/आजतक पर होगी ‘रसिया राज’ की वापसी? देबांग के वापस लौटने की संभावना

आजतक पर होगी ‘रसिया राज’ की वापसी? देबांग के वापस लौटने की संभावना

टीवी टुडे के अध्यक्ष अरुण पुरी के खबरों से दोबारा जुड़ने के सख्त निर्देश के बाद आजतक के न्यूज़ डायरेक्टर क़मर वहीद नक़वी पुराने लोगों को चैनल में वापस लाने की कवायद में जुट तो गए हैं, लेकिन लगता है अपनी इस कोशिश में वे उन आरोपों को नजरंदाज़ कर रहे हैं जिनकी वजह से उन मीडियाकर्मियों की विदाई हुई थी। अभी हाल ही में आउटपुट हेड के पद पर सुप्रिय प्रसाद की वापसी हुई है और अब देबांग के वापस लाए जाने की चर्चा जोरों पर है। गौरतलब है कि दोनों ही कभी आजतक का हिस्सा रह चुके हैं और देबांग पर उनकी रंगीन तबीयत के चलते कई संस्थानों से निकाले जाने के आरोप लग चुके हैं।

बताया जाता है कि स्टार न्यूज़ के मालिक अवीक सरकार ने देबांग को मैदान में उतारने की कई बार कोशिशें कीं, लेकिन वहां पहले से बढ़िया प्रदर्शन कर रहे दीपक चौरसिया की टीम ने साफ संकेत दे दिए कि एक म्यान में दो तलवारों को नहीं रखा जा सकता। उधर आजतक की लगातार गिरती टीआरपी ने चैनल प्रबंधन को अपनी टीम के पुर्गठन पर मजबूर कर दिया है।

देबांग ने आजतक को शुरुआती दौर में तब ही छोड़ दिया था जब वह दूरदर्शन पर एक बुलेटिन की शक्ल में प्रसारित होता था। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया की मशहूर कैरी पैकर की कंपनी चैनल 9 के साथ मिल कर डीडी-2(मेट्रो) पर लंबा टाइम स्लॉट लिया था, लेकिन यह योजना कुछ ही महीनों में फ्लॉप हो गई। फिर वे स्टार न्यूज़ के मर्डोक वर्ज़न से जुड़े और इसके बाद सीएनबीसी आवाज से। कई भाषाओं के जानकार कहे जाने वाले देबांग हालांकि प्रिंट में अंग्रेजी अखबारों – इंडियन एक्सप्रेस, इलस्ट्रेटेड वीकली आदि से जुड़े रहे हैं, लेकिन उनहें इलैक्ट्रॉनिक मीडिया में हिंदी से ही जोड़ा गया। वे एनडीटीवी इंडिया (हिन्दी) के चैनल हेड भी बने, लेकिन करीब डेढ़ साल बाद उनके अधिकार छीन लिए गए।

एनडीटीवी के उनके पूर्व सहयोगियों का कहना है कि देबांग पर यह कार्रवाई उनके खिलाफ़ लड़कियों की बेहिसाब शिकायतों और एसएमएस के तौर पर पेश किए गए सुबूतों के कारण हुई थी। बताया जाता है कि चैनल हेड पद से हटाए जाने के बावजूद वे कई महीने वहां इसीलिए टिके रहे कि कंपनी की नीतियों के तहत मिलने वाले शेयरों का लाभ ले सकें। पिछले साल जून से देबांग अवीक सरकार के स्वामित्व वाले स्टार न्यूज़ में बतौर कंसल्टेंट जुड़े हुए हैं।

अगर स्टार पत्रकारों के लिहाज़ से देखा जाए तो चोटी के खबरिया चैनलों में से आजतक की हालत सबसे खस्ता है। फिलहाल वहां कोई भी एंकर या पत्रकार ऐसा नहीं है जिसे गंभीर या विश्वसनीय स्टार माना जाता हो। चैनल में फिलहाल देबांग के समय के लोगों में से इक्के-दुक्के लोग ही हैं लेकिन सीईओ जी. कृष्णन की विदाई के बाद उनके चहेते शैलेश और एक-दो और लोगों के बारे में भी कयासों का दौर जारी है। हाल ही में वापस लाए गए सुप्रिय प्रसाद को बतौर एक्जिक्युटिव एडीटर – आउटपुट जोड़ा गया है। बटाया जाता है कि सु्प्रिय को भी पिछली बार उनके खिलाफ़ किसी महिला स्टाफ द्वारा लगआे गए गंभीर आरोपों के कारण ही विदा किया गया था।

देखना है कि अगर देबांग की वापसी होती है तो सुप्रिय से कितनी निभ पाएगी?

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.