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जब अपने मंच पर चार-पांच ईमानदार भी नहीं जमा कर पाए अन्ना, तो भ्रष्टाचार से क्या खाक लड़ेंगे?

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काले धन पर बाबा रामदेव की सिफारिशें नहीं मानेगी सरकार, अन्ना ने कहा कोई बात नहीं से आगे..

-सतीश चंद्र मिश्रा।।

कौन है बेदाग? : टीम अन्ना मंच पर

मीडिया में जिस अग्निवेश की बदनीयती और बेईमानी के बेनकाब होने के बाद उसको अन्ना हजारे ने अपने से अलग किया है उस भगवाधारी के पाखंड की करतूतों का काला चिटठा दशकों पुराना है. लेकिन इसके बावजूद वह अन्ना हजारे की टीम का अत्यंत महत्वपूर्ण सदस्य बना हुआ रहा. प्रशांत भूषण-शांति भूषण के ” सदाचार ” के किस्से दिल्ली पुलिस को CFSL से मिली CD की जांच रिपोर्ट तथा इलाहाबाद के राजस्व विभाग एवं नोएडा भूमि आबंटन के सरकारी दस्तावेजों में केवल दर्ज ही नहीं हैं बल्कि सारे देश के सामने उजागर भी हो चुके हैं. अपनी नौकरी से इस्तीफे तथा खुद पर बकाया सरकारी देनदारी के विषय में लगातर 4 दिनों तक झूठे दावे करने के पश्चात स्वयम द्वारा 4 वर्ष पूर्व विभाग को लिखी गयी एक चिट्ठी में अपने दोषी होने की बात स्वीकारने की सच्चाई एक समाचार पत्र के माध्यम से उजागर होने के पश्चात अरविन्द केजरीवाल को वह सच भी स्वीकरना पडा जो खुद केजरीवाल द्वारा लगातार बोले गए झूठ को तार-तार कर बेनकाब कर रहा था.

सबसे गंभीर प्रश्न तो यह है कि जो अन्ना हजारे महीनों तक साथ घूमने के पश्चात् अपने इर्द-गिर्द पूरी तरह पाक-साफ़ पांच ईमानदार लोगों को एकत्र नहीं कर सके वो अन्ना हजारे किस जादू की कौन सी छड़ी से पूरे देश में हजारों ईमानदार “नेताओं” की फौज खडी कर देंगे…? चुनावी मैदान में उतरे व्यक्तियों में से किसी को भी बेईमान और किसी को भी ईमानदार घोषित करने का अधिकार केवल अन्ना हजारे के पास क्यों और किस अधिकार के तहत होगा…?  चुनावी मैदान में उतरे व्यक्तियों में से किसी को भी बेईमान और किसी को भी ईमानदार घोषित करने का उनका आधार,उनका मापदंड क्या होगा…?  उनके ऐसे निर्णयों का स्त्रोत क्या और कितना विश्वसनीय होगा…? ऐसा करते समय क्या अन्ना हजारे और टीम अन्ना के सदस्य  स्वयं पर उठी उँगलियों और लगने वाले आरोपों का भी तार्किक तथ्यात्मक स्पष्टीकरण सत्यनिष्ठा के साथ देने की ईमानदारी दिखायेंगे या फिर इन दिनों की भांति केवल यह कहकर पल्ला झाडेंगे कि हमको परेशान करने के लिए ऐसे सवाल पूछे जा रहे हैं इसलिए हम इन सवालों का जवाब नहीं देंगे.

अन्ना हजारे ने 13 सितम्बर को ही टाइम्स नाऊ न्यूज़ चैनल के साथ हुई अपनी बातचीत के दौरान बाबा रामदेव से कोई सम्पर्क सम्बन्ध नहीं रखने, उनका कोई सहयोग-समर्थन नहीं करने का ऐलान भी किया, इसी के साथ लाल कृष्ण अडवाणी द्वारा भ्रष्टाचार विरोधी रथयात्रा निकाले जाने की घोषणा को मात्र एक शिगूफा कहकर अन्ना हजारे ने उसका जबर्दस्त विरोध भी किया. आखिर कौन है ये अन्ना हजारे जो कभी ग्राम प्रधान का चुनाव लड़कर जनता की अदालत का सीधा सामना करने का साहस तो नहीं जुटा सका लेकिन देश में कोई भी व्यक्ति या कोई भी दल या कोई भी संगठन किसी मुद्दे पर क्या करे.? क्या ना करे.? इसका फैसला एक तानाशाह की भांति सुनाने की जल्लादी जिद्द निरंकुश होकर कर रहा है.

लाल कृष्ण अडवाणी या किसी भी अन्य राजनेता या राजनीतिक दल द्वारा केंद्र सरकार के भ्रष्टाचार के विरोध में किये जाने वाले धरना, प्रदर्शनों, आन्दोलनों एवं आयोजनों का विरोध कर उनके खिलाफ ज़हर उगल कर अन्ना हजारे और टीम अन्ना ने केंद्र सरकार के रक्षा कवच की भूमिका में उतरने का सशक्त सन्देश-संकेत दिया है. अन्ना गुट की यह करतूत केवल और केवल इस देश की राजनीतिक प्रक्रिया-परम्परा को बंधक बनाकर उसकी मूल आत्मा को रौंदने-कुचलने का कुटिल षड्यंत्र मात्र तो है ही साथ ही साथ वर्तमान सत्ताधारियों के भ्रष्टाचार के खिलाफ उठने वाली किसी भी आवाज़ का गला घोंटने का अत्यंत घृणित षड्यंत्र भी है.

