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टीम अन्ना की चौकड़ी ने अन्ना को फिर किया हाइजैक, राजू ने ब्लॉग पर डाले अन्ना के नोट

By   /  November 6, 2011  /  No Comments

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ये एक ऐसा ब्लॉग है जो सिर्फ मराठी जानने वाले छठी पास सोशल वर्कर किशन बाबूराव हज़ारे अर्फ अन्ना चलाते हैं। लेकिन ब्लॉग अंग्रेजी में है। दरअसल http://annahazaresays.wordpress.com/ नाम से चल रहा ब्लॉग, जो अन्ना की बोली के तौर पर जाना जाता है, राजू पारुलकर नाम के एक पत्रकार चलाते हैं। उन्होंने अन्ना और उनकी टीम का कई विवादास्पद मुद्दों पर बचाव भी किया है। मौन व्रत में भी अन्ना राजू को लिख कर पत्र देते थे और वे उसका अनुवाद तथा ट्रांस्क्रिप्शन ब्लॉग पर लगाते थे। लेकिन अब यह ताना-बाना बिखर गया है।

ऐसा अचानक नहीं हुआ है। दरअसल राजू ने टीम के चार ख़ास सदस्यों की विश्वसनीयता पर ही सवालिया निशान लगा दिया है। राजू के मुताबिक अरविंद केजरीवाल, किरण बेदी, प्रशांत भूषण और मनीष सिसोदिया फासीवादी हैं। इतना ही नहीं इस ब्लॉगर ने इन सभी का पर्दाफाश करने की भी धमकी दी है।

राजू ने आरोप लगाया है कि टीम अन्ना के इन चारों सदस्यों ने उनके साथ अभद्रता की है। राजू का कहना है कि इन चारों सदस्यों ने अन्ना पर पूरी तरह से कब्ज़ा कर रखा है और उन्हें हर तरह से अपनी तरफ करने में लगे रहते हैं।

राजू ने कहा है कि अन्ना नई कोर टीम चाहते थे। राजू के मुताबिक अन्ना ने यह बात मौन व्रत के दौरान लिखकर कही थी। राजू पारुलकर का कहना है कि टीम अन्ना के लोगों ने किस तरह अन्ना को बरगलाया इसके सबूत उनके पास हैं। राजू ने कहा कि वह सभी आरोपों के पक्ष में सबूतों के लेकर जल्दी ही जनता के सामने आएंगे।

 गौरतलब है कि अन्ना ने हाल ही में राजू को पहचानने से भी मना कर दिया था। राजू ने जवाब में अन्ना के वे नोट अपने ब्लॉग पर डाल दिए हैं जो अन्ना ने लिखे थे।

 

 

 

 

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

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