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हिसार में बिश्नोई की जीत, चौटाला को बढ़त: ‘जन लोकपाली’ नस्ल का ‘अन्ना ब्रांड’ कठघरे में!

By   /  October 17, 2011  /  2 Comments

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 -सतीश चन्द्र मिश्र।।
सबको पता था, सबको खबर थी, सब जानते थे कि, 2009 के चुनाव में अपने पक्ष में चली प्रचंड लहर के बावजूद कांग्रेस हरियाणा के हिसार में तीसरे नम्बर पर थी. इस बार भी वहां वह तीसरे नम्बर पर ही रही, और 2009 की तुलना में उसको लगभग 55,000 वोट कम मिले. यानी पहली बात तो ये कि, अन्ना टीम के ही दावे को यदि सच मान लिया जाए तो भी वो कांग्रेस के केवल 25% मतदाताओं को प्रभावित कर सकी.

अब दूसरा तथ्य यह कि ये कोई 100-200 साल पुरानी बात नहीं है, इसी साल 5 अप्रैल को अन्ना टीम ने जन्तर-मन्तर पर जब अपना “जन लोकपाली” मजमा लगाया था तब भारतीय राजनीति के सर्वाधिक कुख्यात “भ्रष्टाचार शिरोमणियों” में से एक के रूप में पहचाने जाने वाले ओमप्रकश चौटाला भी उस मजमे की शोभा बढ़ाने पहुंचे थे. तब इसी अन्ना टीम ने चौटाला को भ्रष्टाचारी करार देते हुए गाली-गलौज के साथ धक्के मार कर अपमानजनक तरीके से जन्तर-मन्तर से खदेड़़ा था. उल्लेखनीय है कि अजय चौटाला के “स्टार प्रचारक” उनके पिताश्री ओमप्रकाश चौटाला ही थे, तथा उन्हीं ओमप्रकाश चौटाला के सुपुत्र अजय चौटाला को पिछली बार की तुलना में इस बार हिसार में एक लाख वोट ज्यादा मिले हैं. याद यह भी दिलाना प्रासंगिक होगा कि नब्बे के दशक की शुरुआत में ही खुद अजय चौटाला ने लोकतंत्र की खूनी लूट(बूथ कैप्चरिंग ) का वो नृशंस इतिहास रचा था जिसे आज भी “मेहम काण्ड” के नाम से याद किया जाता है. इन घृणित सच्चाइयों के बावजूद हिसार में वास्तविक जीत अजय चौटाला की ही हुई है. क्योंकि 2009 में जब भजनलाल विजयी हुए थे तब भाजपा ने उनके खिलाफ अपना प्रत्याशी उतारा था, जबकि इस बार भाजपा औपचारिक रूप से अपनी पूरी शक्ति के साथ कुलदीप बिश्नोई का समर्थन कर उनकी जीत के लिए प्रयासरत थी.

अतः कम से कम कोई भयंकर मूर्ख या राजनीतिक रूप से अशिक्षित व्यक्ति भी यह तो नहीं ही मानेगा कि “जन लोकपाली” नस्ल का “अन्ना ब्रांड” तथाकथित ईमानदार मतदाता अजय चौटाला को ही मत देने के लिए विवश था, और यदि ऐसा हुआ है तो कम से कम टीम अन्ना को अपने इस प्रकार के “जन लोकपाली” नस्ल के “अन्ना ब्रांड” समर्थकों की सैद्धांतिक गुणवत्ता और वैचारिक क्षमता पर गंभीरता से पुनर्विचार करना चाहिए, क्योंकि उसके “जन लोकपाली” नस्ल के “अन्ना ब्रांड” समर्थकों के पास 38 और विकल्प थे तथा साथ ही साथ अन्ना और अन्ना की पूरी टीम का सर्वाधिक प्रिय विकल्प “किसी को वोट नहीं देना” तो उसके पास था ही.

हिसार उपचुनाव से सम्बन्धित उपरोक्त तथ्यों-तर्कों के अतिरिक्त टीम अन्ना के हवाई दावों की धज्जियाँ हिसार लोकसभा चुनाव के परिणाम के साथ ही आये तीन विधानसभा सीटों के लिए हुए उपचुनावों के परिणामों ने उडायी है.

महाराष्ट्र की खड़कवासला सीट के लिए हुए उपचुनाव में शरद पवार की एनसीपी के टिकट पर चुनाव मैदान में उतरी कांग्रेस-एनसीपी की उस संयुक्त उम्मीदवार हर्षदा वन्जाले को हार का मुंह देखना पड़ा जो इस सीट से विधायक रहे एमएनएस के दिवंगत विधायक रमेश वन्जाले की विधवा भी हैं.तथा जिन्हें अन्ना के “लाडले” राज ठाकरे की सहानुभूति भी प्राप्त थी.हर्षदा वन्जाले को भाजपा-शिवसेना गठबंधन के संयुक्त भाजपा प्रत्याशी भीमराव ताप्कीर ने 3600 से अधिक मतों से पराजित किया. केन्द्रीय कृषि मंत्री शरद पवार ने यहाँ अपनी प्रतिष्ठा दांव पर लगा रखी थी उनके भतीजे तथा महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री अजीत पवार एवं उनकी सुपुत्री, सांसद सुप्रिया सुले पूरे चुनाव के दौरान खडकवासला में ही डेरा डाले रहे थे.

