/स्वामी ने लगाए सोनिया और वाड्रा पर आरोप, लेकिन Hindustan Times को खबर नहीं है पसंद

स्वामी ने लगाए सोनिया और वाड्रा पर आरोप, लेकिन Hindustan Times को खबर नहीं है पसंद

सुब्रहमण्यम स्वामी इन दिनों सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा के खिलाफ अभियान छेड़ रखा है। राजनीति में एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप आम बात है, लेकिन राजधानी से प्रकाशित होने वाले दैनिक हिन्दुस्तान टाइम्स की वेबसाइट ने इस खबर पर अजीबोगरीब कदम उठाया है। 2 अक्टूबर को प्रकाशित खबर में सवामी के आरोपों की चर्चा की गई थी, लेकिन इसे दो दिनों पहले इसे हटा दिया। दिलचस्प बात यह है कि इस खबर पर कमेंट यानि टिप्पणियां अभी भी आ रही हैं। आप चाहे तो इस लिंक पर क्लिक कर खुद देख सकते हैं।
http://www.hindustantimes.com/Swamy-turns-guns-on-Robert-Vadra/Article1-752349.aspx

दरअसल शनिवार यानि 1 अक्टूबर को राजधानी में एक समारोह में डॉ. सुब्रहमण्यम स्वामी ने 2जी घोटाले में यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद राबर्ट वाड्रा पर निशाना साधा था। जनता पार्टी अध्यक्ष डॉ. स्वामी ने कहा था कि 2जी स्पेक्ट्रम बंटवारे में हुई अनियमितता में चिदंबरम के साथ साथ सोनिया गांधी और उनके दामाद रॉबर्ट वाड्रा भी शामिल हैं। हालांकि उन्होंने इस बारे में अधिक जानकारी देने से इंकार करते हुए कहा था कि वह वाड्रा के खिलाफ सबूत जुटा रहे हैं। यह खबर अगले दिन कई अखबारों में छपी, लेकिन हिंदुस्तान टाइम्स ने किसी दबाव की वजह से इस खबर को अपनी वेबसाइट पर से उतार दिया।

स्वामी के मुताबिक, 2 जी मामले में चिदंबरम उतने ही दोषी हैं जितना ए राजा। इससे संबंधित दस्तावेजी साक्ष्य उन्होंने कोर्ट में जमा किए हैं। उन्होंने कहा कि उन्होंने जब भी इन भ्रष्ट लोगों का राजफाश करने की कोशिशें की, उनकी निष्ठा पर सवाल उठाए गए। 2 जी घोटाले में जब उन्होंने ए राजा का नाम लिया, तो दलित विरोधी कहा गया। इसी तरह जब कनीमोझी इस घोटाले में गिरफ्तार हुईं तो महिला विरोधी करार दे दिया गया। स्वामी ने कहा, ”मैंने दस्तावेजी सबूतों से अपने आरोपों को सच साबित कर दिखाया।”

डॉ. स्वामी ने कहा कि 2 जी लाइसेंस को नियमानुसार तीन वर्ष में नहीं बेचा जा सकता था, लेकिन कंपनियों ने 16 गुना ज्यादा दाम पर उनके शेयर बेचे हैं। वह 2 जी मामले में चिदंबरम की भूमिका की सीबीआई जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट गए हैं। स्वामी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में सीबीआई के चिदंबरम का बचाव करने के पीछे ठोस कारण हैं।

उन्होंने कहा कि सीबीआई का गृह मंत्रालय के अधीन नहीं होना महज शब्दों का हेर-फेर है। सीबीआई में जो आईपीएस अधिकारी होते हैं उनकी सीआर वहीं से लिखी जाती है इसलिए चिदंबरम पहले पद से हटें तभी निष्पक्ष जांच संभव है। उन्होंने कहा, भले ही मीडिया में 2जी मामले में मेमोरेंडम पर प्रणब तथा चिदंबरम के बीच चल रहे मामले को शांत बताकर चिदंबरम को बचाया जा रहा है, लेकिन वे बचने वाले नहीं है।

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.