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मजदूरों को जिंदा रखने के लिए सीएम योगी की पहल..

By   /  March 18, 2020  /  No Comments

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-सुनील कुमार।।
किसने सोचा था कि एक ऐसा दिन आएगा जब उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का भी कोई ऐसा फैसला आएगा कि जिसकी तारीफ लिखनी पड़ेगी। उन्होंने ट्विटर पर घोषणा की है कि कोरोना वायरस के बुरे असर के चलते रोजी-मजदूरी करने वाले परिवारों के जीने में दिक्कत न हो इसलिए प्रदेश सरकार ने एक तय धनराशि मजदूरों के बैंक खातों में डालने का फैसला लिया है। इस बारे में वित्तमंत्री की कमेटी तीन दिन में रिपोर्ट देगी।

आज जब ऐसे ट्वीट की कॉपी फेसबुक पर देखने मिली, तो लगा कि योगी के लिए दिक्कत खड़ी करने के लिए यह किसी की शरारत है। लेकिन फिर योगी के ट्विटर पेज पर देखा तो यह घोषणा वहां सचमुच है। लेकिन इसके साथ ही उनके इस फैसले को लिखे बिना काम नहीं चल सकता कि कोरोना के इस भयानक खतरे के बीच योगी सरकार रामनवमी पर अयोध्या में 25 मार्च से 2 अप्रैल तक मेला करवाने पर अड़ी हुई है जिसमें देश भर से दस लाख हिन्दुओं के आने का अंदाज है। अब लाखों लोगों की ऐसी भीड़ अगर एक-दूसरे से कोरोना लेकर लौटेगी, तो देश की सरकारें उनको कैसे और कहां ढूंढेंगी?योगी का एक फैसला अ’छा है, और दूसरा फैसला शायद आज के हिन्दुस्तान में सबसे खराब सरकारी फैसला भी है।

आज हिन्दुस्तान में कोरोना वायरस के खतरे, और उसकी दहशत के चलते एक अभूतपूर्व नौबत आई है, और इससे निपटने के लिए असाधारण कदमों की जरूरत भी है। पिछले दिनों में हम इसी जगह पर लगातार लिखते आ रहे हैं कि कोरोना का असर इंसानी सेहत से परे देश की अर्थव्यवस्था पर, बाजार और गरीबों के चूल्हों पर भी बहुत बुरी तरह पडऩे वाला है। अभी जब केरल और बिहार जैसे राज्यों ने तय किया कि स्कूलें बंद होने की वजह से जिन बच्चों को दोपहर का भोजन नहीं मिल पाएगा, उनके लिए घरों पर राशन पहुंचाने का काम होगा, या पका हुआ खाना घर भेजा जाएगा, तो हमने अन्य राज्यों से भी उम्मीद की थी कि वे भी इस बारे में सोचें कि इतने गरीब बच्चे दोपहर के खाने से वंचित कर दिए जाने के बाद किस तरह रहेंगे, और सरकार उनके लिए क्या कर सकती है।

अभी कुछ महीने पहले की ही बात है कि साल के पहले दिन छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राजधानी के मजदूर-बाजार, चावड़ी, पहुंचकर सुबह-सुबह ही मजदूरों को कंबल का तोहफा दिया था। आज देश-प्रदेश की हालत यह है कि बाजार की मंदी की वजह से निर्माण-मजदूर लाखों की संख्या में बेरोजगार हो गए हैं। इनमें से लाखों लोग काम की तलाश में दूसरे प्रदेशों में जाते हैं, लेकिन इस बार कोरोना की दहशत के चलते लोग कम गए होंगे, या लौट आए होंगे। ऐसे में बेरोजगार होने वाले मजदूरों के लिए सरकार को कुछ करना चाहिए। अब क्या करना चाहिए, कितना करना चाहिए, यह तो राज्य सरकार के खर्च करने की ताकत पर भी निर्भर करता है, क्योंकि कर्ज ले-लेकर एक सीमा तक ही जनकल्याण किया जा सकता है। सरकार को कई किस्म की दूसरी फिजूलखर्ची रोककर बेरोजगार हो जाने वाले मजदूरों, ठेले-खोमचे वालों, और असंगठित कर्मचारियों के लिए जिंदा रहने का इंतजाम करना चाहिए। दुनिया के संपन्न देशों में से एक, फ्रांस ने कोरोना की वजह से आई बेरोजगारी और मंदी की वजह से लोगों से बिजली-पानी के बिल लेना रोक दिया है। आज तो हिन्दुस्तान में भी बाजार के संगठनों की मांग है कि बैंकों को कर्ज के भुगतान की किश्तें फिलहाल रोक देनी चाहिए क्योंकि छोटे व्यापारियों की हालत तो बिल्कुल भी कर्ज चुकाने की नहीं रह गई है।

जनकल्याणकारी राज्यों को महज कोरोना-बचाव और उससे इलाज से परे भी जिंदगी के बाकी दायरों के बारे में सोचना और कुछ करना चाहिए। स्कूल-कॉलेज की पढ़ाई, दोपहर का भोजन, लोगों की मजदूरी, ठप्प हो गए खानपान और पोल्ट्री जैसे कारोबार, ठप्प हो गया पर्यटन और लोगों का आना-जाना, इन सबको देखते हुए सरकार को अपनी बहुत बुरी तरह घटने जा रही कमाई के बावजूद सबसे गरीब लोगों के जिंदा रहने के लिए कुछ इंतजाम जरूर करना चाहिए। सभी राज्यों को बहुत बारीकी से बाकी राज्यों के जनकल्याणकारी फैसलों को देखना चाहिए, और अपने प्रदेशों में उनकी संभावनाएं तौलनी चाहिए। फिर आज की नौबत को भारत के प्रदेशों को एक चेतावनी भी मानना चाहिए, क्योंकि कई लोगों का यह मानना है कि नौबत इससे बहुत अधिक खराब हो सकती है। वैसी हालत में क्या तो लोगों का बचाव होगा, क्या इलाज होगा, और कैसे जिंदा रहने के लिए उनका पेट भर सकेगा, यह सब एक बड़ी चुनौती होने वाली है, और जिम्मेदार सरकारों को अभी से ऐसी नौबत के लिए आपात योजनाएं बना लेनी चाहिए।

(दैनिक ‘छत्तीसगढ़’ का संपादकीय, 18 मार्च 2020)

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  • Published: 2 weeks ago on March 18, 2020
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  • Last Modified: March 18, 2020 @ 6:00 pm
  • Filed Under: राज्य

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