/अपनी न्यूड तस्वीर देख ‘दुखी’ हुई पूनम पांडेय: कहीं ये भी पब्लिसिटी स्टंट तो नहीं?

अपनी न्यूड तस्वीर देख ‘दुखी’ हुई पूनम पांडेय: कहीं ये भी पब्लिसिटी स्टंट तो नहीं?

बिग बॉस में जगह ना मिलने से हताश होने के बावजूद अपनी धमाकेदार वेबसाइट लांच कर सनसनी फेला देने वाली पूनम पांडेय के न्यूड फोटो ने एक बार फिर इंटरनेट पर सनसनी फैला दी है।

हालांकि पूनम का दावा है कि यह फोटो किसी की शरारत है। हालांकि यह तस्वीर असली नहीं है, लेकिन इतनी सफाई से मॉर्फ की गई है कि बहुत मुश्किल से इसकी हकीकत पकड़ में आती है। इसमें असली पूनम के चेहरे को किसी दूसरे के शरीर पर चिपका दिया गया है।

खास बात यह है कि इस तस्वीर का ज्यादातर लोगों को पता तक नहीं था। इस तस्वीर में पूनम और सचिन तेंदुलकर को अजीबोगरीब अवस्था में दिखाया गया है। जब पूनम ने ट्विटर पर इसके बारे में टिप्पणी की तो इसे देखने वालों की कतार लग गई।

उन्होंने इस तस्वीर पर अपनी ‘नाराजगी’ जाहिर करते हुए लिखा है- ”अपने फैंस से मिल रहे बेशुमार प्यार का मैं तहेदिल से धन्यवाद देती हूं मगर मगर इस तरह की एडिटेड तस्वीर देखकर मुझे बेहद दुःख हुआ है, क्रिकेट मेरे लिए एक धर्म के समान है मगर इस तरह से ये देखकर मुझे दुःख हुआ है। मैंने अभी तक ‘रा.वन’ और ‘सिंघम’ जैसी फिल्मों के पोस्टर से छेड़छाड़ देखी थी मगर अंदाजा नहीं था कि मेरी तस्वीर के साथ कुछ लोग ऐसी हरकत कर देंगे।”

गौरतलब है कि मॉर्फ कर किसी को अश्लील दिखाना एक अपराध है और अगर पूनम इसकी शिकायत पुलिस में कर दें तो तस्वीर अपलोड करने वाले तक पहुंचना मुश्किल नहीं होगा, लेकिन अब तक इस ‘दुखी’ बाला ने ऐसा करने की जरूरत महसूस नहीं की है।

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.