स्वयम अन्ना के नेतृत्व वाली टीम अन्ना द्वारा लोकपाल बिल की स्टैंडिंग कमिटी के सदस्य सांसदों के घर के बाहर धरना देकर उनपर निर्णायक दबाव बनाने की घोषणा भी इसी षड्यंत्र के अंतर्गत रची गयी कुटिल रणनीति का ही एक अंग है. क्योंकि इसी देश में 1.76 लाख करोड़ की 2G घोटाला लूट में प्रधानमंत्री और तत्कालीन वित्तमंत्री चिदम्बरम की संलिप्तता साक्ष्यों के साथ प्रमाणित करने वाली पीएसी की रिपोर्ट को नियमों की धज्जियाँ उड़ाकर कूड़े की टोकरी में फिंकवा चुके उसी पीएसी के सदस्य रहे कांग्रेस तथा उसके सहयोगी सत्तारूढ़ दलों के 11 संप्रग सांसदों के खिलाफ अन्ना हजारे और टीम अन्ना ने इसी तरह दबाव बनाना तो दूर उनके खिलाफ आजतक एक शब्द भी क्यों नहीं बोला…?

क्या 2G घोटाले के द्वारा की गयी 1.76 लाख करोड़ की सनसनीखेज सरकारी लूट अन्ना हजारे की “भ्रष्टाचार की परिभाषा” में नहीं आती है…? यदि ऐसा है तो अन्ना हजारे इस देश को बताएं कि 1.76 लाख करोड़ की सरकारी राशि की सनसनीखेज लूट को वो भ्रष्टाचार क्यों नहीं मानते हैं.?  और यदि मानते हैं तो उस भ्रष्टाचार का भांडा फोड़ने वाली पीएसी की रिपोर्ट की धजियाँ उड़ाने वाले सांसदों पर दबाव बनाने, उनको धिक्कारने से मुंह क्यों चुरा रहे हैं.? क्या अन्ना हजारे और टीम अन्ना के स्वघोषित दिग्गज ऐसे किसी धरने/मुहिम और उसके जिक्र से भी इसलिए मुंह चुरा रहे हैं , क्योंकि ऐसे किसी धरने/मुहिम का निशाना केवल सत्तारूढ़ कांग्रेस और उसके सहयोगी दल ही बनेंगे तथा मनमोहन सिंह और चिदम्बरम को “तिहाड़” में ए राजा, कनिमोझी, के पड़ोस में भी रहना पड़ सकता है.? जबकि मनमोहन को तो स्वयं अन्ना हजारे आज भी सीधा-सच्चा-ईमानदार मानते हैं…!

ज्ञात रहे कि 1.76 लाख करोड़ के 2G घोटाले, 70 हज़ार करोड़ के CWG घोटाले या KG बेसिन घोटाले में रिलायंस के साथ मिलकर की जाने वाली लगभग 30 हज़ार करोड़ की सनसनीखेज लूट तथा बाबा रामदेव द्वारा उठाये जा रहे 400 लाख करोड़ के कालेधन की वापसी सरीखे सर्वाधिक सवेंदनशील मुद्दों पर अन्ना हजारे और टीम अन्ना के अन्य सेनापति गांधी के तीन बंदरों की भांति अपने आँख कान मुंह बंद किये हैं, तथा अपनी चुप्पी और उपेक्षा कर इन मुद्दों पर देश का ध्यान भी केन्द्रित ना होने देने का भरपूर प्रयास कर रहे हैं. अपनी इस कुटिल रणनीति के पक्ष में अन्ना हजारे और उनकी टीम यह कह रही है कि अभी हमारा ध्यान केवल जनलोकपाल पर केन्द्रित है. अन्ना हजारे और उनकी टीम के दिग्गजों का यह कुतर्क क्या पुलिस के उस भ्रष्ट और बेशर्म सिपाही की याद नहीं दिलाता जो अपनी आँखों के सामने हो रही लूट या क़त्ल की घटना को अनदेखा कर उपेक्षा के साथ यह कहते हुए आगे बढ़ जाता है कि ये घटना मेरे थाना क्षेत्र में नहीं घटित हुई है.

अतः पाठक स्वयं निर्णय करें कि स्टैंडिंग कमिटी के सदस्य सांसदों के घर के बाहर धरना देकर सस्ती लोकप्रियता वाहवाही लूटने को आतुर खुद अन्ना हजारे तथा उनकी फौज के सेनापति भ्रष्टाचार के हमाम में देश के सामने पूरी तरह नंगे हो चुके पीएसी के उन 11 सदस्य सांसदों की करतूत के जिक्र से भी क्यों मुंह चुरा रहे है…?
यह भी पढ़ें….

काले धन पर बाबा रामदेव की सिफारिशें नहीं मानेगी सरकार,

अन्ना ने कहा कोई बात नहीं

(लेखक सतीश चंद्र मिश्र लखनऊ के जाने माने पत्रकार हैं।)

प्रशांत भूषण उवाच: कश्मीर को भारत से आज़ाद कर देना चाहिए…देखें विडियो 

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About Author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

37 Comments

  1. Shambhu Goel on

    बिहार सरकार के अति ईमानदार कृषि मंत्री जी श्री श्री १०८ श्री नरेंद्र सिंह जी के कारनामे से रूबरू होना अतिआवश्यक है खास कर जब बिहार में नितीश जी के सुशासन की डूग डुगी काफी जोर शोर से पुरे वातावरण को कंपा रही है | आलम यह है की साहब बहादुर को रुपैया बटोरते बटोरते फुर्सत ही नहीं मिल रही है |शायद आने वाले दिन में यह सभी रुपैया बिहार में कृषि क्रांति लाने में काम आ जाय |यह तभी संभव होगा जब बिहार में जदयू सरकार नहीं रहेगी और जब तक जदयू सरकार सत्ता च्युत होगी यह रुपैया स्विस बैंक के खाते में चला जायेगा और इनसब क्रियाओं में ३-४ वर्ष लग ही जायेंगे तब तक इनको कोई चिंता नहीं करने की जरूरत है |फिर एक अन्ना हजारे जैसे समाज सेवी का प्रदार्पण होगा उस में भी समय लग जाएगा ,उस पर भी जब तक नए अन्ना हजारे अपने भ्रष्टाचार के विरुद्ध पैर जमायेंगे तब तक श्री मान मंत्री जी कहीं यु.एस.ए. या यु.के. में स्थानांतरित हो गए तो फिर बिहार में कृषि क्रांति के प्रति प्रतिबद्ध नए श्री मान मंत्री जी आ जायेंगे और फिर रुपैया बटोरने की नयी cycle चालु हो जायेगी |नये मंत्री साहब फी फिर वही क्रांतिकारी प्रवचनों से जनता को सराबोर करते रहेंगे | And thus we the people of Bihar will prosper and prosper without break or brake .बिःर में सुशासन की बढ़ आ गयी है साहब |

