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P7 न्यूज चैनल को नीरा राडिया ने दिलवाई थी मदेरणा और भंवरी की CD?

एक सितंबर से लापता एएनएम भंवरी देवी और पूर्व मंत्री महिपाल मदेरणा की कथित आपत्तिजनक सीडी सीबीआई को मिल गई है। एक तरफ सीबीआई कार्यालय में गुरुवार को पूर्व मंत्री महिपाल मदेरणा को सीबीआई उनकी सीडी दिखाकर पूछताछ कर रही थी, वहीं दूसरी ओर, पूरा प्रदेश P7  टीवी चैनल पर इस सीडी को देख रहा था। सवाल यह उठता है कि जब आजतक, स्टार न्यूज, इंडिया टीवी ऐर ज़ी न्यूज जैसे धुरंधर इस सीडी को नही खोज पाए तो यह एक कम चर्चित और छोटे से चैनल P7 को कैसे मिल गई?

बताया जाता है कि P7 को यह सीडी उसका पीआर देख रही विवादास्पद लॉबिस्ट नीरा राडिया ने दिलवाई थी। ऐसा समझा जा रहा है कि सीडी सामने आने से P7  के साथ-साथ राडिया के भी हित सध रहे हैं।

पर्ल्स राजस्थान की राजधानी जयपुर में बतौर चिटफंड कंपनी रजिस्टर्ड है। पिछले दिनों जब ग्रुप के खिलाफ देश भर में कार्रवाई शुरु हुई तो राजस्थान सरकार ने भी शिकंजा कसना शुरु कर दिया था। बाद में कंपनी ने राडिया की वैष्णवी कम्युनिकेशंस को अपनी छवि सुधारने का ठेका दिया तो कई मीडिया घरानों और एजेंसियों को करोड़ों रुपए के विज्ञापन और चढ़ावे से मामला मैनेज किया गया।

सीडी के प्रसारण के बाद मदेरणा के पास एएनएम भंवरी से संबंध स्वीकार करने के अलावा कोई दूसरा रास्ता बचा ही नहीं था। ऐसे में माना जा रहा है कि मदेरणा ने भंवरी से संबंध स्वीकार कर लिए हो, लेकिन भंवरी के अपहरण और हत्या की आशंका में शामिल होने से इनकार किया हो। सीबीआई ऑफिस के बाहर संवाददाताओं ने मदेरणा से बात करनी चाही तो उन्होंने इनकार कर दिया। सीबीआई ने इस मामले में शुक्रवार को बंद लिफाफे में हाईकोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट पेश कर दिया और महिपाल को दुबारा पूछताछ के लिए बुलाएगी।

देखें P7 पर प्रसारित सीडी की झलकियां :

भंवरी प्रकरण में सीबीआई ने गुरुवार को पहली बार पूर्व जल संसाधन मंत्री महिपाल मदेरणा को पूछताछ के लिए बुलाया। दिग्गज कांग्रेसी नेता परसराम मदेरणा के पुत्र महिपाल सीबीआई के नोटिस पर सुबह करीब 11:30 बजे सीबीआई के लालसागर स्थित कार्यालय पहुंचे। मदेरणा से दोपहर साढ़े तीन बजे तक पूछताछ की गई। इसके बाद मदेरणा अपनी कार में बैठ गए थे, लेकिन इस दौरान सीबीआई अधिकारियों ने उन्हें रोक लिया और फिर से पूछताछ के लिए अंदर बुला लिया।

फिर शाम करीब छह बजे तक पूछताछ हुई। इसके बाद मदेरणा अपनी कार में बैठकर वहां से रवाना हो गए। उन्हें शुक्रवार को पूछताछ के लिए फिर बुलाया जाएगा। इस दौरान सीबीआई ने निलंबित सब इंस्पेक्टर लाखाराम को पहले से बुला रखा था और दोनों से अलग-अलग पूछताछ करने के बाद आमने-सामने बैठाकर भी पूछताछ की गई। लाखाराम के भंवरी व मदेरणा से अच्छे रिश्ते रहे हैं। इसी की दुहाई देकर लाखाराम ने दोनों के बीच समझौता कराने में अहम भूमिका निभाई थी।

मदेरणा से पूछताछ के बाद इस प्रकरण में अब तक पर्दे के पीछे छिपे कई और राज सामने आ सकते हैं। भंवरी व महिपाल की कथित आपत्तिजनक सीडी के सामने आने से सियासी हलकों में खलबली मच गई है। सीडी में साफ दिख रहा है कि महिपाल व भंवरी के काफी अंतरंग रिश्ते रहे। संभवतया इसी सीडी से महिपाल को ब्लैकमेल किया जा रहा था। आशंका यह भी है कि इसी सीडी के चलते एएनएम भंवरी का अपहरण किया गया। लंबे समय से अफवाहों का बाजार भी गर्म है कि भंवरी अब इस दुनिया में नहीं है।

भंवरी अपहरण प्रकरण में अनुसंधान पर राजस्थान हाईकोर्ट की पूरी नजर है। पुलिस के शिथिल अनुसंधान पर हाईकोर्ट ने नाराजगी जताते हुए सरकार पर कड़ी टिप्पणी की थी। तीन नवंबर को हाईकोर्ट ने इस मामले में सीबीआई से प्रगति रिपोर्ट मांगी थी, लेकिन सीबीआई ने दो सप्ताह का समय मांगा था। हाईकोर्ट ने 11 नवंबर को इस मामले में स्टेटस रिपोर्ट पेश करने को कहा था। सीडी के प्रसारण से गहलोत सरकार के साथ-साथ सीबीआई पर भी दबाव बन गया है।

भंवरी अपहरण प्रकरण में अब तक तीन ऑडियो और एक कथित आपत्तिजनक सीडी सामने आ चुकी है। भंवरी प्रकरण में अब तक शहाबुद्दीन, सोहनलाल व बलदेव को गिरफ्तार किया जा चुका है। लूणी से कांग्रेस विधायक मलखान सिंह विश्नोई की बहन इन्द्रा विश्नोई, भाई परसराम विश्नोई और परसराम की पत्नी बिलाड़ा प्रधान कुसुम विश्नोई से पूछताछ की जा चुकी है। पूछताछ शहाबुद्दीन की कथित प्रेमिका रेहाना से भी की गई है।

ऑडियो सीडी में विधायक मलखान का भी नाम आया है। संभावना है कि अगली कड़ी में सीबीआई मलखान से पूछताछ करे। इस मामले में पूर्व उप जिला प्रमुख सहीराम विश्नोई को कोर्ट ने भगोड़ा घोषित कर दिया है। सीबीआई ने उस पर एक लाख रुपए का इनाम रखा हुआ है। वहीं भंवरी की सूचना देने वाले को पांच लाख रुपए का इनाम देने की घोषणा की जा चुकी है।

एक न्यूज चैनल पर दिखाई जा रही भंवरी व मदेरणा की कथित आपत्तिजनक सीडी सीबीआई के पास है। इसकी जांच की जा रही है। मदेरणा से गुरुवार को पूछताछ की गई, उन्हें शुक्रवार को फिर बुलाया जाएगा।

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.