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कौन किसके धैर्य की परीक्षा ले रहा है, गहलोत या सचिन पायलट..

By   /  May 11, 2020  /  No Comments

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राजस्थान में मुख्यमंत्री और कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष में जोरदार घमासान.. पंचायती राज विभाग बना अखाड़ा..

-महेश झालानी।।

दोनों में से धैर्य की परीक्षा कौन ले रहा है, गहलोत या पायलट ? पंचायत राज विभाग में जिस तरह की छह महीने से दो आला अफसरों के बीच मारधाड़ और एक दूसरे को पटखनी देने का खेल चल रहा है, उससे अफसरशाही में यही एक संदेश जा रहा है कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट एक दूसरे की धैर्य की परीक्षा ले रहे है ।

एक्शन से भरी और मारधाड़ से भरपूर पूरी कहानी से अधिकांश अफसरो के अलावा मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री दोनों वाकिफ है । पायलट इसलिए खून का घूंट पीने को विवश है क्योंकि कार्मिक विभाग उनके पास नही होकर मुख्यमंत्री के पास है । ऐसे में पायलट धींगामुश्ती करने वाले अफसरों पर लगाम कसने में विवश है । असहाय होकर तमाशा देखने के अलावा उनके पास कोई विकल्प नही है ।

मुख्यमंत्री चुप्पी साधे क्यों बैठे है, पूरी अफसरशाही इसको बेसब्री से जानने को बेताब और उत्सुक है । मुख्यमंत्री ने अविलम्ब हस्तक्षेप कर कोई समुचित हल नही निकाला तो अफसरशाही के चेहरे पर कालिख पोतने वाली फिल्म में आगे अप्रिय दृश्य भी देखने को मिल सकते है । फिर होगी राष्ट्र स्तर पर राजस्थान की ऐसी बदनामी जिसके दाग धोने में गहलोत सरकार को वर्षो लग जाएंगे । हो सकता है कि इस दंगल के बीच किसी की कुर्सी भी जा सकती है ।

आश्चर्य इस बात का है कि सचिन पायलट के अधीन पंचायत राज महकमे में अक्टूबर, 19 से अतिरिक्त मुख्य सचिव (पंचायत) राजेश्वर सिंह और इनके अधीन कार्यरत विशिष्ट शासन सचिव श्रीमती आरुषि अजय मलिक के बीच जबरदस्त घमासान मचा हुआ है । मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव कुलदीप रांका और मुख्य सचिव डीबी गुप्ता को सौंपे गए पत्र में राजेश्वर सिंह ने यह आरोप लगाया है कि आरुषि अपने दायित्वों का सही ढंग से निर्वहन करने के बजाय मनमानी कर उनको नीचा दिखाने की कोशिश करती है । उनका यह आचरण अमर्यादित और अशोभनीय है ।

अक्टूबर के बाद ऐसे कई मौके आये जिसकी वजह से दोनों के बीच जबरदस्त टकराहट होती आ रही है । पंचायत विभाग से लेकर सचिवालय और अब मीडिया तक मे यह लड़ाई पहुंच चुकी है । गौर तलब है कि खुद सचिन पायलट इस “दंगल” से पूर्णतया वाकिफ है । लेकिन वे पूरी तरह असहाय है । आज यह लड़ाई एक ऐसे खतरनाक मोड़ पर पहुँच गई है जिसके परिणाम बड़े ही भयावह हो सकते है ।

उधर आरुषि मालिक को अच्छी पोस्टिंग दिलाने के लिए पूरी जाट लॉबी जी जान से जुटी हुई है । यह पहला मौका है जब आरुषि को पंचायत जैसे वाहियात महकमे में पोस्टिंग मिली । वरना ये हमेशा अच्छी पोस्टिंग पाती रही है । इससे पूर्व ये भरतपुर कलेक्टर के पद पर तैनात थी । इनके अक्खड़ रवैये को देखते हुए राज्य मंत्री सुभाष गर्ग ने इनको यहाँ से हटवा दिया ।

पंचायत राज विभाग में आने के बाद ये अच्छी पोस्टिंग के लिए अपने राजनीतिक सम्बन्धो की बैसाखी का सहारा ले रही है । इससे पहले भी इनको जयपुर कलेक्टर पद पर तैनात करने की पूरी तैयारी होगई । लेकिन मुख्यमंत्री ने इनके बजाय डॉ जोगाराम को नियुक्त करना मुनासिब समझा । अब ये जेडीए, आबकारी, परिवहन विभाग में जाने की जुगत भिड़ा रही है । हो सकता है कि राज्य सरकार इनको सहकारिता विभाग में रजिस्ट्रार बना दे । यह पद फिलहाल खाली है ।

उधर दोनों अफसरों की लड़ाई को कुछ लोग दिल्ली ले जाने की तैयारी कर रहे है । सभी आवश्यक दस्तावेज एकत्रित कर लिए गए है । सोनिया और राहुल से वक्त मिलने के बाद प्रदेश की ताजा राजनीतिक और प्रशासनिक स्थिति से दोनों को अवगत कराया जाएगा । राजस्थान के प्रभारी अविनाश पांडे की जानकारी में यह प्रकरण आ चुका है ।

इस मसले पर राजेश्वर सिंह से बात करने की कोशिश की । उन्होंने इस विषय के बारे में अनभिज्ञता जाहिर की । उधर आरुषि को तीन बार फोन लगाया गया । यही जवाब दिया गया कि फ्री होने के बाद कॉल बैक करेगी ।

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  • Published: 3 weeks ago on May 11, 2020
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  • Last Modified: May 11, 2020 @ 4:49 pm
  • Filed Under: गौरतलब

About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

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