  2. कीसन बाबु [ बापट ] हजारे को अब चुप होजाना चाहिए .. जब आर एस एस वाले और भाजप वाले साथ दे रहे हैं तो क्यों नहीं कहते के मैं उन लोगों के हाथों की कठपुतली हूँ … २७ दिसम्बर को इनकी असलियत और खुल के सामने आजायेगी … आए बी ऐन लोकमत के प्रभारी श्री राजदीपजी सरदेसाई साहब से बिनती है आप हमेशा की तरह सच का साथ दें और इस देश के नवजवानों को गुमराह करने वाले किसन हजारे का पर्दा फाश करें …..जो संसद पर हमला करे वोह आंतकवादी है चाहे हतियार लेकर करे या ज़बान से ….. अनुरोध है इस हजारे को आंतकवादी घोषित किया जाये .. इस भाषा का प्रयोग करने के लिए शमा चाहता हूँ लेकिन जो संसद और दूसरों का अपमान करे उस का सम्मान नहीं करना चाहिए … अमीन शेख पुणे महाराष्ट्र ..

  3. SARKAARI VYAAPAAR BHRASHTACHAAR on

    स्नेह धारा पूछ रही है की
    रामलीला मैदान में भारत के उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने आरती उतारने से मना किया …. मोदीके एक टोपी न पहनने पर ‘SECULARISM ‘ का शोर मचाने वाला मीडिया इस पे चुप है… क्या आप मानते हो कि मीडिया ‘DOUBLE STANDARD” अपना…ता है????
    क्योकि मीडिया रात दिन मेहनत करता है पिज्जा ,बर्गेर ,जंक फ़ूड में गाय और सूअर का मांस खाता है ….सरकारी भ्रष्टाचारियो से करोडो रूपया खाता है …कांग्रेस सरकार का पालतू कुत्ता है …..इसलिए उनपर नहीं भोकेगा ….. शुद्ध हिंदी में कहे तो रखेल, लौंडी,वैश्यायो , को जब तक सच्चा असली पैसा और झूठा प्यार बिस्तर पर मिलता रहे वह मुह नहीं खोलती है ..जब एक से ज्यादा खसम हो तो डबल नहीं मल्टी स्टेंडर्ड अपनाना पड़ता है …….
    बापूजी( आशाराम बापूजी ) देश के ७०%शहरी और ५०% ग्रामीण युवा १४ से ५० वर्ष आयु वर्ग के भगत सिंह ,चंद्रशेखर आजाद,राजगुरु,सुभाष चन्द्र बॉस ,आदि आदि को भारत सरकार ने विदेशी कंपनियों के गाय और सूअर के मांस और चर्बी से बने पिज्जा,बर्गर,जंक फ़ूड ,नुडल्स खिला खिला कर सेकुलर बना दिया है युवाओं को चोरी ,चुगली,(मीडिया),कलाली (बड़े बड़े बार और सरकारी शराब दुकाने ),दलाली (रिश्वत खोरी और कालाबाजारी ) और छिनाली (मुन्नी की बदनामी,शीला की जवानी,पाश्चात्य विदेशी/देशी नंगी नंगी माडल्स ) टीवी सिनेमा और इन्टरनेट पर सिखा रहे है ताकि इनका ध्यान चोरी,चुगली,कलाली,दलाली और छिनाली में लगा रहे और इन्हें सरकार का ७० हजार लाख करोड़ डालर का सरकारी व्यापर दिखाई नहीं दे…… पहले महात्मा गाँधी बर्बाद कर गया और अब अन्ना गाँधी महात्मा और राष्ट्र पिता बन्ने के चक्कर में सेकुलर दलालों के जाल में फंस गया है….इस लिए हे मेरे देश के हिन्दू युवा जागो…बीती ताहि बिसार दे ,,,,अब देश की सुध लो….गाय और सूअर के मांस से बने विदेशी और मुस्लिम बेकरियो में बने जंक फ़ूड का त्याग करो ,,,, चोरी,चुगली,कलाली,दलाली और छिनाली के सरकारी कांग्रेसी सेकुलर जाल में फंसने स्वयं और दुसरे युवा भाई बहनों की रक्षा करो …आत्म रक्षा ही देश रक्षा है….हम सुधरेगे जग सुधरेगा ……देश में अलख जगाना है विदेशी कंपनियों और लुच्चे भारतीय पाकिस्तानियों और बंगलादेशियो और पाकिस्तानी जेहादी विचारधारा वाले इंडियन मुहाजिरो को भगाना है….वन्देमातरम
    सरकारी व्यापर भ्रष्टाचार

  4. Vinayak Sharma on

    देश में खान-पान की आवश्यक वस्तुओं की कीमतों का निर्धारण मांग और पूर्ती से नहीं बल्कि ” राष्ट्रीय चरित्र सूचांक ” पर आधारित होना चाहिए क्यूंकि चरित्र का तो दिन प्रतिदिन गिरना निश्चित ही है सो कीमतें भी गिरेंगी. दूसरी और तमाम वेतन-भोगी कर्मचारियों का वेतन निर्धारण मात्र पेट्रोलियम पदार्थों के साथ ही सम्बद्ध होना चाहिए क्यूँ की उनके दाम बढ़ने निश्चित हैं. पेट्रोलियम पदार्थों के दाम बढ़ाये बिना तो सरकारें चल नहीं सकती.
    आप का क्या विचार है….?

