/छत्तीसगढ़ में मीडिया पर अघोषित एमरजेंसी: पत्रिका को धमकाया, बंद करवाया ई-टीवी का प्रसारण

छत्तीसगढ़ में मीडिया पर अघोषित एमरजेंसी: पत्रिका को धमकाया, बंद करवाया ई-टीवी का प्रसारण

-ठाकुर शिखा सिंह।।

सरकार खुलेआम गुंडागर्दी पर उतर आई है और भाजपा के ‘गवर्नेंस विद अ डिफरेंस’ का नाम अब ‘दादागिरी बाइ द गवर्नमेंट’ हो गया है।” – शैलेंद्र पाण्डेय, ई-टीवी ब्यूरो प्रमुख, रायपुर

भारतीय जनता पार्टी की ‘गवर्नेंस विद अ डिफरेंस’ का नाम अब ‘दादागिरी बाइ द गवर्नमेंट’ हो गया है। ई-टीवी ने मुख्यमंत्री रमण सिंह पर आरोप लगाया है कि वो अब खुलेआम दादागिरी करके उनके चैनल का प्रसारण रुकवा रही है। ई-टीवी ने रमण सिंह की छत्तीसगढ़ सरकार पर एक बड़े माइनिंग घोटाले की खबर प्रसारित की थी।

ई-टीवी एमपी-छत्तीसगढ़ ने पिछले दिनों प्रदेश में चल रहे एक बड़े माइनिंग घोटाले की खबर प्रसारित की थी। खबर के मुताबिक मध्यप्रदेश के सीधी में रमण सिंह के रिश्तेदारों ने खदानों की जमीन औने-पौने दामों में हासिल कर ली थी। बताया जाता है कि इस खबर के प्रसारण के फौरन बाद रायपुर में हैथवे-भास्कर-सीसीएन के एक आला  अधिकारी अशोक अग्रवाल के पास डिप्टी कमिश्नर ‘एक्साइज़’ आर एस ठाकुर का फोन आया, जिसमें ई-टीवी का प्रसारण रोकने के लिए कहा गया।

खबर है कि प्रदेश भर के केबल ऑपरेटरों को ऐसे ही फोन आए और उन्हें ई-टीवी का प्रसारण रोकने को कहा गया। एक बड़े केबल ऑपरेटर ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उन्हें प्रसारण न रोकने की स्थिति में गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी गई है। ई-टीवी के छत्तीसगढ़ ब्यूरो प्रमुख शैलेश पाण्डेय के मुताबिक, ”सरकार खुलेआम मीडिया पर हमला बोल रही है और जनता बेबस है।”

ग़ौरतलब है कि इसी खबर को पत्रिका अखबार ने दो दिनों पहले छापा था तो धत्तीसगढ़ के भाजपा कार्यकर्ताओं ने उसकी प्रतियां जला डालीं थीं। यहां तक कि मुख्यमंत्री रमण सिंह ने संवाददाता सम्मेलन में अखबार को खुलेआम धमकी तक दे डाली थी। मुख्यमंत्री की शह पर सैकड़ों भाजपा कार्यकर्ताओं ने पत्रिका के रायपुर कार्यालय पर हमला तक करने की कोशिश कर डाली। अब सवाल यह उठता है कि अगर खुद मुखिया ही मीडिया से लड़ने लगे तो उसके सरकार की छवि क्या रह जाएगी?

Facebook Comments

संबंधित खबरें:

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.