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क्या शाहीनबाग आंदोलन अपना तेज खो रहा है.?

By   /  March 19, 2020  /  No Comments

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-पंकज चतुर्वेदी।।

अब मेरी यह स्पष्ट धारणा बनती जा रही है कि शाहीनबाग और उसकी तर्ज पर खड़े आंदोलन अपनी दिशा और तेज खो रहे हैं । इन सभी आंदोलनों को गृह मंत्री ने जब राज्यसभा में आश्वस्त किया उसी दिन इसे अपनी जीत मानकर एक बड़े जलसे के साथ में समाप्त कर देना था और चैता देना था कि हम संविधान और संसद की इज्जत करते हैं इसीलिए संसद में बोले गए शब्दों का सम्मान करते हुए अपने आंदोलन को स्थगित करते हैं ।
हां ,स्थगित करते हैं यदि हमें लगा कि सरकार अपने शब्दों पर टिकी हुई नहीं है तो हम नए सिरे से आंदोलन करेंगे । यदि ऐसा किया गया होता तो एक या दो या 3 महीने बाद फिर से आंदोलन करने की जरूरत होती तो आंदोलनकर्ताओं में एक नई ऊर्जा होती, नई सोच होती और पिछले अनुभवों से सीखने की ताकत होती ।
कभी विचार करें एनआरसी और सीएए के विरुद्ध आंदोलन में अभी तक पूरे देश में सैकड़ों लोग मर चुके हैं ।दिल्ली में हुए दंगे में 55 लोग मरे ।न जाने कितने बेघर हुए। न जाने कितने बेरोजगार हुए ।
अकेले दिल्ली में 2000, यूपी में कम से कम 5000 लोग फर्जी मुकदमों को इस आंदोलन के कारण झेल रहे हैं।
आंदोलन केवल धरना देना नहीं होता अपने साथ खड़े लोगों को वक्त पर मदद करना भी आंदोलन होता है ।आज यह आंदोलन धीरे-धीरे उन लोगों को भूल रहा है उन लोगों, जो लोग आज भी जेल में हैं या जिनके घर के लोग मर गए हैं ।
दिल्ली में दंगे हुए ।दिल्ली में दंगे में इतने लोग मारे गए। उसके बाद कोरोनावायरस का संकट हमारे देश के सामने हैं ।
यदि इस अवसर पर भी हम हट या जिद करते हैं और खुद ना खासता था इस जगह से कभी वायरस फैल गया तो याद रखना ना तो समाज आपको माफ करेगा ना ऊपर वाला। आंदोलनकारी एक बार फिर सोचें इस तरह कैसे शाहीन बाग के रास्ते से सड़क जाम करके क्या वे आम लोगों की सहानुभूति खो रहे हैं?
इस समय जब देश में एक महामारी का खतरा खड़ा हुआ है तब भी बेवजह के कुतर्कों के साथ में वहां पर जमना ना तो वैज्ञानिकता है ना व्यवहारिकता। मुझे शक होने लगता है कि कहीं यह पूरा आंदोलन मुस्लिम मंच और जमायत के सांप्रदायिक संगठनों के हाथ की कठपुतली तो नहीं बन गया है ? क्योंकि यह जान लें इस तरह के आंदोलन जब तक चलते रहेंगे तब तक ध्रुवीकरण के नाम पर संघ के परिवारों को मजबूती मिलती रहेगी । यह जान लें कि इन आंदोलनों में लग रही ताकत एक प्रकार से विपरीत दिशा में दौड़ रहे घोड़ों की तरह है जो इस सांप्रदायिक विचारधारा को उखाड़ फेंकने के लिए नहीं बल्कि उससे और मजबूत करने के लिए काम कर रही है।
मेरा फिर से निवेदन होगा कि आज वक्त है कि हम लोग सम्मान के साथ धरने से उठें। इस चेतावनी के साथ कि यदि सरकार अपने शब्दों से पलटी तो फिर से धरने पर बैठा जाएगा हम इस समय लोगों के बीच में इस महामारी के प्रति जागरूकता का काम करें । हम इस समय दंगों में बेघर हुए बेरोजगार हुए लोगों को फिर से खड़ा करने के लिए काम करें। हम इस पूरे आयोजन में जो लोग मुकदमों में फंसे हैं उनके लिए काम करें ।
लोगों को जागरूक करें और देश को सर्वोपरि माने।

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  • Published: 2 weeks ago on March 19, 2020
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  • Last Modified: March 19, 2020 @ 3:36 pm
  • Filed Under: देश

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