  5. अजय जी आप से केवल इतना ही कहूँगा की हमरे देश me गाँधी ke आने का बाद से ऐसी परम्परा चली है कि जो कमजोर देश के लिए जान नही दे सकता वो मीडिया पब्लिसिटी और उपवास या अनशन का ढोंग कर कर देश का सबसा बड़ा देशभक्त बन जाता है और देश को भी अपने तरह का कमजोर तंत्र डा देता है. जैसे गाँधी ने चन्द्रशेकर आजाद भगत सिंह अदि का सम्मान और शहादत छीन ली उसी तरह ये लोग भी आज यही कह रहे हैं. इन्हें सत्ता का ही लोभ ही जैसा गान्धी और नेहरु को था. गाँधी को राष्ट्र पिता बनना था तो नेहरु को प्रधान मंत्री बनना था, तो दोनों ने मिल कर आन्दोलन का ढोंग किया वैसे ही आज हो रहा ही जो चीज हम ने नही देखी वो दूर कैसे होगा. हम ने अहिंसा की आज़ादी का स्वाद चख लिया. आज फल दिख ही रहा है. मुझे लगता है कि आज का देश अगर सुभाष या फिर भगत सिंह चलाते तो बात ही और होती अन्ना न तो राज बाला का बलिदान को अपने ढोंग से ढंक लिया हम कब तक हाई प्रोफाइल लोगो का तलवा चाटेंगे अजय जी अगर आप को सप्पोर्ट करना है तो राजबाला के परिवार का सप्पोर्ट करें वो नेता नहीं थे पर अन्ना तो आम हिन्दुस्तानी नही है उस जैसा सा हम उम्मीद नही कर सकते है या लोग युवा पीढ़ी को अहिंसा के नाम से उनका खून ठंडा कर रहे है. वक्त आने पर तो जानवर भी लड़ लेता है पर इस अहिंसा के वाइरस न हम हिन्दुस्तानियों को कमजोर कर दिया है हम अब कोई जंग नहे कर पायेंगे मुझे डर लगता है जिस दिन देश को हमारे बलिदान के जरूरत हो उस दिन हम अनशन न करना लगे. अगर ऐसा होता है तो मान लेना कि हमारी पीढ़ी जब पाकिस्तान और चीन के साथ जब फ़ौज ladeगा तो हमारे आने वाली फौजे बोर्डर पर पाकिस्तान के खिलाफ अनशन करेंगे तब आप अपनी माँ बहनो की इज्जत बचाने के लिए देश के दुश्मनों के सामने अन्ना के साथ अनशन karna

  6. फूलचन्द्र शर्मा on

    ऐसा लगता है की इस देश में सोचने और सवाल पूछने का ठेका सिर्फ अन्ना गिरोह ने ले रखा है…!!! और यदि कोई दूसरा ऐसा करेगा तो हफ्ता वसूलने वाले गुंडों की तरह अन्ना गिरोह के गुर्गे उसके पीछे उसी तरह पड़ जायेंगे जैसे कि कुछ अंधे अन्ना भक्त इस लेख के लेखक के पीछे पड़े हैं.

  7. अन्ना हो या केजरीवाल सब भ्रष्ट हैं कांग्रेस के इशारे पे नाचने वाली कठपुतली हैं
    लोग भ्रष्टाचार के विरुद्ध जागरूक हो रहे थे लेकिन इस ढोंगी ने आ के आग में पानी दाल दिया और खुद भी हाई प्रोफाइल मंच उतर कर रालेगन सिद्धि में बैठ गया

  8. दिमाग से बीमार लोगों का कोई इलाज़ नहीं होता. अन्ना ने अगर कुछ किया है तो आप जैसे सोये हुए लोगों के लिए ही… अगर आप को इस जन तंत्र की आवक्शायता नहीं है तो आप सोये ही ज्यादा भले हैं …. देश को तो अन्ना की जरूरत भी है है और जन तंत्र की भी.

  9. अन्ना हजारे I
    बुजुर्ग बेचारे II
    बचाने को हमे I
    फिरते हैं मारे मारे II
    लेकिन कुछ बुद्धिहीन दुखियारे I
    आ गए कष्ट में बेचारे II
    समझे है अन्ना को ईश्वर ये बेचारे I
    और लगायें तोहमत तमाम सारे II
    ये सतीश हरकारे I
    थोडा ठंडा करके खा रे II
    जो किरकिरा गए जनता की आँख में I
    फिरोगे मारे मारे II
    कुतर्कों के मत ले सहारे I
    प्रयास के मूल पर आ रे II
    ओ मिश्रा बेचारे I
    प्रयास के मूल पर आ रे II

    • अजय भाई, आपका कांग्रेस और अन्य राजनैतिक पार्टियों पर गुस्सा जायज़ है. लेकिन क्रोध में विवेक मत खोइए. यदि आपको लगता है की लेखक मुर्ख है तो अपनी विद्वता तर्कों के सहारे दिखाइए. किसने रोका है आपको? किसी को ऐसे मत कोसिये नहीं तो लगता है की आप “परिवर्तन” संस्था के वेतनभोगी कर्मचारी है. अन्यथा न लें.

