/कनिमोझी की जमानत याचिका खारिज़ होना CBI के मुंह पर करारा तमाचा : भाजपा

कनिमोझी की जमानत याचिका खारिज़ होना CBI के मुंह पर करारा तमाचा : भाजपा

कलईनार टीवी की मालकिन और डीएमके सांसद कनिमोझी की जमानत याचिका खारिज होना सीबीआई के मुंह पर तमाचा है, क्योंकि जिसने इस घोटालेबाज को जेल पहुंचाया है उसने इस जमानत अर्ज़ी का विरोध तक नहीं किया। गौरतलब है कि 2जी स्पेक्ट्रम मामले में सीबीआई की विशेष अदालत ने गुरुवार को कनिमोझी और सात अन्य आरोपियों की जमानत याचिकाओं को खारिज कर दिया। हाल ही में कनिमोझी के पिता एम करुणानिधि सोनिया गांधी से मिले थे और सीबीआई के रुख में उसके बाद से ही ‘बदलाव’ आ गया है।

भाजपा के प्रवक्ता बलबीर पुंज ने भी कहा है कि कनिमोझी के मामले में सीबीआई द्वारा अपने रुख में परिवर्तन किया जाना बहुत आश्चर्यजनक था। अदालत ने सीबीआई की याचिका को संज्ञान में नहीं लिया है, उसके मुंह पर एक करारा तमाचा है। सीबीआई ने कनिमोझी की जमानत याचिका का विरोध नहीं करने का फैसला किया था। अदालत ने उन्हें जमानत देने से इंकार कर दिया।

अदालत ने कनिमोझी के अलावा जिन अन्य आरोपियों की जमानत याचिका खारिज की है, उनमें कलईनार टीवी के प्रबंध निदेशक शरद कुमार, स्वॉन टेलिकॉम के प्रोमोटर शाहिद बलवा, पूर्व दूर संचार मंत्री ए राजा के सचिव आरके चंदौलिया, आसिफ बलवा, राजीव अग्रवाल और फिल्मकार करीम मोरानी शामिल हैं।

डीएमके प्रमुख और तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एम करूणानिधि की बेटी 43 वर्षीय बेटी कनिमोझी पिछले पांच महीने से दिल्ली के तिह़ाड़ जेल में बंद हैं। उन्हें 20 मई को गिरफ्तार किया गया था। इससे पहले भी कनिमोझी जमानत पाने की कोशिश कर चुकी हैं, लेकिन उसे सफलता नहीं मिल पाई। विशेष न्यायाधीश ओपी सैनी ने जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि यह बात कल्पना से भी परे हैं कि कनिमोझी के साथ उनके महिला होने की वजह से भेदभाव किया जा रहा है।

अदालत ने कहा कि आरोपियों पर लगाए गए आरोप अत्यंत गंभीर प्रकृति के हैं और अर्थव्यवस्था पर इनका गंभीर प्रभाव प़डा है। अदालत ने कहा, मामले से जु़डे तथ्य और आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोप बहुत गंभीर प्रकृति के हैं, जिनका देश की अर्थव्यवस्था पर गंभीर प्रभाव प़डा। दिलचस्प बात यह है कि अदालत ने बाकियों की जमानत का तो विरोध किया, लेकिन कनिमोझी के मामले पर चुप्पी साध गई।

भाजपा ने कहा कि यह काफी आश्चर्यचकित कर देने वाला था कि सीबीआई ने किस तरह से 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाला मामले में आरोपियों के लिए अलग पैमाने अपनाने की कोशिश की थी।  पुंज ने कहा कि अदालत ने आरोपी के पद और अपराध की प्रकृति को ध्यान में रखते हुए अपना फैसला सुनाया है।

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.