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क्या टीम अन्ना सफेद झूठ के सहारे भ्रष्टाचार का विरोध कर रही है?

By   /  November 23, 2011  /  7 Comments

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– सतीश चन्द्र मिश्र  ||
संसद के शीतकालीन सत्र की शुरुआत के साथ ही सरगर्म हुए राजनीतिक वातावरण में अन्ना टीम  ने एक बार फिर कमर कस ली है. इसके लिए अन्ना टीम ने एक बार फिर अपना “जनलोकपाली” कीर्तन प्रारम्भ किया है. पिछले तीन-चार दिनों से  न्यूज चैनलों पर ये अन्ना गैंग फिर चमका है और आदेशात्मक शैली में देश की संसद और संविधान को अपना स्वरचित जनलोकपाली पहाड़ा पढ़वाने की कोशिश करता दिखा है. 

यह अन्ना टीम न्यूज चैनलों के वातानुकूलित स्टूडियोज़ में बैठकर121 करोड़ देशवासियों के पूर्ण समर्थन के अपने दावे के साथ देश के लिए, देश की तरफ से सोचने, विचारने, आदेश देने, और फैसला लेने के इकलौते ठेकेदार के रूप मेंस्वयम को प्रस्तुत करता दिखा.

इस से पहले रामलीला मैदान में लगाये गए अपने “जनलोकपाली” मजमें के दौरान भी इस अन्ना टीम ने ऐसे ही हवाई दावों का भ्रमजाल कुछ न्यूज चैनलों के सहयोग और समर्थन से बढ़ चढ़ कर फ़ैलाने की कुटिल कोशिशें की थी, जबकि उसका यह दावा वास्तविकता से हजारों कोस दूर है. गणितीय प्रतीकों में कहूँ तो 5 प्रतिशत भी सही नहीं है. तथ्यपरक यथार्थ की तार्किक कसौटी इस अन्ना टीम द्वारा खुद को प्राप्त 121 करोड़ देशवासियों के समर्थन के दावे की धज्जियाँ उड़ाती स्पष्ट दिखायी देती है.

ज्ञात रहे की इस अन्ना टीम के जनलोकपाली आन्दोलन का सबसे बड़ा एवं मुख्य समर्थक वर्ग इस देश के पढ़े लिखे मध्य वर्ग, उच्च मध्यवर्ग एवं नौजवानों को ही माना गया था, इंटरनेट की ट्विटर एवं फेसबुक सरीखी दुनिया को इस टीम के समर्थन की सर्वाधिक उर्वर भूमि कहा गया.  इसके अंध समर्थक न्यूज चैनलों एवं खुद इस अन्ना गैंग का भी यही मानना था. इसीलिए इसने अपने तथाकथित जनलोकपाल बिल का मसौदा इस देश तक इंटरनेट के माध्यम से ही पहुंचाया था. उस मसौदे से सम्बन्धित सुझावों शिकायतों को प्राप्त करने के लिए भी इस टीम ने अपनी वेब साईट और Email को ही अपने और जनता के बीच का माध्यम बनाया था.

फेसबुक और ट्विटर पर अपने जनलोकपाली मजमे को मिले तथाकथित 121 करोड़ देशवासियों के ऐतिहासिक समर्थन के सामूहिक गीत अन्ना टीम ने कुछ न्यूजचैनलों के साथ संयुक्त रूप से गए थे.

उल्लेखनीय है की अप्रैल 2011 में खुद फेसबुक द्वारा जारी किये गए आंकड़ों के अनुसार भारत में फेसबुक इस्तेमाल करने वालों की संख्या 35.7% की छमाही वृद्धि दर के साथ लगभग 2 करोड़ 30 लाख थी, अर्थात आज यह संख्या लगभग 3 करोड़ के आसपास होगी. अब जरा ध्यान से जानिये उस सच्चाई को कि इन 3 करोड़ देशवासियों के मध्य इस अन्ना टीम

टीम के समर्थन कि स्थिति क्या है.