      • आबिद भाई
        मेरा मानना है की जब चारों और लूट खसोट मची है . और ऐसे हालत में अगर कोई बुजुर्ग अन्ना . इस लूट खसोट का विरोध करता है .. तो वो क्या बुरा कर रहा है … वो कैसे जाने की किस मन में क्या है .. लेकिन इस बुजुर्ग के कार्य का उद्देश्य देखिये … अगर बात इमानदारी की आ जाये तो क्या हम और आप इतना त्याग कर पाएंगे .. इतने बरसो तक इतना काम कर पाएंगे .. दूसरी बात ये है की इस बुजुर्ग को कौन सी सत्ता हासिल है जो वो सारे दोषों का निवारण कर दे .. वो तो हमसे स्पष्ट रूप से कह रहा है उठो जागो और देश को संभालो . जितनी सारे मांगे लेखक ने उमरदराज अन्ना पर आरोप लगा कर रख दी वो कहाँ तक जायज हैं .. लेखक खुद भी कुछ करें और हम भी उनका साथ दे तो क्या नजरिया सकारात्मक नहीं होगा …..

        • हम साथ देने को तैयार हैं पर ठेका देने को नहीं| अन्ना हजारे और उनकी टीम को घमंड हो गया है और अब वे लोग कांग्रेस को परोक्ष समर्थन देने लगे हैं| केजरीवाल ने तो पिछले दिनों एक मीडिया वाले को भी डांट दिया| प्रशन पूछा है तो उसका जवाब दे दो, बौखला क्यों गए केजरीवाल? नहीं, ऐसे नहीं होता| देश की जनता किसी कि गुलाम नहीं है| जब लोगों ने देखा एक सत्तर – पिचहत्तर साल का बुजुर्ग अनशन कर रहा है तो लोग उसके साथ आ गए, फिर कांग्रेस ने उसे जेल में डाल दिया तो इस बात पर जनता साथ हो गयी| मगर जिस जन लोकपाल बिल कि बात को लेकर अन्ना हजारे अनशन पर बैठे थे, वो कहाँ घुस गया? अब ये लोग सोच रहें हैं कि इस देश में भ्रष्टाचार मिटाने का पेटेंट उनके नाम रजिस्टर्ड हो गया है. अब कोई दूसरा भ्रष्टाचार विरोधी बात करे तो नौटंकी है? ये नहीं चलेगा|

  10. अंततः ये भी सिद्ध हो गया की .. नकारात्मक मानसिकता के लोगों की संख्या भी काफी है … ये ऐसे लोग है जो मानसिक रूप से तो विकलांग है लेकिन बुद्धिजीवी होने का दावा करते रहते है .. सतीश मिश्र जैसे नकारात्मक लोग दया के पात्र हैं .. ये बेचारे तो केवल एक दिशा के बारे में जानते हैं .. और वो चोरी चकारी करो या उनकी चाकरी करो परन्तु कभी भी .. किसी भी हालत में उनका विरोध मत करो .. और कोई उनका विरोध करने की हिम्मत करे तो उनके नीचा धीखाने के लियी अपनी लंगडी बुध्धी में रगड़े लगाओ .. और जो कुछ कूड़ा कबाड़ निकले उसके लोगो के सामने रख दो .. क्यूँकी कुछ लोग तो उस जायके के भी होंगे ही ..

    • राधेय कृष्ण on

      अबे गधे की दुम, सतीश मिश्र ने जो लॉजिक दिए हैं उनका कोई उत्तर है तेरे पास या फिर खामखा केजरीवाल के कुत्ते की तरह की तरह भोंक रहा है. भगवान ने तुझे दिमाग दिया है इस्तेमाल करने के लिए तो इस्तेमाल कर और मिश्र जी ने जो सवाल उठाये हैं उनका जवाब दे. यदि तुझे कोई जवाब नहीं सूझ रहा तो तेरे आका केजरीवाल से पूछ के आ या उसके पास जा के उसे ये रपट दिखा और बोल उसे कि जवाब दे इसका. यदि ऐसा नहीं कर सकता तो फिर अपनी औकात में रह. डफर कहीं का.

      • परम विद्वान राधेय कृष्ण जी ,
        सम्माननीय टिप्पणी के लिए धन्यवाद ,
        क्यूँकी कोई भी अपनी बौधिक क्षमता का परिचय अपनी भाषा व लेखन शैली से ही देता है ..
        आपके भाषा लेखन शैली व सम्भोधन शैली परम सम्मान की पात्र हैं .
        क्यूँकी किसी विद्वान ने कहा है की ..
        रजा और विद्वान से बड़ा कौन .. और जवाब है नंग ..
        अतः हे नंग शिरोमणि जी महाराज आपको शत शत दंडवत नमन

        • राधेय कृष्ण on

          ज़रा अपनी शैली पर भी अपनी निगाहें मार लो. हम तो ईंट का जवाब पत्थर से देते हैं. अब आप के पत्थर जोर से लगा तो आपका दोष. ईंट आपने ही मारी थी.

    • फूलचन्द्र शर्मा on

      अजय कुमार तुम्हारी चीख पुकार सुनकर ऐसा लग रहा है की तुम भी उसी अन्ना गिरोह के NGOs वाले गोरख धंधे के सहारे ही अपनी रोटी-पानी का जुगाड़ करते हो और अन्ना गिरोह से जुड़े किसी NGO द्वारा फेंके गए अपनी लूट के कुछ टुकडों पर ही पलते हो.
      इसीलिए लेख में जो बातें सीधे-सीधे उदाहरण देकर समझाते हुए कही गयी हैं उनका तो कोई जवाब तुमको सूझा नहीं, लेकिन बौखला कर लेख लिखने वाले को ही तुम कोसने लगे. ऐसा लगता है की इस देश में सोचने और सवाल पूछने का ठेका सिर्फ अन्ना गिरोह ने ले रखा है…!!! और यदि कोई दूसरा ऐसा करेगा तो हफ्ता वसूलने वाले गुंडों की तरह अन्ना गिरोह के गुर्गे उसके पीछे उसी तरह पड़ जायेंगे जैसे तुम इस लेख के लेखक के पीछे पड़े हो.

