Share this on WhatsApp
Subscribe to RSS
कृपया अपनी खबरें, सूचनाएं या फिर शिकायतें सीधे mediadarbar@gmail.com पर भेजें | इस वेबसाइट पर प्रकाशित लेख लेखकों, ब्लॉगरों और संवाद सूत्रों के निजी विचार हैं। मीडिया के हर पहलू को जनता के दरबार में ला खड़ा करने के लिए यह एक सार्वजनिक मंच है। पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं। हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो। आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें -मॉडरेटर

‘वाय दिस कोलावेरी..’ ने दिखाया, ”कैसे बनाए जाते हैं रातों-रात स्टार?”

दक्षिण भारत में फिल्मों को लेकर जो क्रेज़ है वो किसी से छिपा नहीं है। उपर से रजनीकांत बोलें और पब्लिक पागल न हो ऐसा भला कैसे हो सकता है? रजनी अप्पा बोले कि कोलावेरी दी हिट होना मांग्ता तो हिट होने का ना..? इन दिनों इंटरनेट पर धूम मचा रहा ये टिंगलिश गाना डेढ़ करोड़ हिट पार कर चुका है। इसमें आवाज़ है तमिल एक्टर और सिंगर वेंकटेश प्रभु कस्थूरी राजा की जो धनुष के नाम से मशहूर हैं।

धनुष बोले तो कौन… वो तो रजनीकांत के दामाद हैं। रजनीकांत की बेटी सौन्दर्या आने वाली तमिल फिल्म मूंदरू-3 की हीरोइन हैं। रजनीकांत अब ढलती उम्र के कारण फिल्मों में आने से परहेज़ कर रहे हैं लेकिन उनके करोड़ों फैन्स के लिए वे भगवान से कम नहीं। सौन्दर्या की फिल्म के इस गीत को रजनीकांत ने ट्विटर पर प्रचारित किया तो उनके मित्र और सदी के महानायक अमिताभ बच्चन भला कैसे चुप रहते? उन्होंने भी इसके लिंक के बारे में ट्वीट किया तो यह यूट्यूब पर उत्तर भारत में भी सेन्सेशन बन गया। अब तक इसे डेढ़ करोड़ के करीब हिट्स मिल चुके हैं। गाने की लोकप्रियता का आलम यह है कि कई बॉलीवुड सितारों ने भी इस गाने को अपनी कॉलरट्यून बना लिया है।

दरअसल, कोलावेरी डी को ऐसे प्रचारित करने की कोशिश की गई मानो ये एक दुर्घटनावश लीक हुई हो। प्रचलित कहानी के मुताबिक तमिल फ़िल्म मूंदरू-3 का एक गाना रिकॉर्ड किया गया था जिसका एक हिस्सा 10 नवंबर को इंटरनेट पर लीक हो गया। लोग इसे हिट करने लगे और देखते-देखते इसके चहेतों की संख्या भारतीय म्युजिक इंडस्ट्री के लिए रिकॉर्ड बन गई। गीत को लोकप्रिय होता देख निर्माता-निर्देशक ने इसका मुख्य वर्ज़न इंटरनेट पर जारी करने का निर्णय लिया और 16 नवंबर को इस गीत का मुख्य वर्ज़न आधिकारिक तौर पर यूट्यूब पर प्रस्तुत किया गया।

धनुष की एक तमिल फ़िल्म में टूटी-फूटी अंग्रेज़ी के कुछ दृश्य बहुत लोकप्रिय हुए थे तो गीत के शब्दों को तमिल के साथ टूटी-फूटी अंग्रेज़ी में ही बुना गया. ये ‘टिंग्लिश’ आशु-गीत प्रेम की नाकामी पर है, मगर इसका रंग कॉमिक भरा रखा गया। ‘वाय दिस कोलावेरी डी’ का आम बोलचाल की हिंदी में अर्थ है ‘‘तुम मेरे ख़ून की प्यासी क्यों हो..?’’ ये बेतुकी सी पंक्ति ही इस गीत को एक मज़ेदार सा रंग देती है। यह अर्थ समाज में लोगों के बीच फैले गुस्से पर एक कटाक्ष है।

