/आखिर क्या हुआ जो एक हसीना का बदन कोड़ों से छलनी करने का फ़रमान सुना दिया अदालत ने?

आखिर क्या हुआ जो एक हसीना का बदन कोड़ों से छलनी करने का फ़रमान सुना दिया अदालत ने?

ईरान की एक अभिनेत्री को एक फ़िल्म में काम करने के लिए एक साल की जेल और 90 कोड़ों की सज़ा सुनाई गई है। इस फिल्म में ईरानी अधिकारियों की आलोचना की गई है। ईरान के विपक्षी दलों की एक वेबसाइट के मुताबिक मर्ज़िया वफ़ामेहर नाम की इस अभिनेत्री को शनिवार को सज़ा दी गई थी मगर उनके ख़िलाफ़ आरोप सार्वजनिक नहीं किए गए थे। दुनिया भर की फिल्म इंडस्ट्रियों में इस खबर के बाद सनसनी फैल गई है और इसके कारणों पर चर्चा जारी है।

 

करीब तीन साल पहले बनी फिल्म ‘माई तेहरान फॉर सेल’ ईरानी जीवन के कई अनजाने पहलुओं से दुनिया को परिचित कराने का एक झरोखा माना जाता है।इस फिल्म को 2009 में ‘इंडिपेन्डेन्ट स्पिरिट इनसाइड फिल्म अवार्ड’ और पिछले साल ट्राइमेडिया फिल्म महोत्सव में सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म के लिए ज्यूरी अवार्ड प्रदान किया गया था। ईरानी मूल की ऑस्ट्रेलियाई निर्देशक ग्रैनाज मौसावी की यह फिल्म तेहरान में रह रही एक युवा अभिनेत्री की कहानी है जिसके रंगमंच में काम करने पर प्रशासन प्रतिबंध लगा देता है। तेहरान में शूट की गई यह फिल्म 2009 में एडीलेड फिल्म महोत्सव में दिखाई गई थी।

 

फिल्म में मर्ज़िया बिना हिजाब के नजर आती है और उन्होंने सर भी मुंडाया हुआ है। ईरान के रूढ़िवादियों ने फिल्म की जम कर आलोचना की थी जिसके बाद जुलाई में तेहरान में अभिनेत्री को गिरफ्तार कर लिया गया। ईरानी सेंसर बोर्ड ने फ़िल्म की स्क्रिप्ट पढ़ने के बाद उसे बनाने की इजाज़त तो दी थी लेकिन उसे वहां रिलीज़ करने की अनुमति नहीं दी। ये फ़िल्म यूट्यूब वेबसाइट और अनाधिकारिक तौर पर डीवीडी के रूप में उपलब्ध है। एक ईरानी महिला लेखिका ग्रानाज़ मूसावी इस फ़िल्म की डायेक्टर तथा राइटर हैं।

 

 

ये फ़िल्म एक डॉक्यूमेंट्री की तरह है जिसमें एक युवा ईरानी अभिनेत्री के जीवन के बारे में दिखाया गया है। ये किरदार मर्ज़िया ने खुद अपने नाम से निभाया है। डॉक्यूमेंट्री के मुताबिक फ़िल्म में ये अभिनेत्री जिस तरह की भूमिकाएँ करना चाहती है, ईरानी अधिकारियों ने उस तरह की भूमिकाओं पर रोक लगा रखी है।

 

फ़िल्म में ईरानी जीवन का एक ऐसा पहलू दिखाया गया है जिसे आम तौर पर लोग नहीं जानते, जहाँ युवा छुप कर आयोजित हो रही पार्टियों में शामिल होते हैं और अपने दिल के अरमान पूरे करते हैं। मर्ज़िया के साथ इस फ़िल्म के निर्माण में लगे कई और लोगों को भी हिरासत में लिया गया था, लेकिन पूछताछ के बाद उन्हें रिहा कर दिया गया। मर्जिया के पति ईरान के जाने-माने निर्देशक हैं। उनके और कई अन्य सुधारवादी वेबसाइटों के अनुसार मर्ज़िया को संभवतः इसलिए सज़ा दी गई है क्योंकि उन्होंने फ़िल्म में सिर मुंडा रखा है और सिर को इस्लामी परंपरा के मुताबिक़ चादर से ढँका भी नहीं है। फिल्म में कई जगह मर्जिया सिगरेट पीती भी दिखीं हैं।

हालांकि मर्ज़िया को ईरान में अभिनेत्री के तौर पर नहीं जाना जाता है और गिरफ़्तारी से पहले उन्हें लोग ज़्यादा नहीं जानते थे मगर अब वह उन प्रमुख कलाकारों और फ़िल्मकारों में शामिल हो गई हैं जिनका काम कट्टरपंथी नेताओं की ओर से लागू किए गए धार्मिक कोड और व्यवहार के दिशानिर्देशों को चुनौती देता है।

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.