/‘एअरहोस्टेस’ ने शराब पी तो मीडिया को मजा आया, लेकिन क्या पुलिस अधिकारी की थी शरारत?

‘एअरहोस्टेस’ ने शराब पी तो मीडिया को मजा आया, लेकिन क्या पुलिस अधिकारी की थी शरारत?

नीमा लूला : पुलिस ने बनाया एअरहोस्टेस

मुंबई में एक एयरलाइंस कर्मी शराब पीकर गाड़ी चलाती पकड़ी गई। जेट एअरवेज की इस कर्मचारी का नाम नीमा लूला है जो पकड़े जाने के बाद पुलिस से उलझने लगी, जैसा कि अमूमन आधुनिक महिलाएं करती हैं, लेकिन एक पुलिस अधिकारी ने मीडिया के जरिए उसे ऐसा बदनाम करवा दिया कि अब उसकी नौकरी पर बन आई है। बताया जा रहा है कि उस पुलिस अधिकारी से अब उसके सहकर्मी भी नाराज़ हैं कि उसने सभी की ‘कमाई’ पर पानी डलवा दिया।

 

 

नौकरी करने वाली रईसज़ादी?

दरअसल 4 तारीख को मलाड इलाके में ट्रैफिक पुलिस ने ड्रंकन ड्राइव अभियान के दौरान एक गाड़ी को रुकवाया। गाड़ी चला रही लड़की ने शराब पी रखी थी जो किसी पार्टी से आ रही थी। पुलिस ने उसके आते ही उस पर एक ऑटोरिक्शा को टक्कर मार कर भागने का आरोप मढ़ दिया। यह अलग बात रही कि कोई ऑटोवाला पुलिस की गवाही देने नहीं आया।

महिला ने पहले तो पुलिस को नशे में उलटा-सीधा कहा, फिर उसके साथी ने कुछ ले-दे कर मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की। अक्सर ऐसे मामले मौके पर ही निपटा लिए जाते हैं, लेकिन यहां एक अधिकारी ने गड़बड़ कर दी। बताते हं कि वास्तव में पुलिसवाले  दोनों को मोटी आसामी समझ कर थाने ले आए थे और वहां अच्छी सौदेबाजी होने की उम्मीद थी, लेकिन एक पुलिस अधिकारी ने  फोन कर कुछ मीडियावालों को बुला लिया।

 

पुलिसकर्मियों ने खींचे कपड़े

अब कैमरे आने के बाद सारा मामला ही पलट गया। पुलिस बिल्कुल राजा हरिशचंद्र की तरह ईमानदार बन गई और दोनों पर आरोपों की बरसात कर दी। बकौल पुलिस, नशे में धुत्त महिला ने थाने में हंगामा बरपा दिया। हालांकि ऐसा कुछ होता दिख नहीं रहा था। जब टीवी वालों ने नीता को घेर कर सवालों की झड़ी लगा दी तो बौखलाई एअरलाइंस कर्मी ने कैमरे पर हाथ दे मारा। लगभग सभी चैनलों और अखबारों ने इस मामले वही लिखा और प्रसारित किया जो पुलिस ने कहा। पुलिस ने यह भी कहा कि नीमा को जब गिरफ्तार कर बांगुर नगर पुलिस स्टेशन ले जाया जा रहा था तो उस दौरान भी उसने महिला पुलिसकर्मियों से हाथापाई की और उन्हें अंजाम भुगतने के लिए धमकाया भी।

 

बात का बतंगड़

पुलिस ने नीमा के साथ-साथ उसके दोस्त पर भी मुकद्दमा बना दिया। पुलिस का आरोप है कि उसने पुलिसवालों को पैसों का लालच देकर मामले को रफा दफा करने की कोशिश की। पुलिस ने मीडिया को बताया कि हंगामे के दौरान इन लोगों ने पुलिसवालों के सामने अपनी हेंकड़ी दिखाने की कोशिश की।

 

पुलिस ने नीमा की मामूली स्विफ्ट को ‘लक्ज़री कार’ बताया और साधारण शराब को महंगी वाइन की बरामदगी बताया। सबसे मज़ेदार बात यह रही कि नीमा जेट एअरवेज में सुपरवाइजर है लेकिन पुलिस ने उसे एअरहोस्टेस बता दिया। शायद अधिकारियों को भी पता था कि मामला जितना हाई-प्रोफाइल होगा, मीडिया उतना ही मजे लेकर उछालेगा। बांगुर नगर पुलिस ने इनके खिलाफ 110, 185 , 353 के तहत मामला दर्ज कर लिया। यह अलग बात रही कि बोरिवली कोर्ट से दोनों को आसानी से जमानत मिल गई।

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.