  11. आपने बिलकुल सही लिखा हे मिश्र जी इस देश में अन्ना एंड टीम ने देश के भोले भाले लोगो के साथ मजाक किया हे. ब्रस्थाचार में और टेप कांड में फसे केजरीवाल और भूषण बंधू क्या देश को राह दिखायेंगे जो स्वंम अन्ना जेसे वृद्ध का सहारा लेकर अपना उल्लू सीधा करने में लगे हे………

  12. दुर्भाग्य से देश की राजनीतिक-सामाजिक और आर्थिक नब्ज़ के तथ्यों तथा सन्दर्भों के वास्तविक ज्ञान से शून्य कुछ पढ़े-लिखे मूर्खों की भीड़ अन्ना द्वारा बजाये गए “लोक्पाली डमरू” की सड़कछाप धुन पर बंदरों की तरह जमकर नाची, वही भीड़ अब भी उसी डमरू की सड़कछाप धुन के नशे में चूर है और अन्ना किसी मंत्री की तरह सरकारी गाड़ी का आनंद लूट रहा है. लेकिन 120 करोड़ के देश में ऐसे 2-4 लाख मुट्ठी भर बंदरों का शोरगुल नित निरंतर उजागर होती जा रही उन सच्चाइयों के सामने तिनके की तरह उड़ जाएगा जो अन्ना हजारे और उसकी टीम को दिन-प्रतिदिन बेनकाब करती चली जा रही हैं.

  13. सतीश चन्द्र मिश्र जी कितमा माल मिला है काग्रेस सरकार से |

  14. ये अन्ना और उनकी पूरी टीम ढोंगियों पाखंडियों की एक चालाक भीड़ है जो भ्रष्टाचार के खिलाफ देश की जनता के गुस्से का जमकर फायदा उठाने में कामयाब हो गयी और अब धीरे-धीरे अपने असली रूप में आ रही है. सरकार के साथ लज्जाजनक लिजलिजा समझौता करके देश की जनता की भावनाओं का सौदा करने के बाद अन्ना हजारे सरकारी पुरस्कार के रूप में मिली 22 सुरक्षा कर्मियों की सुरक्षा घेरे वाली जेड प्लस सिक्योरिटी लेकर नीली बत्ती वाली शासकीय गाड़ी में शासकों की तरह शान से घूम रहा है. जबकि भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में उडीसा के अरुण दास और कल हरियाणा की राजबाला की शहादात पर आंसूं बहाना तो दूर एक शब्द भी नहीं बोला है हजारे.
    इस टीम को भारत माता का चित्र, बाबा रामदेव, साध्वी ऋतम्भरा, उमा भारती, संघ परिवार के नाम से एलर्जी है लेकिन पाकिस्तानी मांगो के पक्ष में घंटा बजाने वाला प्रशांत भूषन, अग्निवेश,ईमानदारी का भगवान् दिखायी देता है. ये इस टीम के दोगलेपन की बेशर्म मिसाल है. देश को इन बहुरूपियों की गिरफ्त में जाने से बचाया जाए.

    • KIRTI RANJAN ROY on

      मुझे लगता है जो लोग अन्ना जी के बार मैं गलत लिखते है उनको कांग्रेस के तल्बेये चटनी कहिये नहीं तो कशाब तरह पाकिस्तान का बात सुनो , अगर कुछ भी कर नहीं सकते हो देश के लिए तो कमसे कम कमेंट्स भी मत करो क्यूँ के तुम लोग उसके लायक नहीं हो…………………..

  15. मायावती मुलायम लालू जय ललिता या फिर 2G CWG और ऎसी दर्जनों लूट इस देश में पिछले 2 दशकों से जारी हैं.तब कहाँ थी ये अन्ना- केजरीवाल & कम्पनी…? ज़रा पूछिए इस अन्ना गैंग के हजारे-केजरीवाल से लेकर इनकी पूरी कोर कमेटी के मेम्बरों से की उन्होंने कितनी RTI दायर करके मायावती, मुलायम लालू जयललिता या फिर शरद पवार कलमाडी ऐ. रजा, दयानिधि मारण सरीखों के भ्रष्टाचार के खिलाफ क्या और कौन सी लड़ाई लड़ी है.? पिछले 20 सालों से महाराष्ट्र में अनशन बाज़ी का धंधा कर रहे अन्ना हजारे को आजतक शरद पवार, कलमाडी, विलासराव देशमुख. सरीखे दर्जनों कांग्रेसी दिग्गजों का कोई भ्रष्टाचार कभी नज़र क्यों नहीं आया. कृषि मंत्री के रूप में भ्रष्टाचारी रावण की तरह उपजे शरद पवार ने पिछले सात सालों से महंगाई की तलवार से जनता का कत्लेआम राक्षसों की तरह किया है. इस रावण सरीखे भ्रष्टाचारी कृषि मंत्री की खूनी -जल्लादी नीतियों के कारण खुद अन्ना के महाराष्ट्र के विदर्भ में हजारों किसानों ने आत्महत्या कर ली लेकिन तब खुद अन्ना या उसका गैंग 7 सालों तक कहाँ सो रहा था….शरद पवार के खिलाफ कार्रवाई को लेकर अनशन बाजी करना तो दूर, इस गैंग ने आजतक मुंह नहीं खोला है.

