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क्या डॉन-2 की पब्लिसिटी के लिए शाहरुख ने पटना के लोगों पर चलवाईं लाठियां?

By   /  December 14, 2011  /  1 Comment

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बिहार की राजधानी पटना के पीएनएम मॉल पर लोगों ने जमकर हंगामा किया जिसे रोकने के लिए पुलिस को लोगों पर जमकर लाठियां बरसानी पड़ी। ये हंगामा फिल्मस्टार शाहरुख खान के आने के ऐलान के बावजूद मॉल में ना पहुंचने के कारण बरपा था। अब कयास लगाए जा रहे हैं कि क्या शाहरुख का पटना में लोगों को पिटवाना डॉन की पब्लिसिटी स्टंट का हिस्सा था?

दरअसल शाहरूख अपनी आने वाली फिल्म डॉन-2 के प्रमोशन के लिए पटना आने वाले थे। इस इवेंट की पब्लिसिटी करीब महीने भर से चल रही थी और बताया गया था कि शाहरुख पटना के लोगों से बातचीत कर एक ‘डॉन ऑफ द सिटी’ चुनेंगे। इस चक्कर में सैकड़ो की संख्या में लोग मॉल में एकत्र हुए थे। जिसमें बच्चे, बूढ़े, युवा और महिलाएं भी शामिल थीं। आयोजकों ने लोगों को जमा तो कर लिया, लेकिन आखिरी मिनट में घोषित किया कि शाहरुख नहीं आएंगे।

उधर पत्रकारों को भेजे गए एसएमएस में एक आयोजक ने लिख डाला कि पटना प्रशासन ने दखलंदाजी कर शाहरुख को आने से रोक दिया है। पटना के एसएसपी आलोक कुमार ने मीडिया दरबार को साफ कहा कि ऐसी कोई बात नहीं है। कुमार के मुताबिक उन्हें मिली जानकारी के मुताबिक एयरपोर्ट प्रशासन ने खराब मौसम के कारण फिल्म स्टार के चार्टर्ड प्लेन को उतरने की सलाह नहीं दी गई। उन्होंने जोर देकर कहा कि शाहरुख की सुरक्षा के पूरे बंदोबस्त किए गए थे।

हक़ीकत ये थी कि शाहरुख ने मुंबई से उड़ान ही नहीं भरी थी। सूत्रों का कहना है कि बिहार में नीतीश कुमार की सरकार है और कांग्रेस समर्थक शाहरुख ने मौसम के मिज़ाज की बदली बिहार सरकार पर बरसा कर एक तीर से दो निशाने साधने की कोशिश कर दी। शाहरुख को पता था कि उनके इस बयान का असर होगा और पटना में भीड़ बेकाबू हो उठी।

देर शाम अपने ट्विटर पर किए गए ट्वीट में शाहरुख ने लिखा, ”मैं अपनी पहली पटना यात्रा को लेकर बेहद उत्साहित था, लेकिन ज़िला प्रशासन ने सुरक्षा कारणो से रोक दिया.. फिर कभी आउंगा।” लेकिन इतने कड़वे अनुभव के बाद बिहार की जनता शायद ही शाहरुख का दोबारा इंतज़ार करेगी, फिल्म को तो आने से पहले ही नकल कह कर नकार दिया गया है।

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

1 Comment

  1. cherag says:

    ब्लैक मनी का बादशाह, हिजड़ो का ideal शारुख खान

पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं. हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो. आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें - मॉडरेटर

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