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नए दौर के गांधीवादी अन्ना को पसंद है हिंसा, टीवी पर दिए बयान को भी बताया झूठा

By   /  November 25, 2011  /  7 Comments

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जब नई दिल्ली में एक नौजवान ने कृषि मंत्री शरद पवार को चांटा रसीद किया तो यह ख़बर रालेगन सिद्धी भी पहुंची। अन्ना हजारे उसवक्त किसी दूसरे मसले पर पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। पत्रकारों ने उनकी बात खत्म हो जाने पर इस बारे में प्रतिक्रिया जानने की कोशिश की तो जवाब चौंकाने वाला मिला। अन्ना ने उठते-उठते पूछा, ”थप्पड़ मारा..? सिर्फ एक ही मारा..?”

कुछ दिन पहले ही शराब पीने वालों को खंभे से बांध कर पीटने की सिफारिश करने वाले ‘गांधीवादी’ अन्ना का शरद पवार से पुराना विरोध रहा है। जब पवार मुख्यमंत्री थे तो अन्ना हजारे ने कई मुद्दों पर बार-बार अनशन कर उनका खूब विरोध किया था। यह बात दीगर है कि शरद पवार के मुख्यमंत्रित्व काल में ही भ्रष्टाचार के खिलाफ मुहिम छेड़े तत्कालीन म्युनिसिपल कमिश्नर जी आर खैरनार रालेगन पहुंचे तो उन्हें अन्ना सरकारी गाड़ियों पर घूमते और अपने घर पर सरकारी कर्मचारियों का इस्तेमाल कर काम-धाम करवाते नजर आए थे।

बाद में खैरनार ने बताया कि अन्ना अनशन करने में जो पानी पीते थे उसमें विटामिन मिला कर रखते थे और यही कारण था कि दस-दस दिन के उपवास के बाद भी वे ‘जोश में भरे’ नजर आते थे। खैरनार रालेगन गए तो थे इन समाजसेवी से पवार के खिलाफ साथ देने की मांग करने, लेकिन जब उन्होंने देखा कि अन्ना को खुद ही भ्रष्टाचार का मतलब नहीं मालूम है, तो वे दुखी होकर वापस चले आए।

अन्ना का एक और ‘गांधीवादी’ चेहरा तब सामने आया जब उन्होंने टेलीविजन कैमरों के सामने दिए गए अपने बयान को मीडिया की ‘साजिश’ करार दे दिया। एक चैनल को फोन पर इंटरव्यू देते वक्त वे साफ मुकर गए कि उन्होंने ऐसी कोई बात की थी। (देखें वीडियो)

महात्मा गांधी अपने पूरे जीवन में जिन दो बातों के लिए मशहूर रहे थे वो थे– ‘सत्य और अहिंसा’। लगता है अन्ना ने इन दोनों को ही ताक पर रख दिया है। ये नए दौर का गांधीवाद है जो किसी को सुधारने के लिए उसे खंभे से बाध कर पीटने की सिफारिश करता है, एक सरफिरे नौजवान के एक राजनेता को एक थप्पड़ मारने से संतुष्ट नहीं होता है और टीवी कैमरों के सामने दिए अपने बयान से मुकरने में झिझकता भी नहीं है।

क्या यही आदर्श जनता के सामने रखेंगे अन्ना?

 

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

7 Comments

  1. Kuch sarkar poshit media muddo se dhyan Bhatkane ke liye se sab karte rahte hai…..

  2. ye sirf pratkriya thi …..isse pahle ANNA ne kaha hinsa ki?????????? yahi Sharad Pawar ke samay mai Sugar 90 Rs. Kg. bik rahi thi tad Media Darbar ne nahi batya Shard Pawar ki kitni Sugar Mils hai??????

  3. Mayank Porwal says:

    anna?

  4. Amit says:

    कृपया अन्ना को सिर्फ गाँधीवादी ना कहें. आज सिर्फ गाँधीवादी होने से ये सांसद नहीं सुन रहे हैं. इसलिए अन्ना कह चुके हैं मैं शिवाजी की भाषा भी बोलता हूँ. पवार को एक चांटे नहीं लात घूंसों चप्पलों की जरूरत है.

    जब प्रशांत पर हमला हुआ तो उन्होंने माफ़ किया. जब अरविन्द पर हमला हुआ तो इन्होने भी माफ़ किया ओर लैटर लिख कर ये कहा भी. पर पवार बोले ” मैं माफ़ करने वाला कौन!”. इस बात को समझें!

  5. Ranjit Vaidya says:

    किसने कहा कि अन्ना अहिंसा वादी है? उन के साथ आतंकवादी, हत्यारे, उनके वकील, भ्रष्ट अधिकारी और घपलेबाज शामिल हैं.. फिर काहे का आदर्श. जिन दारुबाजों को खम्भे से बाँध कर पीटने कि बात कर रहे थे अन्ना, उन्ही की बदौलत पिछले आन्दोलन में रौनक बनी रही थी.

  6. x says:

    गाँधी ने Zulu War, Boer War, World War 1 में अंग्रेजों का हर तरह से साथ दिया . यहाँ तक की वो ब्रिटिश फ़ौज में भी थे पर कभी सुभाष चन्द्र बोस का आजाद हिंद फ़ौज बनाने में मद्त नहीं की .
    फिर भी उन्हें अहिंसा का पुजारी कहते हैं जबकि उन्होंने अंग्रेजों का हर लड़ाई में साथ दिया पर कभी भारतीयों का साथ नहीं दिया
    महात्मा गाँधी के बारे में जानने के लिए ये लिंक देखें (उनके परपोते का क्या कहना है उनके चरित्र के बारे में)
    http://www.youtube.com/watch?v=9WezyyL5j2U
    विडम्बना तो ये है की जिस आदमी के कारण हम आजाद हुए उसे कोई श्रेय नहीं मिला. आज़ादी के सबसे बड़ा कारन सुभाष जी द्वारा बनाये गयी आजाद हिंद फ़ौज थी जानने के लिए ये लिंक देखें
    http://en.wikipedia.org/wiki/Indian_independence_movement#The_Indian_National_Army

  7. sunil says:

    Me bhi kahuga Bus ek hi tappad mara sare rajneta ko jo brastachari hai unko to mar mar ke desh se bahar nikal dena chayiye.

पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं. हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो. आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें - मॉडरेटर

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