/चंपारण के टीचर सुशील ने किया बिहार का नाम रौशन, KBC में जीते पांच करोड़

चंपारण के टीचर सुशील ने किया बिहार का नाम रौशन, KBC में जीते पांच करोड़

‘कौन बनेगा करोड़पति’ (केबीसी) के पांचवें संस्करण में बिहार के सुशील कुमार ने पांच करोड़ रुपये का इनाम जीता है। वह केबीसी-5 में निर्धारित सर्वाधिक इनाम जीतने वाले पहले प्रतिभागी हैं। पेशे से कम्प्यूटर ऑपरेटर और शिक्षक सुशील कुमार की आय प्रतिमाह 6,000 रुपये है। यह कड़ी दो नवम्बर को प्रसारित होगी।

हाथ लगा जैकपॉट : केबीसी जीतकर प्रसन्नचित्त सुशील

गौरतलब है कि केबीसी के पहले संस्करण में मुंबई के हर्षवर्धन नवाठे ने एक करोड़ रुपये का इनाम जीता था। 2004 में झारखंड के राहत तस्लीम ने भी 1 करोड़ रुपये का इनाम जीता था।

चंपारण में सुशील के घर पर बधाइयों का तांता लगा है। उसकी पत्नी तो उसके साथ मुंबई में है, लेकिन उसकी मां रेणु देवी और चारों भाई सुनील, अनिल, सुधीर और सुजीत उर्फ बिट्टू की खुशी का ठिकाना नहीं है। किराए के मकान में रहने वाला सुशील का परिवार रातोंरात पूरे इलाके में चर्चा का केंद्र बन गया है। उसके घर पर पत्रकारों और फोटॉग्राफरों की भी भीड़ लग गई है।

घरवाले बताते हैं कि सुशील की इच्छा यूपीएससी की परीक्षा में बैठने की थी, लेकिन गरीबी के कारण पढ़ाई पूरी नहीं कर सका। घर का खर्च चलाने के लिए पश्चिम चंपारण के चनपटिया प्रखंड में मनरेगा कार्यालय में कम्प्यूटर ऑपरेटर की नौकरी करने लगे। 5 भाइयों में सुशील तीसरे नंबर पर है।

नेपाल के वीरगंज में एक व्यवसायी के यहां मुशी का काम कर बेटों को पिता अमरनाथ प्रसाद और माता रेणु देवी ने गरीबी और मुफलिसी में किसी तरह पाल-पोस कर बड़ा किया। अभी तक किसी बेटे ने कोई बड़ी उपलब्धि हासिल नहीं की। सुशील शुरू से ही मेधावी व एकाग्रचित व्यक्तित्व का था। वह यूपीएससी की पढ़ाई कर समाज सेवा करने की इच्छा रखता था। परन्तु पैसों की कमी आड़े आई और बीच में ही पढ़ाई छोडऩी पड़ी । 22 मई 2011 को उनकी शादी मोतिहारी के भवानीपुर जिरात में सीमा कुमारी के साथ हुई।

घरवालों का कहना है कि शादी के बाद सीमा घर में लक्ष्मी बनकर आई और दीवाली की पूर्व संध्या पर उनका परिवार खाकपति से करोड़पति बन गया। शादी के बाद भी सुशील पढ़ाई में मन लगाता था और मई के अंतिम सप्ताह में उन्होंने केबीसी के लिए पूछे गये सवालों के सही जबाब दिए, जिसके बाद उनका चयन हो गया। जुलाई में पटना में इंटरव्यू हुआ फिर 16 अक्तूबर को अचानक केबीसी से सुशील के मोबाईल पर फोन आया और कहा गया कि उनका चयन केबीसी के लिये कर लिया गया है।

इसके बाद सुशील के मोतिहारी स्थित घर पर केबीसी के कुछ लोग शूटिंग करने पहुंचे। 19 अक्तूबर को सुशील को प्लेन के दो टिकट उपलब्ध करा दिए गए, जिनसे वे अपनी पत्नी सीमा के साथ मुंबई पहुँच गए। 22 अक्तूबर को केबीसी के हॉटशीट पर बैठकर सुशील सदी के महानायक अमिताभ बच्चन के सवालों का जबाब धड़ल्ले से देते गए और कुछ ही पलों में 5 करोड़ रूपये की बड़ी रकम जीत ली।

चंपारण में सुशील के बड़े भाई सुनील गैस मैकेनिक का काम करते हैं। उन्होंने बताया कि मीडिया के माध्यम से ही उसे पता चला कि उनका उनके भाई ने इतनी बड़ी रकम जीत ली है। उनके परिवार ने सपने में भी नहीं सोचा था कि एकाएक वे लोग खाकपति से करोड़पति बन जाएंगे। सुनील के मुताबिक संयुक्त परिवार होने के बावजूद परिवार के कुछ सदस्य किराए के मकान में रहते हैं क्योंकि दादा का बनवाया हुआ हनुमान गढ़ी मुहल्ले में एक छोटा सा ही घर है।

सुनील, अनिल, सुशील, सुधीर व सुजीत उर्फ बिट्टू पांच बेटों को पाल-पोस कर बुढ़ापे की लाठी का सहारा बनने की इच्छा पाले हुए माता रेणु देवी को जब खबर मिली कि उनके बेटा सुशील ने पांच करोड़ रुपये जीत लिया है तो उनकी आंखों में खुशी के आसूं छलक आए और वे अपनी गरीबी भरी जिन्दगी की कहानी सुनाने लगी।

दीपावली पर सुशील के लिए घर आना संभव नहीं हो पाएगा क्योंकि केबीसी के नियमानुसार जैकपॉट विजेता को प्रसारण से पहले बाहर जाने नहीं दिया जाता है। वहां कुछ औपचारिकताएं पूरी करनी हैं। अब उनका पूरा परिवार मुंबई जा रहा है। परिवारवालों की यह पहली हवाई यात्रा होगी। हर किसी की जुबान पर एक ही शब्द हैं-  केबीसी में पांच करोड़ जीतकर सुशील ने चंपारण ही नहीं पूरे बिहार का नाम रौशन किया है।

(पोस्ट मोतिहारी से एक पत्रकार द्वारा भेजे मेल पर आधारित)

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.