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गोल्ड सुख इफेक्टः पी-7 के चिटफंडिए मालिकों के खिलाफ कार्रवाई, GNN चैनल भी निशाने पर

पीएसीएल का जयपुर हेड राकेश चित्तौड़ा

जयपुर की गोल्ड सुख के मालिकों के करोड़ों रुपए लेकर फरार होने बाद अब राजस्थान सरकार नींद से जाग कर दूसरी चिटफंड कंपनियों पर शिकंजा कसने में जुट गई है। न्यूज़ चैनल पी7 की मदर कंपनी पीएसीएल के कई कार्यालयों में पुलिस ने छापामारी की है और कुछ अधिकारियों की गिरफ्तारी भी हुई है। छापेमारी के बाद से पूरे पर्ल ग्रुप में हड़कम्‍प मचा हुआ है। पीएसीएल न्यूज़ चैनल एवं प्रिंट मीडिया समेत कई कारोबार तो चलाता ही है, करने वाली चिटफंड कंपनी के कई वरिष्‍ठों को पुलिस ने गिरफ्तार भी किया है। पिछले दो दिनों से जारी छापेमारी में पुलिस ने पीएसीएल के जयपुर हेड राकेश चित्‍तौड़ा को गिरफ्तार किया है। कंपनी निदेशकों को गिरफ्तार करने के लिए पुलिस टीम दिल्‍ली भी भेजी गई है।

पीएसीएल कंपनी का मुख्यालय वैसे तो दिल्ली में है, लेकिन चिटफंड कंपनी के तौर पर यह जयपुर में ही रजिस्टर्ड है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि कंपनी के दस्तावेज़ों में जाच से भारी घपले की बू आ रही है। बांसवाड़ा में पीएसीएल के शाखा प्रबंधक भूपेंद्र कुमार श्रीवास्‍तव को भी गिरफ्तार किया गया है। पीएसीएल पर निवेशकों से कम राशि लेकर महंगी जमीन देने का झांसा देकर धोखाधड़ी करने का आरोप है। पीएसीएल की राजस्‍थान में 277 शाखाएं हैं। यह कंपनी पहले भी बार्डर पर जमीन खरीदने के विवादों में रह चुकी है। पुलिस जांच में सामने आया है कि कंपनी राजस्‍थान में औसतन प्रतिमाह करीब पचास से साठ करोड़ रुपये लोगों से कलेक्‍ट कर रही थी. कंपनी पर आरोप है कि राजस्‍थान में इसने लगभग तीन सौ करोड़ रुपये की ठगी की है।

पी-7 के निदेशक ज्योति नारायण

जयपुर में डीसीपी (नार्थ) अशोक नरुका के मुताबिक पीएसीएल निवेशकों को महंगी जमीन सस्ते में बेचने का झांसा देकर धोखाधड़ी कर रही है। कंपनी ने देश भर में करीब 25 लाख लोगों से पैसे लगवाए हैं। पुलिस ने जयपुर में कंपनी के संसार चंद्र रोड पर विंडसर प्लाजा में स्थित कार्यालय में दस्तावेजों की जांच भी की गई। इस कंपनी के निदेशकों रोपड़ निवासी गुरमत सिंह, सुखदेव सिंह और त्रिलोचन सिंह के गिरफ्तारी के वारंट जारी किए गए हैं। पीएसीएल पर छापेमारी की घटना से घबराए निवेशक भी राजस्‍थान में तमाम जगहों पर स्थित कार्यालयों पर पहुंच गए तथा पूछताछ शुरू कर दी। खबर है कि मध्‍य प्रदेश के ग्‍वालियर में भी पीएसीएल के दिल्ली निवासी अधिकारी के एस भट्टाचार्या के खिलाफ भी कई धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। दिल्ली में पी-7 के निदेशक ज्योति नारायण भी अपने ऑफिस नहीं आए। ऑफिस में पूछने पर नपा सा जवाब मिला कि साहब आए नहीं हैं, कब आएंगे, पता नहीं। 

पीएसीएल के अलावा पुलिस ने कई अन्‍य चिटफंड कंपनियों के दफ्तरों पर छापेमारी तथा अधिकारियों की गिरफ्तारी की है। सीकर में चिटफंड कंपनी प्रिया परिवार के चेयरमैन तेजपाल सिंह नूनियां तथा दो डाइरेक्‍टरों सुरेंद्र नूनियां और महेश नूनियां को गिरफ्तार करने के बाद कोर्ट से 20 तक रिमांड पर ले लिया है। एक और चेन मार्केटिंग कम चिटफंड कंपनी आरसीएम पर भी छापेमारी की गई है। इस कंपनी के राजसमंद स्थित दो दुकानों को सीज कर लिया गया है। यहां से मांगी लाल एवं दिनेश प्रजापत नाम के दो लोगों को गिरफ्तार किया गया।

मेरी गोल्ड प्लस ट्रेड विजन कंपनी के डायरेक्‍टर रामवतार सिंह, चंद्रशेखर अग्रवाल एवं कविता अग्रवाल को भी पुलिस ने दो दिन के रिमांड पर लिया है। पुलिस सभी निदेशकों के निजी खातों की जांच कर रही है।  पीएसीएल के बाद एक जीएनएन न्‍यूज़ के नाम से चैनल चलाने वाली जीएन ग्रुप में भी दहशत है। यह ग्रुप भी सरकारी रडार के निशाने पर है। गौरतलब है कि जीएन ग्रुप भी गोल्ड सुख के ही नक्‍शे कदम पर चल रही है। जीएन ग्रुप लैंड डेवलपर्स, जीएन गोल्ड और जीएन फायनैंस जैसी आधा दर्ज़न कंपनियां इस ग्रुप में शामिल हैं।

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.