/लेडी गागा ने फिर की शरारत, ‘अनोखा’ माइक पकड़ कर चूमा और छा गई मीडिया में

लेडी गागा ने फिर की शरारत, ‘अनोखा’ माइक पकड़ कर चूमा और छा गई मीडिया में

गागा का शो हो और विवाद न हो ऐसा असंभव है। गागा अपने गानों से ज्‍यादा आपत्तिजनक ड्रेस और एसेसरीज के लिए हॉलीवुड में खास पहचान रखती हैं।   गागा की परफॉर्मेंस में एक बात हमेशा खास होती है कि वह हर बार कुछ न कुछ ऐसा जरूर करती हैं जो चर्चा का विषय बन जाता है, शायद इस बार गागा ने इसके लिए माइक को ही जरिया बनाया।

 

 

 

एफवन रेस की खास मेहमान बनीं लेडी गागा अपने इंडिया टूर के आखिर में पुरुष जननांग या सेक्स टॉय के आकार के माइक पर गाना गाकर सुर्खियों में आ गई हैं।  भारत ही नहीं, विदेशी मीडिया में भी उनका यह माइक काफी निगेटिव चर्चा बटोर रहा है। इसे होठों से लगाए गागा की तस्‍वीर छापते हुए ब्रिटिश अखबार ‘डेली मेल’ ने इसे ‘संदिग्ध माइक’ बता कर इसकी खासी आलोचना की है।

 

इस बार देशी ही नहीं विदेशी मीडिया ने भी उनकी आलोचना की है। ब्रिटिश दैनिक डेली मेल ने गागा के माइक को अश्लील बताया है। हालांकि माइक पर आलोचना झेल रही गागा को शो के दौरान अपनी पोशाक और सुरों के लेकर तारीफ भी की जा रही है। यह दीगर बात है कि उनके साथी डांसर ने जिस तरह मंच पर उनके कपड़े उतारे उसे भारत में खासा अश्लील माना जा रहा है।

 

 

 

भारत आते वक्त गागा ने भारतीय और मॉर्डन ड्रेस से मिलती-जुलती पोशाक पहनी थी। और वो जब यहां मीडिया के सामने पहली बार मुखातिब हुई थीं तो उन्होंने अपने बालों को तिरंगे के रूप में रंगा हुआ था। और उनकी पोशाक भी भारतीय कपड़ों से मिलती हुई थी। गागा के भारत में आने के बाद अपनी फिल्म की पब्लिसिटी में व्यस्त शाहरुख खान और उनके परिवार ने इस विवादास्पद पॉप स्टार से खास मुलाकात भी की थी। हालांकि जब उन्होंने शाहरुख की बेटी को अपना चश्मा उपहार में दिया तो उसकी तारीफ में रा.वन के स्टार ने भी खासे कसीदे पढ़े थे,  लेकिन अफसोस, कि गागा जाते-जाते बवाल मचा गई हैं।

 

 

 

 

वैसे गागा के लिए ऐसा विवाद नया नहीं है। वह इससे पहले भी कई बार अश्लीलता की हद पार कर चुकी हैं। गागा पर अमेरिका में पॉप के जरिए पॉर्न को बढ़ावा देने के आरोप लगते रहे हैं। उनके कई गानों को बच्चों के लिए बैन भी किया गया है। इससे पहले भी गागा के पोशाकों को उनके शो के दौरान कई बार अश्लील करार दिया गया है। देखते हैं कि गागा इस बार अपनी क्या सफाई पेश करती हैं?

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.