/क्या हॉट सयाली का शाइनी पर उत्पीड़न का आरोप लगाना पब्लिसिटी स्टंट था?

क्या हॉट सयाली का शाइनी पर उत्पीड़न का आरोप लगाना पब्लिसिटी स्टंट था?

एक बार फिर से बॉलीवुड के गैंगस्टर फेम शाइनी आहूजा पर सेक्सुल एंड मेंटल हैरेशमेंट का आरोप लगा लेकिन अब यह मामला पब्लिसिटी स्टंट नजर आ रहा है। शाइनी पर यह आरोप लगाया था ‘द ट्रेन’ जैसी फिल्मों की अभिनेत्री सयाली भगत ने। सयाली ने स्टारडस्ट पत्रिका को दिए अपने इंटरव्यू में यहां तक कह दिया था कि वे शाइनी के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने जा रही हैं। कुछ पत्र-पत्रिकाओं ने तो बिना पुलिस स्टेशन का नाम पता किए यह तक लिख डाला कि मुकद्दमा दर्ज़ भी हो चुका है।

आपको बता दें कि यह वो ही सयाली भगत हैं जिन्होंने तब शाइनी के साथ काम करने की हामी भरी थी जिस समय शाइनी को बलात्कारी कहकर हर किसी ने उनके साथ काम करने से इंकार कर दिया था।

जब पूरा भारत विश्वकप की मस्ती में चूर था तब ही अभिनेत्री सयाली भगत और महिला निर्देशक पूजा जतिंदर बेदी ने शाइनी को करेक्टरलेस और लड़की बाज करार देकर सनसनी फैला दी थी। निर्देशिका ने बताया है कि शाइनी अक्सर फिल्मी सेट पर लड़कियों को परेशान किया करता था।

सयाली भगत ने कहा था कि फिल्म के सेट पर शाइनी अक्सर उनके पास आने की कोशिश करते थे, उन्हें गले लगाने या फिर हाथ पकड़ने की फिराक में रहते थे। यहां तक की एक बार शाइनी ने सीन डिस्कस करने के बहाने उन्हें प्राइवेट रूम में बुलाकर उन्हें गले लगाने की भी कोशिश की थी। यही नहीं सयाली ने यह भी कहा था कि इंटिमेट सीन करने के पहले शाइनी ने उन्हें अपना हाथ पकड़कर बात करने को कहा।

उनका कहना था कि ऐसा करने से वह ठीक से सीन कर पाएंगी। सयाली ने यह भी बताया कि उन्होंने न सिर्फ सीन से पहले उनका हाथ पकड़ा बल्कि एक कोने में ले जाकर सोहा अली खान और कंगना रनाउत के साथ किए गए इंटिमेट सींस के बारे में भी खुलकर बताया था।

लेकिन अब सयाली मीडिया को ही आड़े हाथों ले रही हैं। सयाली ने मीडियादरबार से एक बातचीत में बताया कि उन्होंने कभी मुकद्दमा दर्ज़ करने के बारे में सोचा ही नहीं था और यह सब मीडिया की मनगढ़ंत बातें हैं।

सोचने वाली बात यह है कि क्या सयाली ने क्या यह सब अपनी नई फिल्म ‘घोस्ट’ की पब्लिसिटी के लिए किया था।

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.