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नीरा राडिया ने पीआर बिजनेस से किया तौबा, लेकिन पुराने अकाउंट पर जारी रहेगा काम

By   /  October 30, 2011  /  No Comments

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2जी घोटाले में टाटा और अंबानी का साथ देने के लिए चर्चित हुई कॉरपोरेट लॉबिस्ट नीरा राडिया की कंपनी वैष्णवी ग्रुप अब पब्लिक रिलेशन और मीडिया कंसल्टेंसी का काम नहीं करेगी। नीरा ने ये ऐलान करते हुए इसके पीछे निजी वजह बताई है। नीरा का नाम 2-जी घोटाले में हुई फोन टैपिंग में आया था।

हालांकि टाटा ग्रुप और रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसे दिग्गज कॉरपोरेट क्लाइंट्स के लिये पब्लिक रिलेशन कन्सल्टेंसी देने वाली कंपनी वैष्णवी ग्रुप फिलहाल पर्ल्स ग्रुप और कई बदनाम कंपनियों के लिए काम कर रही है, लेकिन इसकी प्रमोटर नीरा राडिया ने अचानक इस कारोबार को छोड़ने का फैसला किया है। नीरा के मुताबिक अब उनकी फर्म किसी क्लाइंट के साथ नया करार नहीं करेगी।

कीनिया में जन्मी और लंदन में पली-बढ़ी नीरा पिछले कुछ समय से 2जी स्पैक्ट्रम आवंटन से जुड़े विवाद को लेकर खबरों में थी और उनकी बातचीत के टेप लीक होने के बाद मामले ने ज्यादा तूल पकड़ लिया था। हालांकि उनके खिलाफ कोई चार्जशीट नहीं है, लेकिन सीबीआई ने उन्हें भी एक गवाह बनाया है। चर्चा में आने के बाद पिछले साल उन पर एक फिल्म बनाने की भी बात उठी थी, लेकिन शुरुआती घोषणा के बाद यह योजना ठंढे बस्ते में चली गई।

एजेंसी की खबरों के मुताबिक नीरा ने काम बंद करने के पीछे वजह पारिवारिक जिम्मेदारी और सेहत बताई है। नीरा के मुताबिक उन्हें इस फैसले का दुख है, लेकिन फैसला सोच समझकर किया गया है. इस फैसले से कॉरपोरेट जगत में हलचलें तेज हो गई हैं।

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  • Published: 7 years ago on October 30, 2011
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  • Last Modified: October 30, 2011 @ 8:50 pm
  • Filed Under: मीडिया

About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

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