/राखी सावंत पहुंचेंगी अन्ना हज़ारे की अदालत, दिखाएंगी अश्लील गाने और मांगेंगी इंसाफ

राखी सावंत पहुंचेंगी अन्ना हज़ारे की अदालत, दिखाएंगी अश्लील गाने और मांगेंगी इंसाफ

मौनव्रत धारण किए अन्ना हज़ारे के सामने एक कड़ी चुनौती आनेवाली है। राखी सावंत उनके दरबार में इंसाफ के लिए पहुंचने वाली हैं। यह हॉट आइटम गर्ल उन्हें अपना नया गाना दिखा कर पूछेंगी कि इसमें ऐसा क्या अश्लील है जो सेंसर बोर्ड इसे पास नहीं कर रहा?

राखी इन दिनों आनेवाली फिल्म ‘लूट’ में अपने गाने के बोलों पर सेंसर बोर्ड की आपत्ति से बेहद खफा हैं। खबर है कि ‘जवानी की बैंक लूट ले… ‘ शीर्षक के इस गाने में कुछ ‘अश्लील’ शब्दों पर सेंसर ने आपत्ति जताई है और इन्हें बीप के जरिए छुपाने को कहा है, लेकिन राखी को यह सुझाव रास नहीं आ रहा है।

उन्होंने कहा है कि उनके गाने में कुछ भी अश्लील नहीं है और इसके बोल बहुत ही सही तरीके से इस्तेमाल किए गए जिससे अश्लीलता बिलकुल भी प्रतीत नहीं होती। राखी ने यह भी सवाल किया है कि अगर सेंसर भाग डी.के.बोस(डेल्ही बेली) और देसी ब्वॉयज के गाने झक मार के को पास कर सकते हैं तो उनके गाने को क्यों नहीं पास किया जा सकता?

राखी के मुताबिक, ”इमरान खान, जॉन अब्राहम और दीपिका पादुकोण के गानों को पास किया जा सकता है, मगर मेरे गाने को नहीं।” वैसे सेंसर राखी की इन दलीलों को सुनने को बिलकुल तैयार नहीं है, जिसके कारण वह इस मामले में अन्ना हजारे की मदद लेने की सोच रही हैं।

राखी के पब्लिसिस्ट डाले भगवागर ने कहा कि यह ख़बरें बिलकुल सच हैं कि राखी अन्ना के पास इस मामले को लेकर जाएंगी। फिलहाल वह ऐसे अश्लील गानों पर रिसर्च भी कर रही हैं जिन्हें सेंसर ने पास किया है। वह इन गानों के वीडियो और सीडी भी अन्ना को उनके रालेगांव स्थित घर ले जाकर दिखाएंगी, ताकि ये गांधीवादी समाजसेवी खुद ये बात तय कर पाएं कि उनका ‘गाना जवानी की बैंक लूट ले…’ अन्य गानों से अश्लील है या नहीं।

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.