गीत की रातों रात ज़बरदस्त सफ़लता के कारणों की चर्चा करें तो बहुत से कारण सामने आ सकते हैं। बेतुके से लेकिन अनूठे बोल और अनोखी संगीत रचना। इसकी सरल सी धुन और कैची रिदम किसी के भी होठों पर तुरत चढ़ जा रही है। गीत की भाषा भी सरल है और धुन भी जो सुनने वालों को एक अलग और अनोखा सा अहसास दिलाती है। गीत की रचना का वीडियो फ़िल्मांकन भी बहुत मज़ेदार है और देखने वालों से तुरंत कनेक्ट स्थापित करता है। गीत में धनुष, श्रुति हसन और ऐश्वर्या की मौजूदगी ने भी उनके प्रशंसकों को रोमांचित किया है, लेकिन जिस फैक्टर ने गीत को सफ़ल बनाने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है वो है इंटरनेट के सोशल मीडिया टूल्स जिनमें यू-ट्यूब, फ़ेसबुक और ट्विटर की तिकड़ी मुख्य रूप से शामिल है।

इन सोशल-मीडिया टूल्स पर इसका वीडियो इसके दर्शकों ने जिस तत्परता और गति से साझा किया वो आने वाले दिनों में प्रचार माध्यमों के लिये एक बड़ा उदाहरण बन गया है। इन सोशल मीडिया टूल्स की खास बात ये है कि इसके दर्शक खुद प्रचार-प्रसार का माध्यम बन रहे हैं। इससे पहले भी जस्टिन बीबर, लेडी गागा और रैबेका ब्लैक जैसे नामों ने इन सोशल मीडिया टूल्स से प्रचार कर विश्व्व्यापी लोकप्रियता हासिल की है लेकिन भारत के लिये ‘कोलावेरी डी’ एक उदाहरण के रूप में सामने आया है।

गीत पर अपार प्रतिक्रियाओं को देखते हुए, रिकॉर्ड कम्पनी इसकी सफ़लता को भुनाने के लिये फ़िल्म के साउंडट्रैक से पहले इसे एक एमपी-3 एलबम मे शामिल कर जारी कर रही है। फ़िल्म के साउंडट्रैक पर भी ज़ोरों से काम चल रहा है। ‘कोलावेरी डी’ को महिला स्वरों में भी रिकॉर्ड किया गया है जो खासा लोकप्रिय हो गया है। हिन्दी गायक सोनू निगम भला इस मौके पर क्यों पीछे रहते? उनके बेटे नेवान निगम ने इस गीत को गाया और उसे भी यूट्यूब पर भारी सफलता मिली।

गीत ने फ़िल्म और संगीत उद्योग के प्रचार माध्यमों में इंटरनेट और सोशल मीडिया टूल्स की बढ़ती भूमिका को गहरे में रेखांकित किया है जो कि इस बात का संकेत है कि  आने वाले दिनो में इस उद्योग में प्रचार-प्रसार में ऐसे कई नए प्रयोग देखने को मिलेंगे। अपने पहले ही प्रयास से पूरे देश को कोलावेरी के रंग में झुमाने के बाद नए संगीतकार अनिरुद्ध के लिए सबसे बड़ी चुनौती है इस सफ़लता को कायम रखना।

धनुष भी इस गीत के माध्यम से तमिल फ़िल्मों के दायरे से निकल कर राष्ट्रीय मानचित्र पर आ चुके हैं। दोनों के लिए पहली बड़ी चुनौती होगी ‘थ्री’ के साउंडट्रैक में ‘कोलावेरी’ के स्तर को कायम रखना। वैसे इस सफ़लता से जन्मी कई नई चुनौतियां आने वाले दिनों में इन दोनों की कला को परखने के लिये तैयार मिलेंगी।

बहरहाल, मजेदार बात यह है कि इस गाने को तमिल न समझने वाले इलाकों यानी उत्तर भारत में भी लोग काफी पसंद कर रहे हैं। वैसे तो इसका संगीत काफी मधुर और जुबान पर चढ़ जाने वाला है साथ ही इसकी टिंगलिश को समझना भी आसान है, जिसकी वजह से इसने भाषाई बंधन तोड़ दिए हैं। वैसे ताज़ा खबर ये है कि इस लोकप्रियता को एक और धक्का देने के लिए खुद रजनीकांत इसके फिल्मांन में उतर रहे हैं।

Facebook Comments

संबंधित खबरें:

कृपया अपनी खबरें, सूचनाएं या फिर शिकायतें सीधे mediadarbar@gmail.com पर भेजें | इस वेबसाइट पर प्रकाशित लेख लेखकों, ब्लॉगरों और संवाद सूत्रों के निजी विचार हैं। मीडिया के हर पहलू को जनता के दरबार में ला खड़ा करने के लिए यह एक सार्वजनिक मंच है। पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं। हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो। आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें -मॉडरेटर

1 comment

#1kulwant mittalDecember 9, 2011, 7:24 PM

कोलावेरी – कोलावेरी गाना वाकई दिल को सुकून देने wala है

Add your comment

Nickname:
E-mail:
Website:
Comment:

Other articlesgo to homepage

UNI: जो खबर देते थे सबकी उनकी खबर नहीं..

