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‘एअरहोस्टेस’ ने शराब पी तो मीडिया को मजा आया, लेकिन क्या पुलिस अधिकारी की थी शरारत?

By   /  October 6, 2011  /  4 Comments

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नीमा लूला : पुलिस ने बनाया एअरहोस्टेस

मुंबई में एक एयरलाइंस कर्मी शराब पीकर गाड़ी चलाती पकड़ी गई। जेट एअरवेज की इस कर्मचारी का नाम नीमा लूला है जो पकड़े जाने के बाद पुलिस से उलझने लगी, जैसा कि अमूमन आधुनिक महिलाएं करती हैं, लेकिन एक पुलिस अधिकारी ने मीडिया के जरिए उसे ऐसा बदनाम करवा दिया कि अब उसकी नौकरी पर बन आई है। बताया जा रहा है कि उस पुलिस अधिकारी से अब उसके सहकर्मी भी नाराज़ हैं कि उसने सभी की ‘कमाई’ पर पानी डलवा दिया।

 

 

नौकरी करने वाली रईसज़ादी?

दरअसल 4 तारीख को मलाड इलाके में ट्रैफिक पुलिस ने ड्रंकन ड्राइव अभियान के दौरान एक गाड़ी को रुकवाया। गाड़ी चला रही लड़की ने शराब पी रखी थी जो किसी पार्टी से आ रही थी। पुलिस ने उसके आते ही उस पर एक ऑटोरिक्शा को टक्कर मार कर भागने का आरोप मढ़ दिया। यह अलग बात रही कि कोई ऑटोवाला पुलिस की गवाही देने नहीं आया।

महिला ने पहले तो पुलिस को नशे में उलटा-सीधा कहा, फिर उसके साथी ने कुछ ले-दे कर मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की। अक्सर ऐसे मामले मौके पर ही निपटा लिए जाते हैं, लेकिन यहां एक अधिकारी ने गड़बड़ कर दी। बताते हं कि वास्तव में पुलिसवाले  दोनों को मोटी आसामी समझ कर थाने ले आए थे और वहां अच्छी सौदेबाजी होने की उम्मीद थी, लेकिन एक पुलिस अधिकारी ने  फोन कर कुछ मीडियावालों को बुला लिया।

 

पुलिसकर्मियों ने खींचे कपड़े

अब कैमरे आने के बाद सारा मामला ही पलट गया। पुलिस बिल्कुल राजा हरिशचंद्र की तरह ईमानदार बन गई और दोनों पर आरोपों की बरसात कर दी। बकौल पुलिस, नशे में धुत्त महिला ने थाने में हंगामा बरपा दिया। हालांकि ऐसा कुछ होता दिख नहीं रहा था। जब टीवी वालों ने नीता को घेर कर सवालों की झड़ी लगा दी तो बौखलाई एअरलाइंस कर्मी ने कैमरे पर हाथ दे मारा। लगभग सभी चैनलों और अखबारों ने इस मामले वही लिखा और प्रसारित किया जो पुलिस ने कहा। पुलिस ने यह भी कहा कि नीमा को जब गिरफ्तार कर बांगुर नगर पुलिस स्टेशन ले जाया जा रहा था तो उस दौरान भी उसने महिला पुलिसकर्मियों से हाथापाई की और उन्हें अंजाम भुगतने के लिए धमकाया भी।

 

बात का बतंगड़

पुलिस ने नीमा के साथ-साथ उसके दोस्त पर भी मुकद्दमा बना दिया। पुलिस का आरोप है कि उसने पुलिसवालों को पैसों का लालच देकर मामले को रफा दफा करने की कोशिश की। पुलिस ने मीडिया को बताया कि हंगामे के दौरान इन लोगों ने पुलिसवालों के सामने अपनी हेंकड़ी दिखाने की कोशिश की।

 

पुलिस ने नीमा की मामूली स्विफ्ट को ‘लक्ज़री कार’ बताया और साधारण शराब को महंगी वाइन की बरामदगी बताया। सबसे मज़ेदार बात यह रही कि नीमा जेट एअरवेज में सुपरवाइजर है लेकिन पुलिस ने उसे एअरहोस्टेस बता दिया। शायद अधिकारियों को भी पता था कि मामला जितना हाई-प्रोफाइल होगा, मीडिया उतना ही मजे लेकर उछालेगा। बांगुर नगर पुलिस ने इनके खिलाफ 110, 185 , 353 के तहत मामला दर्ज कर लिया। यह अलग बात रही कि बोरिवली कोर्ट से दोनों को आसानी से जमानत मिल गई।

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

4 Comments

  1. Manohar says:

    दोनोंकी गलती एक जैसिही है. दोनोमे सुधर लाना समाजके लिए आवश्यक है….

  2. देखिये जनाब भारत में अब स्वछन्द अर्थशास्त्र का दौर चल रहा है. भारत की संस्कृति में बाजारवाद का पूरा असर आ चूका है. अब यदि कोई महिला जो अपने दम पर मोटी कमाई करके अपने तरीके से जीवन जीना चाहती है तो पता नहीं क्यूँ लोगों को बहुत तकलीफ हो जाती है? खासतौर से भारत की पुलिस को और भी तकलीफ हो जाती है, जिसका घिनौना चेहरा सभी भारतवासी अक्सर देखते और सुनते रहते हैं. आप सभी जानते है की मीडिया चाहे वो प्रिंट मीडिया हो या इलेक्ट्रोनिक मीडिया दोनों किसी भी लोकतंत्र के रक्षक होते हैं, लेकिन आप सभी लोगों को यह जान कर हैरानी होगी की भारत का मीडिया ही भक्षक की खतरनाक भूमिका में ही ज्यादातर समय ब्यस्त रहता है और अक्सर अपने फायदे के लिए तथ्यों को तोड़ मरोड़ कर अपने हिसाब से प्रस्तुत करता है. और वर्तमान मामले में भी पुलिस की घिनौनी भूमिका के साथ मीडिया के लोगों का नंगा नाच का उदहारण प्रस्तुत किया जाना पूर्णतया निंदनीय है. भरा की मीडिया ही है जो भारत के अन्दर लोकतंत्र को स्थापित होने में बहुत बड़ी बाधा है. इस भ्रष्ट, अनाचारी, दुराचारी, अनैतिक, मीडिया ने मारा है की भारत के लोकतंत्र का बेडा गर्क कर रखा है. इसका मुख्य कारन है की इसे वही मेरीट वाले लोग चला रहे हैं, जो भारतीय समाज और धर्म के भी ठेकेदार है. इस मीडिया के बारे में यदि व्हाइट पेपर जारी कर दिया जाये तो पूरी स्थिति और तस्वीर स्पष्ट हो जाएगी की किस तरह से ये मेरीट वाले लोग भारत के लोकतंत्र के साथ भद्दा मजाक कर रहे हैं.

  3. एअरहोस्टेस का खुले आम सिगरेट्स ,शराब पीकर अर्ध नंगन घूमना आज आम बात हो चली है हैं इनको पैसे भी जयादा मिलते है , साथ में साडी सुविधाए भी ………….

  4. जन्‍मजय सि‍न्‍हां says:

    पुलि‍स हर मामले मे अपनी ही कहानी सुनाती है जो सच नही होता

पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं. हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो. आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें - मॉडरेटर

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