  16. अग्निवेश से लेकर केजरीवाल तक बेईमानी के हमाम में पूरी तरह नंगे हो चुके हैं. अफज़ल गुरु और कसब की फांसी माफ़ करवाने के लिए छटपटा रहे भूषन परिवार के भ्रष्टाचार के ऊंचे-ऊंचे झंडे वर्षों पहले से सरकारी दस्तावेजों में लहरा रहे हैं. अन्ना के कहने से वो पाक-साफ़ नहीं हो जायेंगे. जो अन्ना अपने इर्द-गिर्द पांच इमानदार नहीं ढूंढ पाया वो पूरे देश में हजारों ईमानदार नेता ढूँढने का ठेकेदार बन रहा है. इस सालों को देश पहचान गया है. ये सब कांग्रेस के पाले हुए कुत्ते थे जिन्हें बाबा रामदेव के खिलाफ कांग्रेस ने सड़कों पर छोड़ दिया था. कांग्रेसी नेताओं खासकर उस इटैलियन और उसके “क्रोंस ब्रीड” पिल्ले की लूट की दौलत के खिलाफ बाबा रामदेव ने जो जनजागृति कर दी थी उस से देश का ध्यान भटकाने के लिए इन कांग्रेसी कुत्तों ने लोकपाल लोकपाल भौंकना शुरू कर दिया था. अपने काम में ये कुत्ते सफल भी हो गए. इसीलिए इन कुत्तों का लीडर अन्ना अब कह रहा है की यदि संसद ने लोकपाल बिल पास नहीं किया तो हम 2014 के चुनाव तक इंतज़ार करेंगे. मतलब ये की इन हरामखोरों ने 12 दिनों तक रामलीला मैदान में “रावण लीला ” सिर्फ देश को बरगलाने के लिए ही की थी.

  17. अन्ना गुट के प्रशांत भूषन, केजरीवाल,संदीप पाण्डेय,मल्लिका साराभाई,अखिल गोगोई, अग्निवेश, अरविन्द गौड़ सरीखे लोगों द्वारा देश हित का झंडा उठाये जाने और देश के भले का दावा करने की बात पर कोई भी राष्ट्रभक्त जागरूक नागरिक विश्वास नहीं कर सकता.क्योंकि ऊपर जितने नाम दिए हैं उन सभी लोगों के काश्मीरी आतंकियों के अलगाव वादी रहनुमाओं के साथ कैसे और क्या सम्बन्ध कितने पुराने हैं…? अफज़ल गुरु और कसब सरीखे पाकिस्तानी आतंकियों तथा उनको सुनायी गयी सजाओं के खिलाफ के प्रति इस अन्ना गुट क्या दृष्टिकोण है.? देश के हजारों निर्दोष नागरिकों के हत्यारे नक्सली-माओवादी हत्यारों का समर्थन ये अन्ना गुट कबसे और किस तरह से करता रहा है…? इन सब सवालों का शर्मनाक उत्तर अन्ना गुट के इन ढोंगी समाजसेवकों के देशद्रोही चरित्र और चेहरे को पूरी तरह नंगा कर देता है. यह सच है की देश का एक बड़ा मुद्दा भ्रष्टाचार है लेकिन आतंकवाद और अलगाववाद उस से छोटा मुद्दा नहीं है, यह मुद्दा देश की एकता अखंडता स्वतन्त्रता एवं संप्रभुता से सम्बन्धित है. हाँ अन्ना इस तरह की गतिविधियों में शामिल नही रहे हैं. लेकिन अन्ना के इर्द-गिर्द सिर्फ यही लोग हैं. और अपने इन सहयोगियों की ऎसी देशद्रोही करतूतों के विषय में अन्ना ने शातिर चुप्पी ओढ़ रखी है. इसलिए भ्रष्टाचार हटाने के लुभावने बहाने की आड़ में भेड़ की खाल ओढ़कर आये भेड़ियों से सावधान रहना ही होगा……….

  18. जी बिलकुल सही है आन्ना जी तो अच्छे है लेकिन उनके साथ जो है है वो कितने पानी मै है ये देखे.भष्टाचार ख़त्म करने की बात वो ही क्यूँ बोलते जो खुद ही भ्रष्ट है .पहले खुद को सुधारो फिर देश तो खुद ब खुद सुधर जायेगा.

  19. जिसने भी ये लेख लिखा है… वो सबसे बड़ा चोर है…
    शर्म करो ऐसा लिखते समय, एक बूढ़ा इंसान, एक सच्चा हिन्दुस्तानी देश को जगाने की कोशिश कर रहा है और ये कमीने (मेरी भाषा को माफ़ करें) उन की ही बुराई करने में लगे हैं…
    धिक्कार है तुम पर सतीश चन्द्र मिश्र … डूब मरो कही जा के…

    • लालमनी, तुम्हारी तिलमिलायी बौखलायी टिप्पणी स्वतः उजागर कर रही है कि अन्ना/टीम अन्ना और उनके NGO ब्रांड पाखंडी भक्तों की दुखती रग पर सतीश मिश्र के लेख ने जोरदार प्रहार किया है तथा उनके चेहरे से नकाब नोंच कर कांग्रेसी/सरकारी दलाल वाले वास्तविक चेहरे को बेनकाब किया है. इसीलिए उनके लेख में पूछे गए गंभीर/संगीन सवालों का कोई उत्तर तो तुम दे नहीं पाए, इसके बजाय गाली-गलौज पर उतर आये.
      बेहतर होता की जिस प्रकार लेख में एक-एक प्रश्न को तथ्यों-तर्कों के साथ उठाया गया है, तुम उनका उत्तर भी उसी शैली में देते.
      लेकिन इस मोर्चे पर बिलकुल शून्य नज़र आ रहे हो. इसमें तुम्हारा कोई दोष नहीं, अन्ना का भक्त भी इसी तरह का तर्क विहीन व्यक्ति हो सकता है.