UNI: जो खबर देते थे सबकी उनकी खबर नहीं..(0)

Share this on WhatsApp -कश्यप किशोर मिश्रा॥ जरूरी नहीं, कि जो सबकी खबर दे उसके बारे में भी सबको खबर हो । देश की शीर्ष समाचार एजेंसी यूनाइटेड न्यूज ऑफ इंडिया (यूएनआई) के संदर्भ में यह बात सटीक बैठती है । दुनिया भर की खबर देने वाली यूएनआई की अपनी खबर यह है, कि आज

साहेब के नाम एक ख़त..

साहेब के नाम एक ख़त..(0)

Share this on WhatsApp -रीमा प्रसाद|| थोड़ी उलझन में हूँ .. अपने खत की शुरूआत किस संबोधन से करूं. सिर्फ शहाबुद्दीन कहूंगी तो ये आपकी महानता पर सवाल होगा. शहाबुद्दीन जी या साहेब कहूंगी तो मेरा जमीर मुझे धिक्कारेगा. सो बिना किसी संबोधन के साथ और बिना किसा लाग लपेट के इस खत की शुरुवात

“मोदी ब्रांड” का मिसयूज कर रहे हैं एलजी, दिल्ली भाजपा नेता और राजनाथ सिंह..

“मोदी ब्रांड” का मिसयूज कर रहे हैं एलजी, दिल्ली भाजपा नेता और राजनाथ सिंह..(0)

Share this on WhatsApp -देवेंद्र शास्त्री॥ दिल्ली में आप सरकार के काम और उसके परिणामों से भाजपा और कांग्रेस की दिल्ली लीडरशिप बोखला गई है। उन्हें समझ ही नहीं आ रहा कि क्या किया जाए। दोनों पार्टियों की लीडरशिप एक बात पर सहमत हैं कि किसी तरह आप सरकार के कामकाज के सिलसिले को रोका

पत्रकारिता के स्तर में होगा व्यापक सुधार..

पत्रकारिता के स्तर में होगा व्यापक सुधार..(0)

Share this on WhatsApp बिना कोर्स किये हुए लोग नहीं बन सकेंगे पत्रकार.. नई दिल्ली। पत्रकारिता के गिरते स्तर तथा पत्रकारिता जगत में असामाजिक तत्वों के प्रवेश से चिंतित केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा समाचार पत्रों के पंजीकरण, समाचार पत्र/पत्रिका व टीवी चैनल तथा न्यूज एजेंसी द्वारा जारी प्रैस कार्ड के लिए नियमावली तैयार

देशभक्ति की ओवरडोज़..

देशभक्ति की ओवरडोज़..(0)

Share this on WhatsApp -आरिफा एविस॥ नए भारत में देशभक्ति के मायने औए पैमाने बदल गये हैं. इसीलिए भारतीय संस्कृति की महान परम्परा का जितना प्रचार प्रसार भारत में किया जाता है शायद ही कोई ऐसा देश होगा जो यह सब करता हो. सालभर ईद, होली, दीवाली, न्यू ईयर पर सद्भावना सम्मेलन, मिलन समारोह इत्यादि

read more

ताज़ा पोस्ट्स

Contacts and information

मीडिया दरबार - जहाँ लगता है दरबार. आप ही राजा हैं इस दरबार के और कटघरे में है मीडिया. हम तो मात्र एक मंच हैं और मीडिया पर अपनी निगाह जमायें हैं, जहाँ भी मीडिया में कुछ गलत होता दिखाई देता है उसे हम आपके सामने रख देते हैं और चलाते हैं मुकद्दमा. जिसपर सुनवाई करते हैं आप, जहाँ न्याय करते हैं आप. जी हाँ, यह एक अलग किस्म का दरबार है. मीडिया दरबार...

Social networks

Most popular categories

© 2014 All rights reserved.
%d bloggers like this: