Loading...
You are here:  Home  >  मीडिया  >  Current Article

महज़ 17 साल की उम्र में कल्पना ने अपना सबकुछ मान लिया था 45 साल के भूपेन को

By   /  November 6, 2011  /  No Comments

    Print       Email
इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..

भूपेन हजारिका यूं तो अपने संगीत और गायन के लिए जाने जाते रहे हैं लेकिन उनकी और कल्पना लाजमी की प्रेम कहानी भी उतनी ही रोचक है। भूपेन दा के जाने का दु:ख कल्पना लाजमी से बेहतर कौन समझ सकता है।

यूं तो कल्पना और भूपेन की इस प्रेम कहानी में विवाह के सात फेरे तो नहीं हुए लेकिन दोनों एक बार जुड़े तो आज तक लीविंग टुगेदर रहते हुए साथ साथ जिंदगी के सुख दु:ख में एक दूसरे को समझा। कल्पना लाजमी जब 17 साल की थी तो भूपेन दा से उनको मोहब्बत हुई थी तब भूपेन हजारिका 45 साल के थे। अपने से 28 साल बड़े भूपेन हजारिका के प्यार में वे इस कदर डूबी की उम्र के मायने भी खत्म हो गए। इस प्रेम कहानी में विवाह के सात फेरे नहीं हुए क्योंकि दोनों परिवार के लोग इस रिश्ते के खिलाफ थे।

इस संबंध में पिछले साल खुद कल्पना लाजमी ने राज खोलते हुए कहा था, ”हां में उनकी पत्नी हूं और पिछले 40 सालों से हम साथ है।” हालांकि भूपेन हजारिका जब 80 साल के हुए थे तो उन्होंने अपने और कल्पना के प्यार को विवाह बंधन में बंधने का प्रस्ताव किया था लेकिन कई वर्षो से उनके साथ रह रही कल्पना लाजमी ने तब कहा था वाइफ का टैग उनके इस रिश्ते के लिए बहुत जरूरी नहीं है। जिस प्रकार का आपसी विश्वास और भावनात्मक प्यार उन दोनों में रहा है उसे देखते हुए कल्पना को बाकी बातें बहुत छोटी लगती थी।

बेशक सात फेरे नहीं हुए लेकिन हमारे प्यार के बीच ये बातें बहुत मामली है। वे कहती है कि भूपेन को उनकी पहली पत्नी प्रियंवदा से एक बेटा भी होने के बावजूद उन्होंने उनके साथ रहने का फैसला लेने में कोई संकोच नहीं किया था। इस राज को उन्होंने पिछले साल उस वक्त खोला था जब कुछ लोग भूपेन हजारिका से मिलने की जिद कर रहे थे तो उन्होंने पूछा, ”आप कौन होती हो जो हमको उनसे नहीं मिलने देना चाहती हैं?” तो कल्पना बोल पड़ी थी, ”मैं उनकी वाइफ हूं।”

दरअसल कल्पना और भूपेन एक दूसरे को बेइंतहा प्यार करते थे । कल्पना की मां ने पिछले दिनों जब कहा कि शादी क्यों नहीं कर लेती तो वे बोल पड़ी थी कि बस मैरिज सर्टिफिकेट के लिए शादी करने से उनको शांति मिल जाएगी क्या? दरअसल लीविंग टुगेदर रहने का इससे खूबसूरत उदाहारण और क्या हो सकता है। आज हमारे बीच भूपेन हजारिका नहीं है और उनके अंतिम दिनों में परछाई की तरह साथ रहने वाली कल्पना ने उनकी देखभाल करने में कोई कोर कसर नहीं रखी लेकिन आज निश्चित तौर पर उनके लिए बेहद दुख का छण है..भूपेन उनका प्यार थे और दोनों में बेहद लगाव था।

मीडिया से बात करते हुए कुछ समय पहले कल्पना ने भूपेन हजारिका के बारे में कहा था कि भूपेन अंतमुर्खी होने के साथ साथ गुस्सैल स्वभाव के होने के बावजूद संगीत में जिस माधरुय को हम देखते हैं वह बेमिशाल हैं। कल्पना के अनुसार वे भावनात्मक व्यक्ति थे हालांकि वे यह भी कहती है कि उनके लिए भूपेन बेहद खास स्थान रखते हैं और प्यार के साथ हम आपस में लड़ते झगड़ते भी थे।

Facebook Comments

इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..
    Print       Email
  • Published: 6 years ago on November 6, 2011
  • By:
  • Last Modified: November 6, 2011 @ 10:28 am
  • Filed Under: मीडिया

About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं. हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो. आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें - मॉडरेटर

You might also like...

एक जज की मौत : The Caravan की सिहरा देने वाली वह स्‍टोरी जिस पर मीडिया चुप है..

Read More →
Page Reader Press Enter to Read Page Content Out Loud Press Enter to Pause or Restart Reading Page Content Out Loud Press Enter to Stop Reading Page Content Out Loud Screen Reader Support
%d bloggers like this: