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नेटवर्क 18 की डील में अंबानी से और पैसा वसूलना चाहते हैं राघव बहल?

By   /  January 4, 2012  /  No Comments

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नेटवर्क 18 और रिलायंस ग्रुप के बीच हुए स्ट्रैटेजिक समझौते के तहत दोनों समूह मिल-जुल कर लोगों का मनोरंजन करेंगे, लेकिन लग रहा है कि ये कोई विन-विन डील नहीं है। हालांकि बताया जा रहा है कि इस डील के बाद नेटवर्क 18 और टीवी 18 दोनों कंपनियां कर्ज मुक्त हो जाएंगी, लेकिन नेटवर्क 18 को ये सौदा महंगा लग रहा है। नेटवर्क 18 के वेबसाइट मनीकंट्रोल.कॉम ने आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज़ के विशेषज्ञों के हवाले से लिखा है कि उनकी कंपनी इस सौदे कि लिए ज्यादा पैसे चुका रही है। खबर के मुताबिक ईटीवी के लिए 2,100 करोड़ रुपये का वैल्यूएशन ज्यादा है।

समझौते के मुताबिक रिलायंस इंडस्ट्रीज ईटीवी चैनलों में हासिल की गई अपनी हिस्सेदारी टीवी-18 को बेचेगी। इसके ऐवज में रिलायंस इंडस्ट्रीज के 4G प्लेटफॉर्म पर नेटवर्क 18 के चैनलों और वेबसाइटों का कंटेंट दिया जाएगा। दरअसल मुकेश अंबानी टेलीविजन समूह नेटवर्क 18 में 1500 करोड़ रूपये का निवेश करने जा रहे हैं। यह निवेश रिलायंस के सहयोगी संस्थानों द्वारा नेटवर्क 18 समूह में किया जाएगा।

डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के क्षेत्र में नेटवर्क 18 सबसे तेजी से उभरता समूह है जिसके पास न्यूज़ चैनलों, बिजनेस न्यूज़ चैनलों और कई सफल वेबसाइटों का जाल है। नेटवर्क 18 समूह का संचालन एमी अवार्ड से सम्मानित पत्रकार राघव बहल करते हैं और उनके पास सीएनबीसी तथा आईबीएन नाम से अलग-अलग चैनल समूह हैं। इसके अलावा एक सफल मनोरंजन चैनल कलर्स भी इस नेटवर्क का हिस्सा है तथा चैनलों के डिस्ट्रीब्यूशन का एक बड़ा प्लेटफॉर्म भी। इसी तरह इन.कॉम और मनीकन्ट्रोल.कॉम नाम के दो सफल वेबसाइट भी इसी समूह के पास है।

पहले मुकेश अंबानी खुद ही ईटीवी समूह को खरीदना चाहते थे जिसमें उनके समूह की कुछ ही हिस्सेदारी है लेकिन अब वे यही काम नेटवर्क 18 के माध्यम से करने जा रहे हैं। खबर है कि नेटवर्क 18 करीब 2100 करोड़ रूपये खर्च करके ईटीवी के सभी क्षेत्रीय चैनलों की 100 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीद लेगा। इसके साथ ही मनोरंजन चैनल में 50 प्रतिशत हिस्सेदारी भी नेटवर्क 18 समूह हासिल कर लेगा। इसके बाद नेटवर्क 18 समूह नेशनल और रीजनल चैनलों के मामले में अव्वल कंपनी बनने की ओर अग्रसर हो जाएगी। संभवत: राघव बहल की इन्हीं योजनाओं को देखते हुए रिलायंस समूह नेटवर्क18 में बड़ा निवेश करने जा रहा है।

इस निवेश का रिलायंस को दोहरा फायदा होगा। एक तरफ जहां रिलायंस को उभरती मीडिया कंपनी में हिस्सेदारी मिल रही है वहीं दूसरी तरफ उनके आगामी 4 जी परियोजना के लिए कंटेट भी उपलब्ध होगा। आगामी कुछ महीनों में रिलायंस समूह एक बार फिर इंटरनेट और मोबाइल टेलीफोनी क्षेत्र में उतरने जा रहा है। कंपनी 4जी टेक्नॉलॉजी के जरिए भारतीय बाजार में प्रवेश करने जा रही है और इस बार भी मुकेश अंबानी मोबाइल डिवाइस साथ में देंगे। पहले जैसे उन्होंने डब्लूएलएल तकनीक के जरिए मोबाइल मार्केट में प्रवेश किया था वैसे ही इस बार वे ब्रॉडबैंड टेक्नालॉजी के जरिए मोबाइल मार्केट में उतर रहे हैं। खबर है कि रिलायंस पांच से सात हजार रूपये में एक टैब अपने ग्राहकों को मुहैया करायेगा जो वायस और डाटा दोनों के लिए उपयोग में लाया जा सकेगा। इस टैब पर 4 जी टेक्नालॉजी का उपयोग किया जा सकेगा। रिलायंस समूह अपनी इसी योजना को मूर्त रूप देते हुए नेटवर्क 18 से कन्टेन्ट का समझौता भी कर रहा है ताकि टैब पर कन्टेन्ट की बड़ी वैरायटी उपभोक्ताओं को दी जा सके।

कुछ ही दिनों पहले हुई इस घोषणा से वैसे तो उपरी तौर पर दोनों समूह खुद को संतुष्ट बता रहे थे, लेकिन इस ताजा खबर के प्रकाशन से लगता है राघव बहल अपने नेटवर्क की कुछ और कीमत वसूलना चाहते हैं।

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

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