Loading...
You are here:  Home  >  मीडिया  >  Current Article

किसने बनाई ट्विटर पर फर्ज़ी आई-डी और अमिताभ ने क्यों नहीं की पुलिस में शिकायत?

By   /  October 29, 2011  /  1 Comment

    Print       Email
इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..

रा-वन की शुरुआती नाकामी ने दिखा दिया कि शाहरुख चाहे लाख तिकड़म भिड़ा लें, पब्लिक को मूर्ख बनाना आसान काम नहीं है। अमिताभ तो बहुत दूर की कौड़ी हैं, वे सलमान की भी बराबरी में नहीं ठहर पाए हैं।”

रजनीकांत की फिल्म रोबोट की तर्ज़ पर बनी फिल्म रा.वन में कुछ नयापन नहीं है और शाहरुख अपने अभिनय में भी कुछ नया नहीं कर पाए हैं। इसके बावजूद वे अपनी फिल्म के प्रमोशन के लिए साउथ के उस करिश्माई अभिनेता के साथ तस्वीर खिंचवाने में कामयाब हो गए। दक्षिण में किसी उत्तर भारतीय अभिनेता की नकली फिल्म असल के मुकाबले कितनी कामयाब रहेगी इसकी कल्पना आसानी से की जा सकती है।

हिंदी भाषी उत्तर भारत के दर्शकों की पसंद थोड़ी अलग है और यहां फैंटेसी ज्यादा नहीं चल पाती। यही वजह थी कि साउथ की सुपर-डुपर हिट रोबोट भी यहां कोई खास झंडे नहीं गाड़ पाई। ऐसे में शाहरुख ने सभी दिग्गजों से अपनी फिल्म के बारे में टिप्पणी करवाने का फॉर्मूला अख्तियार किया। सभी ने या तो किसी टीवी शो में या किसी समारोह में कुछ न कुछ तारीफ कर ही दी, लेकिन सदी के महानायक अमिताभ की टिप्पणी नहीं मिल पाई।

बताया जाता है कि शाहरुख के मीडिया प्लैनरों ने अमिताभ को कई बार संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन वे मौके की नज़ाकत को भांपते हुए किनारा कर गए। अमिताभ पहले ही अपनी इमेज़ को लेकर सावधान हैं क्योंकि शाहरुख उनके कदमों के निशानों को मिटाने की नाकाम कोशिश करते रहे हैं। चाहे कभी अलविदा ना कहना हो या ‘डॉन’, शाहरुख ने कई बार अमिताभ और  उनके कुनबे को नीचा दिखाने या उनकी पहचान मिटाने की कोशिश या साजिश की है। यह अलग बात रही कि दर्शकों ने उनके इन कदमों को सिरे से नकार दिया।

जब कभी अलविदा ना कहना के स्टार चुने गए तब रानी मुखर्ज़ी और अभिषेक बच्चन के संबंधों की चर्चा जोरों पर थी। फिल्म में भी दोनों की शादी भी दिखाई गई, लेकिन शाहरुख के परम मित्र और फिल्म के निर्माता-निर्देशक करण जौहर की कहानी में रानी के अनैतिक संबंध और बेडरूम सीन शाहरुख के साथ रहे। बाद में अभिषेक की शादी ऐश्वर्या रॉय से हुई जो कभी पर्दे पर शाहरुख के बहन का किरदार निभा चुकी थी।

यहां ध्यान देने वाली बात यह भी है कि जिस दिन अजय देवगण की शादी हुई थी उसके अगले दिन लगभग सभी अखबारों में शाहरुख के बाहों में काजोल की तस्वीर प्रकाशित हुई थी जो एक अवार्ड फंक्शन के दौरान ली गई थी।

बताया जाता है कि ऐसे ‘शरारती’ शाहरुख की टीम को जब रा.वन जैसी औसत फिल्म पर अमिताभ बच्चन की कोई प्रतिक्रिया नहीं मिल पाई तो उसने एक ऐसी चाल चली जिस पर प्रतिक्रिया मिलनी जरूरी थी। मीडिया विश्लेषकों का कहना है कि फर्ज़ी आई-डी से रा.वन के खिलाफ टिप्पणी करना भी इसी चाल का हिस्सा थी। हालांकि बाजीगर की बाजीगरी काम न आई और शहंशाह ने बड़ी ही समझदारी से इस विवाद से किनारा भी कर लिया।

अमिताभ बच्चन ने अपनी असली आई-डी पर नकली आई-डी और उसकी टिप्पणी का जिक्र तो किया लेकिन यह नहीं कहा कि फिल्म के बारे में उनके विचार गलत हैं या सही। अमिताभ के ट्विटर पर किए गए ट्वीट के मुताबिक उन्होंने अभी यह फिल्म देखी ही नहीं है, तो इस पर प्रतिक्रिया देने का सवाल ही नहीं उठता। अमिताभ चाहते तो इस मामले की शिकायत कर सकते थे, लेकिन सूत्रों का कहना है कि उन्होंने इस मामले को इसलिए तूल नहीं दिया कि इससे शाहरुख को ही फायदा पहुंचता।

बहरहाल, फिल्म विश्लेषकों के मुताबिक रा.वन एक नए दौर की नई फिल्म है जिसके कथानक का सामाजिक वास्तविकताओं से  कुछ भी लेना-देना नहीं है। एक अति काल्पनिक फैंटेसी के कलात्मक ढांचे में रा.वन बनाई गई है। इस फैंटेसी में स्क्रीन पर जो घटनाएं घटती हैं, उनमें तर्क काम नहीं करता। गीत और संगीत बेहद सामान्य है। गीत, धुनों के बीच शब्दों की खाना पूर्ति लगते हैं।

अगर शुरुआती दिन के व्यवसाय पर ध्यान दिया जाए तो हाल में बिना किसी तिकड़म के प्रचारित फिल्म बॉडीगार्ड ने इससे कहीं बेहतर व्यवयाय किया है। पहले दिन रा.वन सिर्फ 18 करोड़ उगाह पाई जबकि बॉडीगार्ड ने दिवाली ओपेनिंग न होने के बावजूद पहले दिन 25 करोड़ का व्यापार किया था। हालांकि रा.वन के दूसरे दिन के व्यापार में रिकॉर्ड बनने की बात की जा रही है, लेकिन फिल्म इंडस्ट्री के जानकारों का कहना है कि यह टीम शाहरुख द्वारा की गई आंकड़ों की बाजीगरी भर है।

 

Facebook Comments

इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..
    Print       Email

About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

1 Comment

  1. s s bhati says:

    शाहरुख तो कभी कभी घटिया हरकत करने का आदी है वो पागल है घटिया हीरो जैसी हरकत करता है

पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं. हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो. आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें - मॉडरेटर

You might also like...

राजस्थान के पत्रकार सरकार के समक्ष घुटने टेकने पर विवश हैं..

Read More →
Page Reader Press Enter to Read Page Content Out Loud Press Enter to Pause or Restart Reading Page Content Out Loud Press Enter to Stop Reading Page Content Out Loud Screen Reader Support
%d bloggers like this: