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खून में कारोबार, महामारी का डर और निर्यात की छूट..

By   /  April 2, 2020  /  No Comments

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-संजय कुमार सिंह।।

कोरोना से निपटने के लिए सरकार क्या कर रही है यह बिल्कुल रहस्य है। जो कार्रवाई हुई है वह काफी देर से यह अब सर्वविदित है। इस बीच चिकित्सा उपकरण और सुरक्षा सामग्री के निर्यात की एक खबर जो प्रमुखता से छपनी चाहिए थी नहीं के बराबर छपी। उसे कायदे से फॉलो भी नहीं किया गया। निर्यात के संबंध में पूछने पर कह दिया गया कि पता नहीं है और बाद में बताया गया कि जो चीजें निर्यात हुई हैं वह प्रतिबंधित नहीं हैं। पर देश में जब अस्पतालों की हालत खराब है, प्रति व्यक्ति बिस्तर से लेकर वेंटीलेटर तक की भारी कमी है तो किसी चीज का निर्यात प्रतिबंधित है और किस चीज का नहीं और जो नहीं है वह क्यों यह सब बताने वाला कोई नहीं है। ना मीडिया अपने स्तर पर पूछकर बताएगा।


इस क्रम में कल रात मुझे ट्वीटर पर एक संदेश मिला जिसका अनुवाद कुछ इस प्रकार होगा, “दूसरा कार्गो (मालवाहक) बोइंग 747 – भारत से 90 टन मेडिकल प्रोटेक्टिव उपकरणों के साथ आया है जो आज बेलग्रेड पहुंचा। सर्बिया की सरकार ने इन मूल्यवान चीजों को खरीदा है जिसके लिए पैसे यूरोपीय यूनियन ने दिए जबकि यूएनडीपी सर्बिया ने विमान की व्यवस्था की और सुनिश्चित किया कि द्रुततम संभव डिलीवरी हो।” इसमें काम की सूचना यही है कि भारत से अभी भी (29 मार्च का ट्वीट है) चिकित्सा सामग्री का निर्यात हो रहा है। कोरोना से लड़ने की तैयारी तो छोड़िए अपने यहां बनने वाली सामग्री का निर्यात कर रहा है। मुझे इस बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी। इसलिए यह बता दिया कि ट्वीटर हैंडल जिस नाम से है वह संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम, सर्बिया का हैंडल है। और यह भी कि ब्लू टिक वाला है तो सही और आधिकारिक ही होगा। इसका आदर्श है, बेहतर जीवन के लिए हम अभिनव विकास समाधान तलाशते हैं।


