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सहवाग को दिया तोहफ़ा, तो पूनम पांडेय की वेबसाइट हुई जामः यहां देखें वीडियो

By   /  December 11, 2011  /  2 Comments

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इंटरनेट सनसनी के नाम से मशहूर किंगफिशर गर्ल पूनम पांडेय ने इंडियन क्रिकेट टीम के सलामी बल्लेबाज वीरेंन्द्र सहवाग के दोहरा शतक मारने पर उन्हें खास तोहफा क्या दिया, उनकी वेबसाइट जाम हो गई है। अपने वादे के मुताबिक पूनम ने एक और उत्तेजक वीडियो अपनी वेबसाईट पर अपलोड  तो कर दिया, लेकिन दर्शकों के कौतूहल से वेबसाइट पर भारी ट्रैफिक आ गया है। यह अलग बात है कि हर बार की तरह इस बार भी दर्शक खुद को ठगा हुआ ही महसूस कर रहे हैं।

पूनम का कहना है कि उन्होंने अपना वादा निभाया और फैंस को खुश होने का एक और मौका दे दिया है। पूनम के वीडियो अपलोड करते ही उनकी साईट poonampandey.in पर हेवी ट्रैफिक आ गया और वीडियो तो दूर, होमपेज तक पहुंचना मुश्किल हो गया है। यह जानकारी खुद पूनम ने अपने ट्विटर अकाउंट पर दी है। हालांकि दर्शकों का मानना है कि यह वीडियो सिर्फ एक बार देखने लायक ही है। कुछ लोगों का तो यहां तक मानना है कि पिछले बाथरूम और बेडरूम वीडियोज के मुकाबले भी यह वीडियो फीका है।

पूनम ने माइक्रो ब्लॉगिंग साइट ट्विटर पर ट्वीट कर कहा था, ट्वीटहार्ट्स, डबल ट्रीट 219 नाम से नया वीडियो जल्द ही आपके सामने होगा। 2 मिनट 19 सेकंड का यह वीडियो 4 बजे दिखेगा।हालांकि इसके पहले पूनम ने ट्वीट किया था कि किसी ने उनका अकाउंट हैक कर लिया है और डबल ट्रीट 219 नाम से नया वीडियो अपलोड करने की खबर हैकर ने पोस्ट की है।

इस बारे में जब पत्रकीरों ने पूनम से बात की तो उन्होंने कहा, ”हां.. किसी ने मेरा अकाउंट हैक कर यह पोस्ट कर दिया था। वैसे मैंने वीडियो अपलोड करने का फैसला किया है और मेरा अकाउंट अब हैकर से आजाद हो चुका है।” इसके साथ ही पूनम ने यह भी बताया था कि उन्होंने सहवाग को तोहफे के तौर पर यह वीडियो अपलोड करने के कारण 2 मिनट 19 सेकंड का ही रखा है क्योंकि उन्होंने 219 रन बनाए हैं। देखिए पूनम का नया वीडियो:

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

2 Comments

  1. Raam Thakur says:

    प्यार होता है या करना पड़ता है ?

  2. Ajay Pandey says:

    वैरी गुड

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