सबसे रोचक तथ्य यह है कि खड़कवासला विधानसभा क्षेत्र एक अन्य कुख्यात “भ्रष्टाचार शिरोमणी” कांग्रेसी सांसद सुरेश कलमाडी के लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र का ही हिस्सा है. इसके बावजूद अन्ना हजारे या उनकी टीम ने कांग्रेस -एन सी पी गठबंधन की प्रत्याशी के खिलाफ, उनको हराने की कोई अपील नहीं की थी. जबकि अन्ना के गाँव से केवल लगभग 150 KM की दूरी पर ये चुनाव हो रहा था. दरअसल वहाँ हर व्यक्ति ये मान रहा था की हर्षदा वन्जाले की विजय निश्चित है इसीलिए अन्ना और टीम अन्ना अपनी पोल खुलने के भय से खडकवासला उप चुनाव के संदर्भ में शातिर चुप्पी साधे हुए थे.

सिर्फ खड्गवासला में ही नहीं बल्कि बिहार की दरौंदा विधानसभा सीट पर एनडीए की जद (यू) प्रत्याशी ने राजद प्रत्याशी को 20,000 से अधिक मतों से धूल चटायी कांग्रेस के प्रत्याशी का पता ही नहीं चला. वहीं आन्ध्र प्रदेश की बांसवाडा विधानसभा सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी को तेलंगाना राष्ट्र समिति के प्रत्याशी ने लगभग 50,000 मतों के अंतर से रौंदा.

ध्यान रहे कि इन सभी विधानसभा उपचुनावों में अन्ना या अन्ना टीम नाम की कोई चिड़िया भी कहीं चर्चा में नहीं थी. इसके बावजूद सभी स्थानों पर कांग्रेस का सूपड़ा साफ़ हो गया. फिर हिसार का सेहरा टीम अन्ना अपने सर पर खुद बाँधने की बेशर्म कोशिशें क्यों कर रही है…?

दरअसल आज आये इन सभी उपचुनावों के परिणामों में कांग्रेस को मिली यह करारी शिकस्त 2G में 1.76 लाख करोड़ की सनसनी खेज शर्मनाक सरकारी लूट, CWG में 70 हज़ार करोड़ की शर्मनाक सरकारी लूट, 400 लाख करोड़ के कालेधन पर पर्दा डालने की सरकारी करतूत, 30 हज़ार करोड़ के KG बेसिन घोटाले की लूट, डिफेन्स डील में हुई 9000 करोड़ की सरकारी लूट, एक लाख करोड़ की कीमत वाले इसरो-देवास सौदे को केवल 1200 करोड़ में करने की सरकारी कोशिशों की करतूत, 5000 करोड़ की गोर्शकोव डील में हुई सरकारी लूट. 6000 करोड़ की आणविक ईंधन डील में हुआ घोटाला.और ऐसे ही अनगिनत सरकारी कुकर्मों, आतंकवाद, महंगाई, भय, भूख सरीखी जानलेवा समस्याओं सरीखे सरकारी पापों के जवाब में जनता द्वारा केंद्र में सत्ताधारी दल के मुंह पर मारे गए जबर्दस्त चांटे के समान है.

इस प्रचंड जनाक्रोश को कुछ “जोकर” अपने “जोकपाल” की विजय बता कर उस जनाक्रोश का अपमान कर रहे हैं जिसका शिकार इन जोकरों के दो साथी अहमदाबाद और हाल ही में नयी दिल्ली में बन चुके हैं.

सतीश चंद्र मिश्रा एक जाने माने पत्रकार हैं। उनसे [email protected] पर संपर्क किया जा सकता है।

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

2 Comments

  1. DFJ Kumar says:

    ये टीम अन्ना समाजसेवकों की टीम नहीं है, बल्कि सस्ती लोकप्रियता की प्यास में भटक रहे उन सड़कछाप नेताओं सरीखे नकली समाजसेवकों का जमघट है जो अपने मुंह मियां मिट्ठू बनकर हर बात का श्रेय खुद लूटना चाहते हैं दिर इसके लिए इन लोगों को कोई भी नीच से नीच हथकंडा अपनाने से भी कोई परहेज़ नहीं है.

  2. SURESH KUMAR says:

    आपके विचारो से तो ऐसा लग रहा है कि इमानदारी कि कोई जगह ही नहीं बची है क्या भ्रष्टाचार ही सही है

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