फेसबुक में इस अन्ना टीम की संस्था INDIA AGAINST CORRUPTION के समर्थन में बने ग्रुपों/पेजों की कुल संख्या 492 है. खुद अन्ना टीम द्वारा बनाये गए इसके मुख्य पेज के समर्थकों की संख्या 5 लाख 42 हज़ार के करीब है. इसके मुख्य पेज और शेष 491 पेजों के समर्थकों की संख्या का कुल योग लगभग 8 लाख 20 हज़ार के करीब है. ज़रा ध्यान दीजिये की 3 करोड़ के करीब फेसबुक की भारतीय आबादी में से कुल 8 लाख 20 हज़ार लोगों ने इस टीम के मंच को अपना समर्थन दिया है. फेसबुक संसार की भारतीय आबादी के केवल 2.73% सदस्यों ने ही इस अन्ना टीम  और उसके मंच को अपना समर्थन दिया है. यद्यपि फेसबुक की दुनिया का हर सदस्य यह जानता है की एक सदस्य कई-कई ग्रुपों और पेजों को अपना समर्थन दे सकता है और देता भी है. यदि ऐसे साझा समर्थकों की संख्या विश्लेषित की जाए तो 2.73% समर्थन का उपरोक्त आंकड़ा 1.5% के आसपास ही पहुंचेगा. इस अन्ना टीम की चौकड़ी के सबसे मेन मेम्बर अरविन्द केजरीवाल के नाम से जो मुख्य पेज है उसमे इसके समर्थकों की संख्या है 48,790.

केजरीवाल के कुछ अंध भक्तों ने भी केजरीवाल के समर्थन के पेज बना रखे हैं. ऐसे कुल पेजों की संख्या है 53. केजरीवाल के मुख्य पेज समेत इन 54 पेजों में केजरीवाल समर्थकों की कुल संख्या है 1 लाख 34 हज़ार 971. अर्थात केवल 0.44% समर्थन

इसके बाद अन्ना टीम की मेम्बर नम्बर 2 है किरण बेदी.

किरण बेदी के नाम से जो मुख्य पेज है उसमें बेदी समर्थकों की संख्या है 1 लाख 8 हज़ार 684.

किरण बेदी के भी कुछ समर्थकों ने बेदी के समर्थन के पेज बना रखे हैं.

ऐसे कुल 76 पेज हैं और किरण बेदी के मुख्य पेज समेत इन 77 पेजों में बेदी समर्थकों की कुल संख्या है 2 लाख 13 हज़ार 387.

अर्थात केवल 0.71% समर्थन

इसके बाद नाम आता है अन्ना टीम  के फौजी नम्बर तीन प्रशांत भूषण का.

इसके समर्थन के नाम से कुल 6 पेज हैं और इन छहों पेजों में इसके समर्थकों की कुल संख्या है केवल 2369.

अर्थात केवल 0.01% समर्थन, और इस चौकड़ी के मेम्बर नम्बर चार मनीष सिसोदिया के व्यक्तिगत पेज में समर्थकों की संख्या है 4988 तथा इसके समर्थन के पेज में इसके समर्थकों की संख्या है केवल 124.

अर्थात 3 करोड़ भारतीय सदस्यों वाले फेसबुक के संसार में अन्ना गैंग की इस चौकड़ी को कुल 350851 लोगों का समर्थन प्राप्त है.

एक बार पुनः यह उल्लेख कर दूं की इसमें अधिकांश संख्या ऐसे साझा समर्थकों की होती है जो कई-कई पेजों पर जाकर अपना समर्थन व्यक्त करते हैं, और स्वाभाविक रूप से केजरीवाल को समर्थन देने वाला व्यक्ति किरण बेदी का भी समर्थक होगा. यदि यह भी जांच लिया जाए तो इस अन्ना टीम  के समर्थन की सबसे उर्वर भूमि मानी जाने वाली फेसबुक की 3 करोड़ भारतीयों की दुनिया में इस चौकड़ी के समर्थकों का आंकडा 2 से 1.5 लाख के आंकड़े के बीच झूलता नज़र आएगा.

इस टीम के मुखिया खुद अन्ना हजारे के मुख्य पेज पर समर्थकों की संख्या 3 लाख 21 हज़ार 448 है तथा अन्ना हजारे के समर्थन में बने 79 अन्य पेजों के समर्थकों की संख्या इसमें जोड़ देने पर यह आंकडा पहुँच जाता है 5 लाख 96 हज़ार 779 पर.

अर्थात केवल 01.98% समर्थन. जाहिर सी बात है की जो IAC समर्थक वही अन्ना समर्थक है.

इसी समर्थन में से अन्ना टीम की चर्चित चौकड़ी भी अपने समर्थन की बन्दर बाँट किये हुए है.

