/”बिना मर्दों के रहना भी मुश्किल, लेकिन नहीं होती उनकी कोई इज्ज़त”: प्रियंका चोपड़ा; वीडियो देखें

”बिना मर्दों के रहना भी मुश्किल, लेकिन नहीं होती उनकी कोई इज्ज़त”: प्रियंका चोपड़ा; वीडियो देखें

हाल ही में बॉलीवुड की सबसे अच्छे कपड़े पहनने वाली अभिनेत्री का खिताब जीत चुकी प्रियंका चोपड़ा ज़ुमलों की नंगई पर उतर आईं हैं। उन्होंने मुंबई में हुए एक आयोजन के बाद पत्रकारों से बातचीत में कह डाला कि मर्द ‘इज्ज़तदार’ नहीं होते।

27 वर्षीया प्रियंका चोपड़ा फिल्म इंडस्ट्री में किसी परिचय की मोहताज़ नहीं हैं। सन् 2000 में मिस वर्ल्ड चुने जाने के बाद दक्षिण भारतीय फिल्मों के जरिए बॉलीवुड में एंट्री मारने वाली प्रियंका अब तक करीब 40 फिल्मों में काम कर चुकी हैं। वे एक बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और तीन बार फिल्मफेयर अवार्ड भी जीत चुकी हैं। जमशेदपुर (अब झारखंड) में जन्मी और बरेली में पली-बढ़ी इस खूबसूरत बाला का नाम अब तक कई मर्दों के साथ जुड़ चुका है, लेकिन फिलहाल वे अकेली हैं।

इस साल तीन फिल्में दे चुकी प्रियंका की अगले साल चार फिल्में आने को तैयार हैं और उन्हें बॉलीवुड के सबसे व्यस्त कलाकारों में से माना जाता है। हाल ही में उन्होंने अपने ताजा बयान में यह कह कर सब को चौंका दिया है कि वे अब आराम करने के मूड में हैं।

मर्दों को ‘बिना इज्ज़त का’ बताने वाला बयान उन्होंने मैक्ज़िम पत्रिका के कवर पर ‘हॉटेस्ट गर्ल’ के तौर पर जगह बनाने के बाद दिया है। जब एक पत्रकार ने उनसे पूछा कि उन्हें मर्दों की पत्रिका में कवर गर्ल बनने का सम्मान प्राप्त कर कैसा लग रहा है, तो उन्होंने तपाक से उल्टा सवाल दागा, ”पुरुष कब से ‘सम्मानीय’ होने लगे?” हालांकि औरतों के मर्दों के साथ रिश्ते को उन्होंने अजीब करार दिया और कहा कि वे पुरुषों के साथ भी नहीं रह सकतीं, उनके बगैर भी नहीं रह सकतीं।

देखें वीडियो

http://www.youtube.com/watch?v=6NGpdFaIJQU&feature=relmfu

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.