सम्मान पाने से रोकना क्यों?
7. बांग्लादेशी और पाकिस्तानी के गर्दन पे छुरी यह है कि भारतीय पासपोर्ट तो बनवा लिया,पर अब मोदी राज में नागरिकता कार्ड कहां से लाएंगे? वो सब पकड़े जाएंगे और खाड़ी की जेलों में सड़ेंगे और खाड़ी से बाहर फेंक दिए जाएंगे, जो की दूसरी वार कभी उस देश के अंदर नहीं जा पाएंगे, यानी
आप जानते हैं कि मेहुल चोकसी को मोदी राज में भारत सरकार से अनापत्ति प्रमाणपत्र मिला और वे एंटीगुआ के नागरिक बने। ऐसा बिल्कुल नहीं है कि पहले पासपोर्ट बन सकता था तो अब कुछ नहीं बनेगा। प्रधानमंत्री बदलने के अलावा बाबू तो वही हैं। और सब कुछ वैसे ही चल रहा है। सिर्फ मानने की बात है। आप नहीं चाहें तो न मानिए। कुल मिलाकर यह सूचना बिल्कुल बकवास है जिसका कोई आधार नहीं है। फिर भी सही हो और ऐसा हो जाए तो यह साथी नागरिकों के साथ गलत व्यवहार है और चिन्ताजनक है।
8. चार करोड़ बांग्लादेशी मुसलमान, 1.5 करोड़ अफगानी मुसलमान, 2.5 करोड़ पाकिस्तानी मुसलमान, सबकी नौकरी तत्काल प्रभाव से समाप्त हो जाएंगी और हज़ारों भारतीयों को नए और अच्छे जॉब्स मिलेंगे।
पता नहीं यह आंकड़ा कहां का और कैसा है। पर इसका कोई कारण नहीं है। अगर वे संबंधित देशों के नागरिक हैं, वहां उसी रूप में काम कर रहे हैं तो नौकरी जाने का कोई कारण नहीं है। भारतीयों को नए और अच्छे जॉब्स मिलने की सूचना – मुंगेरी लाल के हसीन सपनों से ज्यादा कुछ नहीं है।
9. क्या मास्टर स्ट्रोक है न मोदी जी का ??? सभी खाड़ी देश इस निर्णय से खुश हैं, क्योंकि अब उनके युवाओं को भी मौका मिलेगा।
इसमें मोदी जी का कोई योगदान नहीं है यह लिखने और फॉर्वार्ड करने वालों के दिवास्वप्न से ज्यादा कुछ नहीं है। मोदी जी का योगदान यही हो सकता है कि ऐसे संदेश लिखे और फॉर्वार्ड किए जा रहे हैं और वे इसे रोकने की पुख्ता व्यवस्था नहीं कर रहे हैं या कर नहीं पा रहे हैं या यह सब होने दे रहे हैं। पर वह अलग मामला है।
10. इमरान खान ने तीन देशों का इसी कारण से दौरा रद्द किया हैं, बांग्लादेश अपने नागरिकों को वापिस लेने को तैयार है, क्योंकि यह उनका अन्तिम अवसर है जिन्हें खाड़ी में जेल जाने से बचाएगी। आपसे हाथ जोड़कर विनती है पूरे भारतवर्ष में इसको फैला दो।
यह इस पोस्ट को गंभीरता देने के लिए है। आंशिक रूप से सच है, पूरी तरह सच हो भी तो इसका इन तथ्यों से कोई संबंध हो नहीं सकता।
इस पोस्ट में नीचे सबसे महत्वपूर्ण अंतिम वाक्य है लेकिन उसे क्या नंबर देना और उसकी क्या बात करना। यह पूरी पोस्ट इसीलिए है। आश्चर्य की बात है कि पूरी तरह बकवास इस पोस्ट को जिसने फॉर्वार्ड किया है वो एमए, पीएचडी हैं। इसलिए यह कहना भी गलत होगा कि अनपढ़ ही भक्ति करते हैं। भक्ति असल में एक बीमारी है और अब लगता है कि संक्रामक बीमारी है। इससे बचना जरूरी है। वरना, इस फॉर्वार्ड में एक भी तथ्य ऐसा नहीं है जिसके गलत होने की पुष्टि करनी पड़े। ये सब जानी हुई बातें हैं और पहली नजर में गलत व निराधार हैं। फिर भी फॉर्वार्ड हो रही हैं और फेसबुक पर कई लोगों ने पोस्ट और शेयर किया है।

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About the author

छपरा के संजय कुमार सिंह जमशेदपुर होते हुए एनसीआर में रहते हैं। 1987 से 2002 तक जनसत्ता में रहे और अब भिन्न भाषाओं में अनुवाद करने वाली फर्म, अनुवाद कम्युनिकेशन (www.anuvaadcommunication.com) के संस्थापक हैं। संजय की दो किताबें हैं, ‘पत्रकारिता : जो मैंने देखा जाना समझा’ और ’जीएसटी – 100 झंझट’।

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