प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सितंबर 2014 में जापानी निवेशकों से कहा था कि ‘गुजराती हूं, मेरे खून में कारोबार है’। उस समय तो इसे उनकी योग्यता समझा गया था पर अब लग रहा है कि व्यापार उनके खून में नहीं है वे खून का भी व्यापार कर सकते हैं (भारत में ब्लड बैंक व्यावसायिक नहीं होते हैं और कानूनन खून खरीदा नहीं जा सकता है)। कहने को सोनिया गांधी 2007 में ही उन्हें मौत का सौदागर कह चुकी हैं और उनके समर्थकों को यह बहुत बुरा लगा था। कहने को राफेल मामले में राहुल गांधी ने चौकीदार चोर है भी कहा था। और सच यह है कि अभी जब देश में महामारी का खतरा है और चिकित्सा सुविधा का बुरा हाल है, तमाम चिकित्सा उत्पादों की जरूरत पड़ेगी और उसमें कौन सी चीज कहां मिलेगी, मिलेगी की नहीं ये सब तमाम मुद्दे हैं तब भारत सरकार ने इजराइल से लाइट मशीन गन खरीदने का सौदा किया है (उसपर अलग से) और इस संबंध में विज्ञप्ति जारी कर सूचना दी है।
फेसबुक पर मेरी पोस्ट को 29 लोगों ने शेयर किया है और कुछ मित्रों ने अभी तक चिकित्सा सामग्री का निर्यात जारी रहने पर चिन्ता जताई तो कुछ लोगों ने इससे संबंधित खबरों का हवाला दिया। कुछ लोगों ने इस निर्यात का बचाव भी किया जबकि मैंने तो सिर्फ सूचना दी थी। अपनी ओर से कुछ कहा ही नहीं था। एक मित्र ने लिखा कि इसमें सिर्फ सर्जिकल दस्ताने हैं जबकि भारतीय अस्पतालों में मास्क के साथ दस्ताने भी नहीं होने की शिकायतें आम हैं। वैसे भी एक बोइंग 747 मालवाहक विमान से सिर्फ मेडिकल दस्ताने निर्यात हुए हैं तो भी यह खबर है। कितने दस्ताने होंगे और सर्बिया में इनकी इतनी जरूरत क्यों है और भारत में क्यों नहीं है, कितने दिनों का स्टॉक है यह सब जानने, बताने पूछने की जगह भारत में कुछ सरकार समर्थक सिर्फ सरकार का बचाव करते हैं।
आज (बुधवार) खबर थी कि इसमें 90 टन मेडिकल उत्पाद और सुरक्षा के लिए काम आने वाले सामान थे। इनमें 50 टन सर्जिकल दस्ताने मास्क और कवरवॉल थे जिसकी आवश्यकता चिकित्साकर्मियों को पड़ती है। एनडीटीवी की एक खबर के अनुसार भारत में करीब 100 चिकित्सकों को क्वारंटाइन किया गया है। मुख्य रूप से इसका कारण है कि कोरोना संक्रमित मरीजों के बीच काम करने के लिए उनके पास आवश्यक सुरक्षा सामग्री नहीं थी। लखनऊ में एक रेजीडेंट डॉक्टर के पीड़ित होने के एक हफ्ते बाद भी ओपीडी के चिकित्सकों की मांग खारिज कर दी गई। इस आशय की खबरें हैं कि देश के कुछ हिस्सों में चिकित्सक बरसाती और रेनकोट का उपयोग कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश में एम्बुलेंस कर्मचारी वेतन न मिलने और सुरक्षा के सामान न होने कारण कामबंद करने की चेतावनी दे चुके हैं। दूसरी ओर, केंद्र सरकार ने कहा है कि वह थोक में आवश्यक सामग्री प्राप्त करने की कोशिश कर रही है।
इस खबर के बाद सरकार के पक्ष में यह भी बताया गया है कि जो चीजें निर्यात की गई हैं वे प्रतिबंधित नहीं हैं। पर प्रतिबंधित क्यों नहीं हैं या की गई हैं और थोक में कौन सी चीजें आयात की जाएंगी तथा अस्पतालों में अभी जिन चीजों की कमी है वह क्यों है इस पर कोई खबर या विज्ञप्ति मुझे नहीं मिली। बताया गया है कि दस्ताने भी जो निर्यात किए गए हैं वे कोविड-19 के उपचार के काम नहीं आते हैं। कुल मिलाकर चिकित्सा उपकरणों और सामग्रियों के निर्यात पर पूरा प्रतिबंध नहीं है भले ही अभी ही अस्पतालों में आवश्यक चीजों की कमी है। बार-बार की मांग के बावजूद कोविड-19 के लिए आवश्यक सामानों के निर्माण के लिए दिशानिर्देश उसी दिन जारी किए गए जिस दिन लॉक डाउन की घोषणा हुई (स्क्रॉल डॉट इन)। वेंटीलेटर और कुछ दूसरी चीजों के निर्यात पर रोक भी लॉक डाउन के आस-पास ही लगी है।

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About the author

छपरा के संजय कुमार सिंह जमशेदपुर होते हुए एनसीआर में रहते हैं। 1987 से 2002 तक जनसत्ता में रहे और अब भिन्न भाषाओं में अनुवाद करने वाली फर्म, अनुवाद कम्युनिकेशन (www.anuvaadcommunication.com) के संस्थापक हैं। संजय की दो किताबें हैं, ‘पत्रकारिता : जो मैंने देखा जाना समझा’ और ’जीएसटी – 100 झंझट’।

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