/क्या शैलेश ने नाराज़ होकर छोड़ा आजतक, या जा रहे हैं बड़ी जिम्मेदारी उठाने?

क्या शैलेश ने नाराज़ होकर छोड़ा आजतक, या जा रहे हैं बड़ी जिम्मेदारी उठाने?

अजीत अंजुम और सुप्रिय प्रसाद के बीच बैठे शैलेश (फाइल चित्र)

खबर है कि आजतक के एक्जीक्यूटिव एडिटर और वरिष्ठ पत्रकार शैलेश ने इस्तीफा दे दिया है। कुछ समय पहले ही उन्हें आजतक के इनपुट हेड के पद से हटाकर आजतक के नए निकलने वाले हिंदी अखबार के लांचिंग की जिम्मेदारी दी गई थी। बताया जाता है कि शैलेश ने एक नए ग्रुप के मीडिया विंग का दामन थाम लिया है। यह ग्रुप कई नए चैनल्स ले कर आने वाला है जिसमें न्यूज और एंटरटेनमेंट के चैनल शामिल हैं। करीब आधा दर्जन नए चैनल लांच करने की तैयारी कर रहे इस ग्रुप में शैलेश बतौर सीईओ ज्वाइन करेंगे।

नए ग्रुप के नाम के बारे में जानकारी नहीं मिली है, पर आजतक से जुड़े कुछ अंदरुनी सूत्र बताते हैं कि शैलेश एचएससीएल ग्रुप के साथ जुड़ने वाले हैं। इस बारे में जब शैलेश से बात करने की कोशिश की गई तो उन्होंने फिलहाल कोई कमेंट करने से इनकार कर दिया। सूत्रों का कहना है कि शैलेश के आजतक से विदा लेने के बाद उनके कई करीबी लोग भी आजतक चैनल को अलविदा कह सकते हैं। अब आजतक में कयास लगाया जा रहा है कि कौन कौन लोग शैलेश के साथ उनके नए चैनल में जा सकते हैं।

उल्लेखनीय है कि इन दिनों आजतक न्यूज चैनल आंतरिक बदलाव के दौर से गुजर रहा है पुराने लोगों की जगह नए लोगों को तरजीह दी जा रही है। आजतक छोड़कर गए सुप्रिय प्रसाद को चैनल में ज्वाइन कराया जा चुका है। प्रबल प्रताप सिंह ने आईबीएन7 से इस्तीफा देकर फिर से आजतक में वापसी कर ली है। प्रबल को शैलेश की जगह पर इनपुट हेड बनाया गया था। समझा जाता है कि आजतक में अपनी उपेक्षा से नाराज शैलेश ने इस्तीफा देना उचित समझा है।

प्रिंट मीडिया में करीब पंद्रह वर्ष तक काम कर चुके शैलेश नवभारत टाइम्स, रविवार, अमृत प्रभात जैसे अखबारों में कई तरह की जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं। बिहार के भागलपुर निवासी शैलेश ने लखनऊ में रहते हुए नवभारत टाइम्स में स्पेशल कॉरेस्पांडेंट, रविवार में स्पेशल कॉरेस्पांडेंट के पद पर काम किया था। आजतक के कमर वहीद नकवी और नवभारत टाइम्स के संपादक राम कृपाल सिंह के साथ वे लखनऊ से ही जुड़े थे। जब दूरदर्शन पर आजतक बतौर कार्यक्रम शुरु हुआ तो शैलेश एसपी सिंह के बाद दूसरे नंबर के प्रमुख थे। उन्होंने ज़ी न्यूज़ और सिटी केबल के प्रमुख के तौर पर भी काम किया है।

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.