/प्रेस की जमीन पर बहुमंजिला भवन बनवा दिया सतपुड़ा वाणी ने

प्रेस की जमीन पर बहुमंजिला भवन बनवा दिया सतपुड़ा वाणी ने

-विनय जी डेविड।।

* प्रेस भूखण्ड पर बना दी अवैध बहुमंजिला इमारत।

* दैनिक सतपुड़ा वाणी ने बेच दी गोयल बिल्डर्स को लीजडीड।

* भोपाल कलेक्टर, कमिश्नर नगर निगम, सी.ई.ओ., बी.डी.ओ, सतपुड़ा वाणी गोयल बिल्डर्स को नोटिस।

भोपाल के प्रेस काम्प्लेक्स में प्रेस चलाने और पत्रकारिता व्यवसाय के प्रायोजन में दी गई जमीनों में कई आवंटनकारियों ने अनुमति का दुरूपयोग कर नियम विरूद्ध बहुमंजिला बिल्डिंगें बनाकर करोड़ों रूपये का खेल खेला है। वहीं इस कार्य से शासन द्वारा दी गई मिट्टी के भाव कीमत की जमीन पर शासन को करोड़ों की हानि हुई है। कई प्रेस मालिकों ने बड़े-बड़े काम्प्लेक्स बनाकर बेच दिए है। जिसमें से एक है दै. सतपुड़ा वाणी प्रेस काम्प्लेक्स का 23 और 24 नम्बर का प्लॉट जिसमें आज गोयल निकेत काम्प्लेक्स सीना ताने खड़ा है। जिसके सम्बन्ध में पत्रकार अवधेश भार्गव ने सम्बन्धित दैनिक सतपुड़ा वाणी, गोयल बिल्डर्स एवं डेव्लपर्स भोपाल कलेक्टर, सी.ई.ओ. भोपाल विकास प्राधिकरण सहित नगर निगम कमिश्रर को नोटिस दिया है। जिसमें सिलसिलेवार आरोप लगाये गये है।

नोटिस में कहां गया है कि 28/07/1981 को दैनिक सतपुड़ा वाणी को प्लॉट क्रमांक 23 एवं 24 कुल क्षेत्रफल 36073 वर्गफिट का लीजडीड के माध्यम से प्रेस एवं प्रेस कार्यालय केबिन बनाने के लिये आवंटित किया गया। जिस पर दिनांक 31/05/1986 को कब्जा दिया गया। जिस पर जो भवन बनाया गया उस पर संचालक नगर तथा ग्राम निवेश ने शर्तों का उल्लघंन, दिशा निर्देशों को दर किनार कर निरंतर अवैधानिक रूप से निर्माण कार्यों पर आपत्ति उठाई थी।

वहीं मानचित्र के अनुसार विधिवत निर्धारित मापदण्ड़ों पर निर्माण करने के निर्देश दिये। परन्तु सतपुड़ा वाणी ने नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए गोयल बिल्डर्स एवं डेव्लपर्स की श्रीमती ओमवती गोयल से कथित तरीके से अनुबंध पत्र निष्पादित कर भूखण्ड पर बहुमंजिला भवन निर्माण करवा दिया।
निर्माण के दौरान 35+65 प्रतिशत तथा 65 प्रतिशत भाग अनुबंध किया, अनुबंध के पश्चात ही गोयल बिल्डर्स द्वारा नक्शे के विपरीत तथा आवास एवं पर्यावरण विभाग से बिना अनुमति प्राप्त किये ही बहुमंजिला बिल्डिंग का निर्माण कर दिया। बिल्डर्स का आरोप है कि नगर निगम भोपाल और आवास एवं पर्यावरण विभाग ने प्रेस के केबिन तथा प्रेस कार्यालय के लिए नक्शा को स्वीकार किया और अनापत्ति प्रमाण पत्र दिया गया था। इस स्वीकृत नक्शे मेंब नाला, खाली जगह और निर्माण की स्थिति स्पष्ट दर्शाई गई थी। जिसमें भोपाल विकास प्राधिकरण से निर्माण के पूर्व मानचित्र को प्रशासक राजधानी परियोजना से अनुमोदन करना अनिवार्य शर्त थी। परन्तु बिल्डर्स ने बिना किसी अनुमति के उक्त प्लॉट पर पांच मंजिला निर्माण कर लिया और बाजार भाव के हिसाब से बिक्री कर दी।

पत्रकार अवधेश भार्गव ने पूरे प्रकरण में सभी को नोटिस देकर विधि विरूद्ध तरीके से प्रेस से संबंधित स्वीकृत नक्शे के विपरीत निर्माण को रोकने और 23 नम्बर प्लॉट पर किये जा चूके निर्माण की भांति 24 नम्बर प्लॉट पर पुन: निर्माण कार्य करने के प्रयत्न पर रोक लगाने और पूर्व में किये गये प्लॉट क्रमांक 23 पर निर्माण को हटाने की मांग की है। वहीं उक्त भूखण्ड लीजडीड में वर्णित शर्तों का उल्लघंन किये जाने पर उक्त संबंध में लीजडीड समाप्त किया जाना आवश्क बताया।

नोटिस में दैनिक सतपुड़ा वाणी और गोयल बिल्डर्स की मिली भगत कर जो भूखण्ड अत्यधिक न्यूनतम मूल्य पर पत्रकारिता व्यवसाय हेतु प्राप्त किया गया था। उसे बहुमंजिला भवन में बदले हुए शासन को करोड़ों रूपयों की राजस्व हानि भी पहुंचाने का गंभीर आरोप लगाया है। साथ ही शासन से किये गये अवैध निर्माण और शासन की हानि के संबंध में तत्काल कार्यवाहीं कर निर्माण हटाने को कहां है। निर्माण नहीं हटाने की दशा में उक्त मामलें में सक्षम में याचिका प्रस्तुत की जाएगी।

 

 

 (विनय जी डेविड भोपाल में टाइम्स ऑफ क्राइम के संपादक हैं)

Facebook Comments

संबंधित खबरें:

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.