कुल मिलाकर यह स्पष्ट होता है कि 3 करोड़ भारतीयों वाले फेसबुक संसार में इस पूरी टीम और उसके जनलोकपाली मजमें के समर्थकों कि वास्तविक संख्या लगभग 6 लाख है, यानी केवल 2 प्रतिशत के आसपास ही है.

अब एक नज़र इस टीम अन्ना को ट्विटर पर प्राप्त समर्थन की.

मई 2011 तक के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार ट्विटर संसार के भारतवासी सदस्यों की संख्या लगभग 1 करोड़ 30 लाख के करीब थी.

ट्विटर कि इस दुनिया में किरण बेदी के नाम से बने 2 एकाउंट्स में से एक में किरण के समर्थकों कि संख्या है 303257 और दुसरे में 8326 यानि कुल समर्थकों कि संख्या है 311583. अर्थात लगभग 2.39%  समर्थन.

इसी ट्विट्टर की दुनिया में केजरीवाल के नाम से बने नौ एकाउंट्स में उसके कुल समर्थकों कि संख्या है 43998. अर्थात लगभग 00.33% समर्थन.

ट्विटर पर ही इस अन्ना टीम  ने जनलोकपाल के नाम से ही एकाउंट बना रखा है. ट्विटर पर इस जनलोकपाल के समर्थकों की संख्या है लगभग 181453. अर्थात 1.39%  समर्थन.

इसके अलावा जनलोकपाल  के नाम से 10-5 एकाउंट और हैं जिनमें समर्थकों की संख्या 25-50 और 100 तक है. अर्थात नगण्य.

ट्विटर पर प्रशांत भूषण नाम से बने 5-6 एकाउंटस में से किसी के समर्थकों की संख्या 2 है तो किसी की 5 और किसी की सिर्फ शून्य…!!! ये वही प्रशांत भूषन है जो देश के दो टुकड़े कर देने की सलाह पूरे देश को देता घूमता है.

कमोवेश यही स्थिति मनीष सिसोदिया नाम से बने 3 एकाउंट्स की है.

ट्विटर पर ही कुछ अन्ना समर्थकों द्वारा अन्ना हजारे के नाम से बनाये गए लगभग 100 एकाउंट्स में दर्ज समर्थकों की संख्या लगभग 42000 के करीब है. अर्थात लगभग 0.32% समर्थन.

अन्ना गैंग के समर्थन की सबसे उर्वर भूमि समझी जाने वाली इंटरनेट की दुनिया के फेसबुक एवं ट्विटर संसार में  ये है असलियत अन्ना टीम के स्वघोषित जननायकों तथा उनके जनलोकपाली मजमे को प्राप्त 121 करोड़ देशवासियों के तथाकथित समर्थन की.

अतः गाँव गरीब खेत किसान मजदूरों के लगभग 85% वास्तविक भारत में इस टीम को प्राप्त समर्थन का वास्तविक आंकडा क्या कितना और कैसा होगा, इसका आंकलन कठिन नहीं है.

इस टीम के अंध भक्तों को आइना दिख जाए  इसके लिए जिक्र ज़रूरी है की इसी ट्विटर की भारतीय दुनिया में अमिताभ बच्चन के सिर्फ एक एकाउंट के समर्थकों की संख्या ही 15 लाख 87 हज़ार 307 है, तो प्रियंका चोपड़ा के केवल एक एकाउंट के समर्थकों की संख्या 16 लाख 69 हज़ार 704 है. साझा समर्थकों की इसमें कोई सम्भावना ही नहीं.

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

7 Comments

  1. रवि तिवारी says:

    राजेश तिवारी समझ में तो मेरी नहीं आ रहा कि, तुम्हारी समझ में क्या नहीं आ रहा है…?
    लेख में इतना खोलकर इतने सटीक आंकड़ों के साथ सब कुछ कहा गया है. अन्ना गैंग द्वारा खुद को 121 करोड़ भारतीयों द्वारा समर्थन दिए जाने के झूठे और मक्कारीपूर्ण दावे की लेखक ने जिस तरह धज्जियां उड़ायीं हैं. झूठे दावे के सहारे पूरे देश की आँखों में धूल झोंकने की अन्ना गैंग की साजिशों को तथ्यों और तर्कों के साथ जिस तरह तार-तार किया है उसे तो कोई सामन्य व्यक्ति भी पहली नज़र में समझ लेगा. तुम क्यों नहीं समझ पा रहे हो…? ये बहुत गंभीर सवाल है.
    प्रायः इसका जवाब मानसिक रोग चिकित्सालयों में ही मिलता है.

