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मीडिया x स्टिंग = स्पॉट फिक्सिंग : स्पोर्ट्स रिपोर्टर x क्राइम रिपोर्टर = वीना मालिक

By   /  November 4, 2011  /  1 Comment

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लंदन के एक अखबार के स्टिंग ऑपरेशन में  पाकिस्तानी क्रिकेटरों को मैच फिक्सिंग में मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद क्रिकेट की दुनिया में भूचाल आ गया है। मामला क्राइम बीट और फिर कोर्ट बीट के पत्रकारों से होता हुआ फिर खेल पत्रकार के पाले में आ गया है और अब ये फिल्मी गॉसिप वाले पत्रकारों के बीच पहुंचने वाला है।

लंदन की अदालत के फैसले के बाद स्पोर्ट्स फोटो जर्नलिस्ट धीरज दीक्षित ने एक निजी चैनल से बातचीत में दावा किया है कि पाकिस्तान क्रिकेट में अब भी मैच फिक्सर मौजूद हैं और पाकिस्तानी फिल्म कलाकार वीणा मलिक भी फिक्सिंग के केंद्र में थीं। उधर अपने स्वयंवर की तैयारियों में जुटी वीना ने यह कह कर फिर सनसनी फैला दी है कि फिक्सिंग के दोषी आसिफ ने उन्हें दोबारा मिलने का न्यौता भेजा है।

धीरज का दावा है कि पाकिस्तानी क्रिकेटर इमरान फरहत वहां के सबसे ज़्यादा सक्रिय मैच फिक्सर था। धीरज का दावा है कि इमरान फरहत के ससुर पाकिस्तान में चयनकर्ता रहे हैं। इसलिए वे आसानी से मैच फिक्सिंग करते रहे हैं। इमरान पूरी टीम को ऑपरेट करते थे। इमरान का एक रिश्तेदार लंदन में रहता जो मैच फिक्सिंग का पैसा लंदन में इकट्ठा करता था। चैनल पर धीरज ने पाकिस्तान की कलाकार वीना मलिक के साथ बातचीत के दौरान सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि वह मैच फिक्सिंग के केंद्र में हैं।

धीरज का कहना है कि वीना मलिक को जब पता चला कि मैं दुनिया के कई क्रिकेटरों, अंपायरों और क्रिकेट प्रशासकों को जानता हूं तो वे मेरे पीछे पड़ गईं। धीरज का दावा है, ”वीना ने पाकिस्तान से ढाका में उन्हें फोन करके कहा था कि मैं सात प्लेयर मैनेज कर रही हूं, आप भारत से कोई बडा़ कारोबारी लेकर आएं जो मैच फिक्सिंग में पैसा लगा सके।” धीरज ने तो वीना को कठघरे में खड़ा करते हुए यहां तक कहा कि मैंने उनका करियर खराब कर दिया है।

धीरज ने फोन कॉल की डिटेल दिखाते हुए कहा, ”मैंने आसिफ को सिर्फ चार बार कॉल की थी, लेकिन वीना कहती हैं कि मैं मोहम्मद आसिफ को 16 बार कॉल करता था। यह गलत है। मैं एक विज्ञापन के सिलसिले में मोहम्मद आसिफ को फोन करता था। मैं पहले एक वेबसाइट शुरू करना चाहता था। इसके लिए मैं पाकिस्तान के अंपायर असद रऊफ, न्यूजीलैंड के क्रिकेटर रॉस टेलर से वेबसाइट के लिए संपर्क किया था। वीना ने ढाका में मेरा नंबर लेने के लिए मेरी पत्नी को फोन किया था।”

धीरज का दावा है कि वीना ने ढाका में उन्हें फोन करके कहा था कि ऑस्ट्रेलिया में पाकिस्तान 5-0 से हार जाएगा। धीरज के मुताबिक उन्होंने ढाका में एक खेल पत्रकार से ये सारी बातें बताई थीं। बकौल धीरज उस पत्रकार ने उन्हें वीना से होने वाली बातचीत रिकॉर्ड करने के लिए कहा था। लेकिन धीरज का कहना है कि रिकॉर्डर में खराबी की वजह से वह बातचीत रिकॉर्ड नहीं कर पाए। धीरज ने कहा कि जब वीना ने मेरी पत्नी से बात की तो उन्हें वहीं पर यह साफ हो जाना चाहिए था कि जिस नंबर से आसिफ के पास कॉल जाती है, वह किसी लड़की का नहीं है।

धीरज ने वीना पर संगीन इल्जाम लगाते हुए कहा कि वीना ने उन्हें भावनात्मक रूप से ब्लैकमेल किया है। धीरज का कहना है कि उन्होंने वीना और आसिफ से 12 जनवरी, 2010 के बाद कभी भी बात नहीं की। धीरज का कहना है कि जब उन्हें मैच फिक्सिंग के बारे में पता चला तो उन्होंने वेबसाइट का काम रोककर मैच फिक्सिंग के खिलाफ स्टिंग ऑपरेशन करने का फैसला लिया।

धीरज के इन बयानों पर वीना मलिक ने पलटवार करते हुए कहा है, ”धीरज झूठ बोल रहे हैं और वह खुद मैच फिक्सिंग में शामिल रहे हैं। वीना का कहना है कि उन्होंने धीरज को फोन सिर्फ इसलिए किया था कि उन्हें शक था कि आसिफ के पास कोई लड़की तो फोन नहीं कर रही है? इसे वह दूर करना चाहती थीं। वीना ने धीरज को चुनौती देते हुए कहा कि वह अपने आरोप साबित करें। वीना का कहना है कि उनके पास मैच फिक्सिंग से जुड़े जो भी सुबूत थे, उन्हें वह आईसीसी को सौंप चुकी हैं। वीना का कहना है कि वह सिर्फ यह सुनिश्चित करना चाहती थीं कि आसिफ को भारत के नंबर से कॉल और एसएमएस करने वाली कोई लड़की तो नहीं है?

गौरतलब है कि पाकिस्तान के दो क्रिकेटरों- मोहम्मद आसिफ और सलमान बट को लंदन की एक अदालत ने स्पॉट फिक्सिंग के आरोप में दोषी पाया है। वीना मलिक भारत में बिग बॉस जैसे रिएलिटी शो में काम कर चुकी हैं और वे आसिफ की करीबी महिला मित्र रही हैं। वीना के मुताबिक आसिफ ने उन्हें एक कॉमन फ्रेंड के जरिए दोबारा मिलने का न्यौता भेजा था, लेकिन उनहोंने इसे ठुकरा दिया।

वीना को हाल ही में मुंबई में कस्टम अधिकारियों ने अनुमति से ज्यादा सामान रखने के आरोप में रोक लिया था। बाद में वे 10,000 रुपए का जुर्माना देकर छूटीं।

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

1 Comment

  1. Ajit verma says:

    Media darbar ek accha platefrom hai

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