/कौन सठियाया? 85 साल के ‘बाल’ और 74 साल के ‘बड़े भाई’ में छिड़ी नूराकुश्ती

कौन सठियाया? 85 साल के ‘बाल’ और 74 साल के ‘बड़े भाई’ में छिड़ी नूराकुश्ती

भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में दो ‘मराठा योद्धाओं’ को अब एक नया हथियार मिल गया है- उम्र का हथियार। एक योद्धा दूसरे को सठिया गया साबित करने में जुटा है तो दूसरा पहले को बचपना न करने की चेतावनी दे रहा है। दिलचस्प बात ये है कि दोनों की उम्र सत्तर से उपर है। 85 साल के ‘सठियाए’ राजनेता खुद को ‘बाल’ यानि बच्चा कहलाना पसंद करते हैं तो उनसे ग्यारह साल छोटे और ‘बचपना’ करने वाले 74 की उम्र में ही सबके ‘बड़े भाई’ यानि ‘अन्ना’ होने का दावा करते है। दोनों के समर्थकों को यह समझ में नहीं आ रहा कि किसे क्या मानें।

हज़ारे और ठाकरे : करप्शन पर एज फैक्टर हावी?

ये जुबानी जंग शुरु हुई शिवसेना की वार्षिक दशहरा रैली में, जब पार्टी सुप्रीमो बाल-ठाकरे ने अन्ना के आमरण अनशन पर तल्ख टिप्पणियां कर डालीं। ठाकरे ने कहा था, ”अण्णा के लिए मेरे मन में आदर है, लेकिन आंदोलन के नाम पर देश में एक महीने तक हंगामा मचा हुआ था। एक तरफ केजरीवाल तो दूसरी ओर बेदी के विचारों के बाण चल रहे थे। बाहर अनशन चल रहा था और भीतर उनके कार्यकर्ता जूस, समोसे और पुलाव खा रहे थे।”

शिवसेना प्रमुख ने आंदोलन की प्रकृति को खोखला करार देते हुए कहा, ”इस तरह भ्रष्टाचार खत्म नहीं हो सकता। ऐसे बिछाया हुआ तुम्हारा जाल फट जाएगा और बड़ी मछलियां निकल जाएंगी।”

इसके जवाब में तीखी प्रतिक्रिया देते हुए अन्ना ने शुक्रवार को कहा कि उम्र के कारण शिवसेना प्रमुख की बुद्धि में फर्क आ गया है। बढ़ती उम्र के कारण वे बेकार की बड़बड़ कर रहे हैं।

अब ताजा बयान में शिवसेना ने कहा है, ”अन्ना ने जो कहा हम उसका उपयुक्त जवाब दे सकते हैं, क्योंकि हम गांधीवादी नहीं हैं।” बाल ठाकरे की तरफ से शिवसेना सांसद संजय राउत ने बयान जारी किया जिसमें कहा गया है, ”चूंकि आपने मेरी बढ़ती उम्र का जिक्र किया, मैं आपसे कहना चाहता हूं कि आप मुझसे छोटे हैं और यह बचपना आपको शोभा नहीं देता।” ठाकरे ने हजारे को चेतावनी देते हुए कहा, ”हमसे अनावश्यक झगड़ा मत लीजिए।”

अन्ना हजारे पर निशाना साधते हुए ठाकरे ने कहा था कि गांधीवादी समाजिक कार्यकर्ता का अनशन फाइव स्टार कार्यक्रम के समान था। उन्होंने कहा था कि यह एक फाइव स्टार उपवास था भ्रष्टाचार के मुददे को हंसी-मजाक का विषय मत बनाइए।
बाल ठाकरे ने नई दिल्ली के रामलीला मैदान में अनशन स्थल पर 35000 लोगों के लिए भोजन सहित भारी इंतजामों का भी हवाला दिया था।

इस पर प्रतिक्रिया देते हुए हजारे ने रालेगण सिद्धी में संवाददाताओं से कहा कि उन्हें जो सही लगता है वह कहें। हमें जो सही लगता है वह हम करेंगे। हजारे ने कहा कि अपमान सहन करने की शक्ति होनी चाहिए। इससे पहले शिवसेना ने हजारे के आंदोलन को अपना समर्थन दिया था और ठाकरे के पोते आदित्य ने अनशन के दौरान हजारे से मुलाकात भी की थी।

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.