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कितनी डर्टी है ‘डर्टी पिक्चर’ की कहानी? क्या सिल्क स्मिता की होगी और बदनामी?

By   /  November 5, 2011  /  No Comments

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एकता कपूर की ‘डर्टी पिक्चर’ बन कर रिलीज को तैयार है और अगले महीने की 2 तारीख को हॉल में दिखने की भी तैयारी है, लेकिन दक्षिण की मशहूर अदाकारा विजयलक्ष्मी यानि सिल्क स्मिता के परिवार वालों को इस पर ऐतराज़ है। फिल्म की कहानी सिल्क स्मिता के जीवन पर ही आधारित है और इसके ट्रेलर से ऐसा लगता है जैसे इसमें इस तेलगू सेक्स बम को अवसरवादी बताते हुए और बदनाम करने की कोशिश की गई है।

 

 

आंध्र-प्रदेश के एक छोटे से गांव में गरीब परिवार में जन्मी  सिल्क स्मिता चौथी के बाद पढ़ाई पूरी नहीं कर पाई थी और 70 के दशक में अपना करीयर बतौर मेक-अप आर्टिस्ट शुरु किया था, लेकिन जल्दी ही वह एक्सट्रा कलाकार बन गई और 80 के दशक की शुरुआत में वह दक्षिण भारत की सबसे व्यस्त हीरोइनों में शामिल थी। सिल्क को वीणू चक्रवर्ती नाम के एक निर्देशक ने चांस दिया था जिनकी पत्नी ने उन्हे अंग्रेजी सिखाई और एक टीचर से डांस सिखाया।

 

 

 

 

 

विजयलक्ष्मी से सिल्क स्मिता वह अपनी पहली तमिल फिल्म ‘वांडी चक्करम’ में ही बन गई थी जिसमें उन्होंने सिल्क नाम की एक बार-गर्ल का किरदार निभाया था। अस्सी के दशक में दक्षिण भारत की किसी भी फिल्म को तब तक पूरा नहीं माना जाता था जब तक उसमें सिल्क का कोई रोल या गाना न हो। सिल्क ने अपने सत्रह वर्षों के करीयर में 450 से भी अधिक फिल्मों में काम किया।

 

 

 

 

 

सिल्क स्मिता ने मलयालम, तेलगू, तमिल, कन्नड़ और हिन्दी फिल्मों में काम किया था। कहते हैं दक्षिण भारत में उनका जादू ऐसे सिर चढ़ कर बोल रहा थ कि उनके एक गरमागरम रोल या आइटम डांस के लिए फिल्में वर्षों डब्बे में पड़ी रहती थीं। सिल्क की व्यस्तता इतनी अधिक थी कि वे चाह कर भी हर किसी को समय नहीं दे पाती थीं।

 

 

 

 

 

 

जल्दी ही सिल्क अपने निर्माताओं से मोटी रकम वसूलने लगीं और उनके पास अच्छी खासी जायदाद भी बन गई, लेकिन उनका निजी जीवन कोई खास खुशी देने वाला नहीं रहा। सिल्क की इमेज एक सॉफ्ट पॉर्न स्टार की बन गई जिससे वो कभी बाहर नहीं आ सकीं। उनके करीब आने वाले भी उनकी चमक-दमक और शरीर से ज्यादा प्रभावित रहे।

 

 

 

 

सिल्क की बदकिस्मती ये रही कि हमेशा उनके करीबी लोगों ने उनका शोषण किया। बचपन से लेकर बड़े होने तक सिल्क स्मिता कई बार कई मर्दों के संपर्क में आईं। कई बार जान कर तो कभी अनजाने में, वे तकरीबन हर बार मर्दों से लुटी ही हैं। कहते हैं बचपन में उनके आकर्षक रूप के कारण उन्हें मर्दों की हवस का शिकार बनना पड़ा था, तब उनके गरीब माता-पिता ने उनकी शादी कर दी थी।

 

 

 

 

 

 

 

सिल्क स्मिता की जिंदगी की तरह उनका अंत बड़ा ही नाटकीय रहा। उन्होंने अपनी जिंदगी भर की कमाई अपने करीबी मित्रों के कहने पर फिल्म में लगा दी। उन्हें हिसाब-किताब की उतनी समझ न थी जिससे वो भारी घाटे में चली गईं। एक दिन अचानक वो चेन्नई के एक फ्लैट में मृत पाई गईं।

 

 

 

 

 

विजयलक्ष्मी यानि सिल्क स्मिता के बड़े भाई वी प्रसाद ने डर्टी पिक्चर के निर्देशक मिलन लथूरिया को एक लीगल नोटिस भेजा है। नोटिस में कहा गया है कि उनकी बहन पर आधारित यह फिल्म बनाने से पहले उनकी फैमिली की परमिशन नहीं ली गई। प्रसाद ने बताया, ”हमें अखबारों और टी वी चैनलों के से पता चला है कि इस फिल्म में मेरी बहन को बहुत ही अश्लील तरीके से पर्दे पर पेश किया गया है। फिल्म में विद्या बालन सिल्क स्मिता के रोल में है। बावजूद इसके, प्रोड्यूसर या डायरेक्टर किसी ने भी फैमिली की सहमति लेना ठीक नहीं समझा।”

 

 

 

 

 

 

प्रसाद ने यह भी बताया कि ‘द डर्टी पिक्चर’ के निर्माताओं की ओर से कोई रिस्पॉन्स नहीं आया , इसलिए वह दूसरा नोटिस भेजने की तैयारी कर रहे हैं। दरअसल, प्रसाद फिल्म की रिलीज से पहले उसका कॉन्टेंट भी देखना चाहते हैं। अगर उन्हें उसमें कुछ ऑब्जेक्शनेबल लगता है , तो वह उसे हटवाना चाहते हैं। इस बारे में मिलन लथूरिया ने मीडिया दरबार को बताया, ”अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी। हमारे वकील मामले को देख रहे हैं और इस पर जल्द ही ऐक्शन लिया जाएगा।”

 

 

 

 

 

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

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