/हाई कोर्ट ने मंजूर की कैश फॉर वोट मामले में गिरफ्तार पत्रकार और राजनेताओं की जमानत

हाई कोर्ट ने मंजूर की कैश फॉर वोट मामले में गिरफ्तार पत्रकार और राजनेताओं की जमानत

दिल्ली हाईकोर्ट ने कैश फॉर नोट मामले में भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी के पूर्व सहयोगी सुधींद्र कुलकर्णी समेत पांचों आरोपियों को बुधवार को जमानत दे दी। कोर्ट ने मध्यप्रदेश के भिंड से भाजपा सांसद अशोक अर्गल की अग्रिम जमानत भी मंजूर कर ली।

जस्टिस एमएल मेहता ने कुलकर्णी के अलावा भाजपा के पूर्व सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते व महावीर सिंह भगोरा, राज्यसभा सदस्य अमर सिंह के निजी सचिव संजीव सक्सेना और कथित भाजपा कार्यकर्ता सुहेल हिंदुस्तानी को जमानत दी है। इन्हें दो लाख रुपये का मुचलका और इतनी ही राशि की  जमानत देनी होगी।
जरूरत पडऩे पर  इन्हें दिल्ली पुलिस को जांच में सहयोग देना होगा।

दिल्ली पुलिस द्वारा इनकी जमानत याचिकाओं का विरोध न किया जाना इनके लिए  फायदेमंद रहा। अब ये गुरुवार को तीस हजारी की  विशेष अदालत में जमानत भरने के बाद शाम को तिहाड़ जेल से रिहा पायेंगे। कोर्ट ने भाजपा सांसद अशोक अर्गल को अग्रिम जमानत देते हुए निर्देश दिए कि वे ट्रायल कोर्ट के समक्ष मामले की सुनवाई पर उपस्थित रहेंगे। अर्गल को तीस हजारी की विशेष अदालत ने तलब किया हुआ है। इसी के चलते उन्होंने अग्रिम जमानत की याचिका लगाई थी।

हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत मिलना उनके लिए बेहद राहत भरा है, क्योंकि विशेष अदालत द्वारा तलब किए जाने के चलते उन पर गिरफ्तारी के बादल छाए हुए थे।
राज्यसभा सदस्य अमर सिंह को खराब स्वास्थ्य के आधार पर पहले ही जमानत मिल चुकी है। अमर सिंह, भगोरा और कुलस्ते को 6 सितंबर को गिरफ्तार किया गया था। कुलकर्णी को २७ सितंबर को और संजीव सक्सेना व सुहेल हिंदुस्तानी को १७ जुलाई को गिरफ्तार किया गया था। (दैनिक भास्कर)

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.