/आम आदमी के हाथों आया ‘आकाश’: अभी स्लो है, अगले महीने होगा ‘गैलेक्सी’ से भी फास्ट

आम आदमी के हाथों आया ‘आकाश’: अभी स्लो है, अगले महीने होगा ‘गैलेक्सी’ से भी फास्ट

दुनिया के सबसे सस्‍ते टैबलेट कंप्यूटर ‘आकाश’ तक आम आदमी की पहुंच बेशक हो गई हो, यह पिछली पीढ़ी के फोन से भी धीमा और कम कनेक्टिविटी वाला माना जा रहा है। इसे बनाने वाली कंपनी भी इस कमी को मान रही है और अगले महीने एक तेज वर्ज़न लांच करने जा रही है।

यह टैबलेट 2500 रुपये में उपलब्‍ध है। इस टैबलेट को बनाने वाली कंपनी ‘डेटाविंड’ ने करीब 30 हजार टैबलेट ऑनलाइन बेचना शुरू कर दिया। इसकी डिलिवरी सात दिनों के भीतर हो जाएगी। ऑनलाइन खरीदारी पर पेमेंट डिलीवरी के वक्त ही करना होगा।

अगर इस टैबलेट को तुरंत आर्डर करना चाहते हैं तो वेबसाइट www.akashtablet.com या www.akashtablet.org पर जाकर लॉग इन करें। वैसे तो आकाश टैबलेट में ढेरों फीचर्स बताए जा रहे हैं। इस 7 इंच के टचस्क्रीन टैबलेट में एंड्रॉयड 2.2 (फ्रायो) ऑपरेटिंग सिस्टम का सपोर्ट है। ये टैबलेट 366 मेगाहर्ट्ज माइक्रोप्रॉसेसर पर चलेगा जो पिछली पीढ़ी के फोनों के मुकाबले भी धीमा है। इसमें 256 एमबी की रैम है और इसका वजन 350 ग्राम है। इसमें 2,100 एमएएच बैटरी है तथा इसमें केवल वाई-फाई नेटवर्क सपोर्ट है। कुल मिला कर इससे इंटरनेट कनेक्ट करना एक टेढ़ी खीर ही साबित होगा।

इसके बावजूद इस पीसी की मांग बहुत ज्यादा है। डेटाविंड के संस्थापक और सीईओ सुनीत सिंह तुली के मुताबिक कंपनी के पास करीब चार लाख टैबलेट के ऑर्डर आए थे लेकिन सीमित खरीदारों के लिए अभी यह टैबलेट उपलब्ध है। टैबलेट की भारी मांग को देखते हुए ऑनलाइन बिक्री के लिए कंपनी को उपभोक्ता सेवा से जुड़ी समस्याओं से जूझना पड़ सकता है क्योंकि ‘आकाश’ सीमित संख्या में ही ऑनलाइन बिक्री के लिए उपलब‍ध है।

आकाश टैबलेट का अपडेटेड वर्जन ‘यूबीस्‍लेट 7’ अगले माह यानी जनवरी में बाजार में आ जाएगा। यह वर्जन 700 मेगाहर्टज प्रॉसेसर पर काम करेगा जो इससे कहीं अधिक कीमत पर उपलब्ध सैमसंग के फोन गैलेक्सी मिनी से भी तेज होगा । इसमें अपडेटेड एंड्रायड 2.3 ऑपरेटिंग सिस्टम है जबकि बैटरी 3,200 एमएएच की होगी। ये वाई-फाई के अलावा जीपीआरएस नेटवर्क पर भी काम करेगा। इसकी कीमत महज 2,999 रुपए होगी।

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.