  20. ये सतीश चन्द्र मिश्राजी भी तो पेट्रोलियम घोटाले में फंस चुके हैं. अगर अन्ना के सहयोगी दोषी हैं तो इनकी कांग्रेस सरकार उन्हें गिरफ्तार क्यों नहीं करती . क्या अब भी ये यही कहेंगे की इनके पास उन्हें गिरफ्तार करने की आज़ादी नहीं है. ये कांग्रेस वाले चुटकुला बढ़िया सुनाते हैं, अभी इनके मोंटेक सिंह अहलुवालिया ने गरीबी की क्या जबरदस्त परिभाषा बताई है.लूट लो भाई जितना लूट सको, शरद पवार जी ने घटिया गेहू ऑस्ट्रेलिया से मंगवाया ख़राब निकला तो समंदर में फेंक दिया . अनाज सड़ रहा है इन्हें चिंता नहीं है. ये एक नया नियम लेन जा रहे हैं की गरीब परिवार को साल में सिर्फ ४ सिलिंडर पर सब्सिडी मिलेगी और इन्ही का नियम है की २१ दिन पर सिलिंडर की रिफिलिंग होती है. मतलब इन्हें भी मालूम है की एक सिलिंडर २१ दिन से ज्यादा नहीं चलता फिर भी ऐसा प्रस्ताव पास करने वाले हैं जिससे गरीबों का जीना और भी दूभर हो जाये.

    • उदय जी, कुतर्कों से कुकर्मों को नहीं छिपाया जा सकता. लेख का मर्म एवं मंतव्य जाने-समझे बिना बेसिर पैर की टिप्पणी करना हास्यस्पद ही है.
      आपने केंद्र सरकार के भ्रष्टाचार के जिन मुद्दों का उल्लेख किया है उन मुद्दों पर अन्ना और उनकी टीम मुर्दों की तरह खामोशी ओढ़े है. आप बता सकते हैं क्यों…?
      इसके बजाय अन्ना टीम के मुख्य कर्ताधर्ताओं में से एक प्रशांत भूषण कश्मीर सम्बंधित पाकिस्तान की जहरीली मांगों के समर्थन का ढोल निर्लज्जता के साथ पीटने में व्यस्त है.
      सतीश मिश्र जी ने भी अन्ना और उनकी टीम की इसी सरकारी चाटुकारिता एवं कुटिलता को रेखांकित किया है.
      आलोचना तथ्यात्मक एवं तार्किक होनी चाहिए, उपदेशात्मक आलोचना को कूड़े की टोकरी से बेहतर स्थान नहीं मिलता.

      • क्या ऐसा नहीं हो सकता की वो अपने लक्ष्य से नहीं भटकना नही चाहते हो .. जबकी सरकार का हमेशा ये लक्ष्य रहा की वो लक्ष्य से भटकें … अन्ना कोई शक्ती नहीं है .. उसने हमारी चेतना को जगाने का प्रयास किया है .. अब आप सिर्फ अन्ना से ही सारी उम्मीद क्यूँ लिए बैठे .. वो बेचारे बुजुर्ग ने सुचना का अधिकार आपको दिलवा दिया … आप भी कुछ कर लो .. अन्ना का क्या पता कब निकल लें उम्र भे हो गयी है .. आप क्यूँ नहीं कुछ करते .. घूमा फिर कर अन्ना को घेरने के प्रयास में उर्जा जाया करने की बजे आप खुद भी कुछ कर लो .. उनका छोटा प्रयास है लेकिन आप बड़ा प्रयास करो और सरकार को सभी मुद्दों पर घेरो … पहली बार ऐसा हुआ की आप और हम भ्रस्ताचार पर इतनी बात कर रहे हैं ,, किसकी देन है? अकर्मण्यता अच्छी बात नहीं .. किसी के भी साकारात्मक परयस को भुलाना अच्छी बात नहीं …

        • लेकिन हमें यह भी देखना होगा कि इस सब के पीछे कौन सी शक्ति काम कर रही है जो उत्तर भारतीयों को महाराष्ट्र से खदेड़ने में राज ठाकरे का समर्थन करने वाले का हृदय परिवर्तन हो कैसे हो गया? अरविन्द केजरीवाल ने इस आन्दोलन के लिए विदेशो से कितना चंदा लिया? यही नहीं राहुल गाँधी के करीबी नवीन जिंदल ने इस आन्दोलन के लिए चंदा क्यों दिया और केजरीवाल ने क्यों लिया. ऐसी बहुत बातें हैं. अब एक बात बताओ कि अन्ना हजारे जेड प्लस सुरक्षा में क्यों रहने को राज़ी हो गए? मेदान्ता जैसे पञ्च सितारा हस्पताल में क्यों विश्राम किये? वे तो ज़मीन के आदमी हैं न? अब पंचसितारा संस्कृति के हिस्सा क्यों हो गए? कोई जवाब है???

          • लेकिन उद्देश्य क्या हो सकता है .. इस बुजुर्ग का जो की कभी निकल ( म्रत्यु ) सकता है ..

        • मुंबई के एक आईएएस अधिकारी ने शरद पंवार के भ्रष्टाचार के विरुध्द बिगुल बजाया, जी आर खैरनार नाम है उनका. कभी किसी से नहीं डरे. दाऊद इब्राहीम जैसे कांपते थे उनसे. वे भी शरद पंवार के भ्रष्टाचार खिलाफ उनकी लडाई में अपने मिलने वाले की सलाह पर रालेगांव सिध्दी गए थे अन्ना हजारे के पास. तब उन्होंने वहां जो देखा यहाँ पढ़ लें. अन्ना हजारे सिर्फ और सिर्फ पब्लिसिटी के भूखे हैं और टीम अन्ना ने उन्हें पब्लिसिटी दिलवाने का पक्का इंतजाम किया है.
          http://www.mediadarbar.com/2123/vitamin-khairnar/

  21. बिलकुल सही कहा सर अपने …..अन्ना के बारे में और टीम के बारे में ….धन्यवाद् …

  22. suryakant shinde on

    अण्णा हजारे कुछ नही कर सकते…….. वे कोई भगवान के अवतार नही है……….
    लेकीन उन्होने देश के रूह को जगाने कि कोशिश कि है………
    अगर किसी मी दम है तो जितना अण्णा हजारे ने किया है उसमे से एक प्रतिशत का काम कर ले
    दुनिया वाले आपको को भी सलाम करेंगे………

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