  2. Shree Yantra (श्रीयंत्र) says:

    इतना तथ्य पूर्ण विश्लेषण देखने पढ़ने के बाद बचे खुचे अण्णा समर्थक ” बड़े बेआबरू होकर तेरे कूचे से हम निकले ” की स्थिति में हैं. और जब यहां यह हाल है तो जंतर मंतर और रामलीला मैदान की जगह लखनऊ के मुसलिम सम्मेलन में भी क्या तीर मार लेंगे…? “नाई” बता देगा क्या निकला है…!!!

  3. Suman says:

    Some of the Media house is behaving worse than Prostitutes.few of these cheap and new generation रेपोर्तेर्स/Journalists are working as a pimp for Congress. Prostitute and pimps don’t even care about thier mother, they only care about money. I cant expect any thing better from these Pimps and prostitute. They have never thought about the betterment of thier motherland. Shame on you for publishing shuch a lie.

    • Anoop Mishra says:

      सुमन जी वेश्याओं और उनके दलों से भी बदतर तो वो लोग हैं जो भारतमाता की अस्मिता और स्वाभिमान के साथ वैचारिक व्यभिचार-बलात्कार करने वाले प्रशांत भूषन, मेधा पाटकर संदीप पाण्डेय और उनके “सरगना-संरक्षक-समर्थक” किशन बाबू राव उर्फ़ अन्ना हजारे के समर्थन का देशघाती गीत गाते हैं, इस देशघाती गिरोह का गुणगान भांडों और भडुओं की तरह करते हैं.
      अंधे अन्ना भक्तों से सिर्फ यही कहना चाहूँगा कि चूहे यदि आँख बंद कर लें तो बिल्ली गायब नहीं हो जाती. शुतुर मुर्ग जब रेत के ढूह में अपना सर घुसेड लेता है तो रात नहीं हो जाती,
      “गैंग अन्ना” की “जन लोकपाली” पूँछ पकड़ कर लटक चुके कुछ पढ़े लिखे मूर्खों का समूह अवश्य ये मानता है की इन भूषन,किरण, केजरीवाल, सरीखे बेईमानों, देशद्रोहियों जालसाजों की पूँछ पकड कर लटकने के बाद हम भ्रष्टाचार की नदी पार कर सदाचार के तट पर पहुँच जायेंगे……!!!!!!!!

  4. Dr Yogeendra prakash dubey(Yahoo! Messenger) yogee says:

    अकाट्य तथ्यों की प्रस्तुति.. अन्ना के समर्थन में संपूर्ण देश के होने की दुहाई देकर कुतर्क करने वाले आँख के अन्धे हैं. अन्ना गैंग और उसके भक्तों की ये सोची समझी रणनीति है की अपने कुकर्मों, अपनी करतूतों, अपनी कमजोरियों को उजागर करने वाले सवालों,तथ्यों,तर्कों से लोगो का ध्यान हटाने के लिए उलटे-सीधे बयानों कुतर्कों से उस बहस को बरगलाओ, भटकाओ, बेहतर होगा की इस लेख में उजागर की गयी अन्ना गैंग की जालसाजी, उसके झूठे दावे की सच्चाई की आलोचना तर्कों और तथ्यों के साथ इस लेख को गलत और आधारहीन सिद्ध करके करें. लेख के तथ्यों तर्कों को को नकारने झुठलाने की अपनी अक्षमता के फलस्वरूप अन्ना गैंग के अंधे भक्तों की तिलमिलायी बौखलायी प्रतिक्रियाओं से सच्चाई छुप नहीं सकती.

  5. Rajesh Tiwari says:

    मेरी समझ में ये नहीं आता की आखिर एस तरह का लेख के माध्यम से अंजन लेखक क्या साबित करना चाहते हे ! बल्कि हमें एक सचे नागरिक बनकर पहले लोकपाल अद्यादेश लाना चाहिए उसके बाद जो भी भ्रष्ठ हे सामिल करे न की इस तरह के बयानों से मात्र अपनी भडाश निकलने या भ्रस्त लोगो को समर्थन मात्र प्रतीत होता हे . इसलिए मेरा मत हे पहले ईमानदारी की तरफ फिर बेमानो की खेर फिर वो अन्ना हो या किरण बेदी और या नेता.

    • manish says:

      congress media pe kafi kharche kar rahi hai…….. ye sab hume desh ki mul mudde se vatkane ki sajis hai…..

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